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सावन में बच्चों को दें भक्ति और अनुशासन के संस्कार: इन्फ्लुएंसर साई प्रवीण शर्मा ने शेयर किए खास टिप्स
श्रावण के पावन महीने में लोकप्रिय इन्फ्लुएंसर साई प्रवीण शर्मा ने बच्चों को अनुशासन सिखाने के बेहतरीन तरीके साझा किए हैं। उन्होंने शिव मंदिर जाने, पंचाक्षरी मंत्र का जाप करने और महादेव की कहानियाँ सुनाने पर जोर दिया है। साई का मानना है कि ये सरल प्रथाएं बच्चों को अपनी संस्कृति से जोड़ती हैं और उनके व्यक्तित्व में सुधार लाती हैं। इस वीडियो के जरिए उन्होंने माता-पिता को बच्चों के साथ मिलकर भक्ति करने की प्रेरणा दी है।
सावन का महीना बच्चों को अनुशासन और अध्यात्म सिखाने का उत्तम समय है
Photo Credit: instagram
- बच्चों से खुद भगवान शिव का जलाभिषेक कराने से बढ़ता है धैर्य और सेवा भाव
- महादेव की कहानियाँ बच्चों में वीरता, दया और त्याग के संस्कार भरती हैं
- परिवार के साथ की गई पूजा-पाठ आपसी प्रेम और जुड़ाव को मजबूत बनाती है
श्रावण का पवित्र महीना शुरू हो चुका है और चारों तरफ महादेव की भक्ति की गूँज है। इस पावन अवसर पर लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर और लाइफस्टाइल इन्फ्लुएंसर साई प्रवीण शर्मा ने एक बहुत ही प्रेरणादायक वीडियो साझा किया है। उनका कहना है कि यह समय न केवल बड़ों के लिए, बल्कि बच्चों को अनुशासन और संस्कारों की शिक्षा देने के लिए भी सबसे उत्तम है। साई प्रवीण शर्मा ने इस वीडियो के जरिए माता-पिता को कुछ सरल लेकिन प्रभावशाली तरीके बताए हैं, जिनसे बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है क्योंकि इसमें अध्यात्म को आधुनिक जीवनशैली से जोड़ने की कोशिश की गई है।
शिव मंदिर और जलाभिषेक का महत्व
साई प्रवीण शर्मा का पहला और सबसे महत्वपूर्ण सुझाव है कि बच्चों को हर सोमवार शिव मंदिर ले जाया जाए। वे कहती हैं कि बच्चों को खुद अपने हाथों से भगवान शिव का जलाभिषेक करने देना चाहिए। इससे उनमें भक्ति के साथ-साथ एक अनुशासन पैदा होता है। मंदिर जाने की यह प्रक्रिया उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ती है और उनमें सेवा का भाव जागृत करती है। यह एक ऐसी आदत है जो उन्हें बचपन से ही धैर्य और श्रद्धा सिखाती है। जलाभिषेक के दौरान मिलने वाली शांति बच्चों के चंचल मन को शांत रखने में बहुत कारगर साबित होती है।
मंत्रों की शक्ति और एकाग्रता
साई प्रवीण शर्मा के अनुसार, बच्चों को 'पंचाक्षरी मंत्र' यानी 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करना सिखाना चाहिए। सुबह और शाम को कुछ मिनटों के लिए मंत्रों का उच्चारण न केवल मन को शांति देता है, बल्कि बच्चों की एकाग्रता की शक्ति को भी बढ़ाता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और मोबाइल की दुनिया में, यह मंत्र साधना बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने में मदद करती है। साई का मानना है कि छोटी उम्र से ही मंत्रों का प्रभाव बच्चों के व्यक्तित्व को निखारने का काम करता है और उनकी बौद्धिक क्षमता भी सुधरती है।
कहानियों के जरिए गहरा जुड़ाव
तीसरी बात जो साई प्रवीण शर्मा ने साझा की है, वह है बच्चों को भगवान शिव की कहानियाँ सुनाना। वे कहती हैं कि महादेव की कहानियाँ वीरता, दया और त्याग का प्रतीक हैं। जब बच्चे इन कहानियों को सुनते हैं, तो वे खुद को भगवान से ज्यादा जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। अंत में, साई ने सलाह दी है कि इन सभी चीजों को परिवार के साथ मिलकर करें। यह केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि परिवार के साथ बिताया गया एक सुंदर और सार्थक समय है। इससे आपसी प्रेम भी बढ़ता है।
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