सीए साक्षी जैन की सलाह: क्यों है आपके आईटीआर और एआईएस का मिलान करना बेहद जरूरी
टैक्स एक्सपर्ट सीए साक्षी जैन का कहना है कि साल 2026 में आईटीआर दाखिल करने से पहले एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) का मिलान जरूर कर लें। इससे बचत खाते का ब्याज, एफडी ब्याज और म्यूचुअल फंड रिडेम्पशन जैसी छूट गई वित्तीय जानकारियों का पता चल जाता है। दोनों दस्तावेजों का मिलान करने से रिपोर्टिंग की गलतियां ठीक हो जाती हैं और बाद में विभाग से नोटिस मिलने का खतरा काफी कम हो जाता है।
एक्सपर्ट साक्षी जैन ने आईटीआर भरने से पहले एआईएस मिलान की सलाह दी है।
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- एआईएस में ब्याज, एफडी ब्याज और म्यूचुअल फंड निवेश की जानकारी होती है
- बचत खाते का ब्याज और म्यूचुअल फंड मुनाफे की अनदेखी से नोटिस आ सकता है
- आईटीआर और एआईएस के बीच का अंतर करदाताओं के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता ह
आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया को अक्सर करदाता अपने वार्षिक वित्तीय दायित्वों का अंतिम चरण मानते हैं। बहुत से लोग अपनी आय का विवरण दर्ज करने, कटौतियों का दावा करने और रिटर्न जमा करने के बाद यह मान लेते हैं कि उनका काम समाप्त हो गया है। हालांकि, इस प्रक्रिया में की गई एक छोटी सी अनदेखी या लापरवाही भी आयकर विभाग की ओर से जांच और समीक्षा का कारण बन सकती है। वित्तीय विशेषज्ञ सीए साक्षी जैन करदाताओं को सलाह देती हैं कि वे अपने वर्ष 2026 के आयकर रिटर्न को अंतिम रूप देने से पहले वार्षिक सूचना विवरण (AIS) की सावधानीपूर्वक और गहराई से समीक्षा अवश्य करें।
टैक्स विभाग के पास है आपके लेनदेन का पूरा ब्योरा
वर्तमान समय में डिजिटल तकनीक के विस्तार के कारण आयकर विभाग के पास करदाताओं के वित्तीय लेनदेन की जानकारी पहले से कहीं अधिक तेजी और सटीकता से पहुंचती है। बहुत से करदाता इस बात से पूरी तरह अनभिज्ञ होते हैं कि टैक्स विभाग के पास पहले से ही उनके बैंक खातों, निवेशों और अन्य वित्तीय गतिविधियों का विस्तृत विवरण मौजूद रहता है। यदि आपके द्वारा दाखिल किए गए ITR और विभाग के पास उपलब्ध AIS के आंकड़ों में कोई बड़ा अंतर या विसंगति पाई जाती है, तो सिस्टम स्वतः ही विसंगति दर्ज कर लेता है। इसके बाद विभाग की ओर से स्पष्टीकरण मांगने के लिए करदाता को नोटिस जारी किए जा सकते हैं।
अक्सर छूट जाने वाली महत्वपूर्ण वित्तीय जानकारियां
एआईएस (AIS) में कई तरह के वित्तीय विवरण शामिल होते हैं, जिन्हें सामान्य तौर पर करदाता भूलवश छोड़ देते हैं। इनमें मुख्य रूप से विभिन्न बचत खातों से अर्जित होने वाला ब्याज, सावधि जमा (FD) पर मिलने वाला ब्याज, म्यूचुअल फंड की आंशिक या पूर्ण निकासी, शेयर बाजार से प्राप्त लाभांश (dividends) और अचल संपत्ति की खरीद-फरोख्त से जुड़े लेनदेन शामिल हैं। जिन करदाताओं के पास एक से अधिक बैंक खाते होते हैं या जिन्होंने अलग-अलग योजनाओं में निवेश किया होता है, उनके लिए इन आंकड़ों का मिलान करना और भी आवश्यक हो जाता है।
सिर्फ 10 मिनट का समय बचाएगा भविष्य की परेशानियां
सीए साक्षी जैन के अनुसार, रिटर्न दाखिल करने से ठीक पहले एआईएस को देखने में केवल दस मिनट का समय लगता है। यह संक्षिप्त और सरल अभ्यास भविष्य में विभाग की ओर से आने वाले किसी भी असहज करने वाले नोटिस या स्पष्टीकरण के अनुरोध से बचाने में अत्यधिक मददगार साबित हो सकता है। समय रहते विसंगतियों को ठीक करने और सही विवरण प्रस्तुत करने से आपकी वित्तीय रिपोर्टिंग की सत्यता बनी रहती है और कर निर्धारण सुचारू रूप से पूरा होता है।
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