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गलत तरीके से न करें पूजा का अंत! भावेश भीमानाथानी से जानिए क्या है 'उत्तर पूजा' और इसके नियम
आध्यात्मिक शिक्षक और कंटेंट क्रिएटर भावेश भीमानाथानी ने अपने एक हालिया वीडियो में पूजा के समापन की हिंदू पद्धति यानी 'उत्तर पूजा' के महत्व पर विस्तार से बात की है। उन्होंने समझाया कि जिस तरह हम पूरे आदर के साथ देवताओं का आह्वान करते हैं, उसी प्रकार पूजा के अंत में उन्हें विदा करने की भी एक बेहद पवित्र और आवश्यक शास्त्रीय विधि होती है।
भावेश भीमानाथानी ने समझाया कि पूजा को अधूरा या अचानक नहीं छोड़ना चाहिए
Photo Credit: instagram
- जिस तरह पूजा की शुरुआत जरूरी है, उसी तरह उसका अंत भी दिव्य होना चाहिए
- 'उत्तर पूजा' का अर्थ है अनुष्ठान के अंत में देवताओं को सम्मानपूर्वक विदा
- जिस तरह पूजा की शुरुआत जरूरी है, उसी तरह उसका अंत भी दिव्य होना चाहिए
क्या होती है 'उत्तर पूजा'?
भावेश भीमानाथानी के अनुसार, 'उत्तर पूजा' का सीधा अर्थ है मुख्य पूजा के संपन्न होने के बाद की जाने वाली अंतिम विदाई प्रक्रिया। उन्होंने एक बेहद सुंदर उदाहरण देते हुए समझाया कि जब हम अपने घर में किसी सम्मानित अतिथि को आमंत्रित करते हैं, तो हम न केवल उनका स्वागत (आह्वान) करते हैं और उन्हें भोजन (प्रसाद) कराते हैं, बल्कि उनके प्रस्थान के समय उन्हें आदरपूर्वक विदा भी करते हैं। ठीक इसी तरह, जब हम पूजा के दौरान मंत्रों द्वारा देवताओं को मूर्ति या वेदी में बुलाते हैं, तो पूजा के अंत में उन्हें वापस उनके लोक भेजने या हमारे हृदय में निवास कराने के लिए 'उत्तर पूजा' करना अनिवार्य होता है।
अधूरा रह जाता है अनुष्ठान का फल
भावेश भीमानाथानी ने वीडियो में सचेत करते हुए बताया कि यदि कोई व्यक्ति उत्तर पूजा किए बिना या देवताओं को सही विधि से विसर्जित किए बिना अपनी पूजा का स्थान छोड़ देता है, तो वह अनुष्ठान शास्त्र संवत तरीके से अधूरा माना जाता है। उत्तर पूजा के दौरान मंत्रों के माध्यम से देवताओं के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है, अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगी जाती है और उनसे पुनः आने की प्रार्थना की जाती है। यह प्रक्रिया भक्त के भीतर अहंकार को समाप्त कर कृतज्ञता का भाव जगाती है।
सोशल मीडिया पर आध्यात्मिक ज्ञान की सराहना
आज के समय में जब युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति के मूल कारणों को समझने की कोशिश कर रही है, भावेश भीमानाथानी जैसे कंटेंट क्रिएटर्स के वीडियो काफी मददगार साबित हो रहे हैं। इंस्टाग्राम और अन्य डिजिटल माध्यमों पर लोग इस जानकारी के लिए उनका धन्यवाद कर रहे हैं। दर्शकों का कहना है कि इस वीडियो को देखने के बाद उन्हें समझ आया कि पूजा केवल एक क्रिया नहीं, बल्कि देवताओं के साथ संवाद स्थापित करने और उन्हें सम्मान देने की एक संपूर्ण कला है।
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