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सुशांत दिवगीकर ने मेडिकल ट्रांजिशन पर की खुलकर बात, बताया- ‘खुद को दिया सबसे बड़ा तोहफा’

सुशांत दिवगीकर ने अपनी मेडिकल ट्रांजिशन जर्नी को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक डॉक्टर्स से सलाह लेने के बाद उन्होंने हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी शुरू की है और इसे अपनी जिंदगी का बेहद खास कदम बताया।

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सुशांत दिवगीकर ने अपनी मेडिकल ट्रांजिशन जर्नी पर खुलकर बात की।

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • सुशांत दिवगीकर ने मेडिकल ट्रांजिशन पर की बात
  • डॉक्टर्स की सलाह के बाद शुरू की हार्मोन थेरेपी
  • कहा- यह खुद को दिया सबसे बड़ा तोहफा है

LGBTQ+ एक्टिविस्ट, सिंगर और परफॉर्मर सुशांत दिवगीकर ने अपनी जिंदगी के एक बेहद निजी और अहम पड़ाव के बारे में खुलकर बात की है। सुशांत ने पहली बार अपनी मेडिकल ट्रांजिशन जर्नी के बारे में विस्तार से बताया है। उन्होंने खुलासा किया कि कई महीनों तक डॉक्टर्स से सलाह और जरूरी मेडिकल प्रक्रिया से गुजरने के बाद उन्होंने हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी शुरू की है। सुशांत के लिए यह फैसला सिर्फ एक मेडिकल प्रक्रिया नहीं, बल्कि खुद को पूरी तरह स्वीकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

लंबे समय से कर रही थीं तैयारी

सुशांत के मुताबिक, मेडिकल ट्रांजिशन का फैसला उन्होंने जल्दबाजी में नहीं लिया। इसके लिए उन्होंने कई महीनों तक अलग-अलग डॉक्टर्स से सलाह ली और अपनी बॉडी और जरूरतों को समझा। इसके बाद उन्होंने हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी शुरू करने का फैसला किया।

सुशांत ने इस पूरे सफर को बेहद निजी बताया है। उनके लिए अपनी पहचान को समझना और उसके मुताबिक जिंदगी जीना लंबे समय से चल रही एक प्रक्रिया रही है। वह पहले भी जेंडर, पहचान और खुद को स्वीकार करने जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखती रही हैं।

‘खुद को दिया सबसे बड़ा तोहफा'

अपनी मेडिकल ट्रांजिशन जर्नी को लेकर सुशांत ने इसे अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा और गहरा तोहफा बताया। उनका मानना है कि खुद को समझने और अपनी पहचान को स्वीकार करने के बाद अपनी जिंदगी को उसी तरह जी पाना बेहद जरूरी है, जैसा इंसान अंदर से महसूस करता है।
 

सुशांत लंबे समय से एलजीबीटीक्यूआईए+ कम्युनिटी के लिए आवाज उठाती रही हैं। वह अपनी पहचान और जेंडर को लेकर समाज में मौजूद सोच पर भी बात करती रही हैं। उनका कहना है कि किसी इंसान की पहचान से ज्यादा जरूरी उसकी काबिलियत और इंसानियत है।

2027 तक पूरी तरह सहज होने की उम्मीद

सुशांत ने अपनी आगे की जर्नी को लेकर भी उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि उन्हें भरोसा है कि 2027 तक वह अपनी मेडिकल ट्रांजिशन के साथ पूरी तरह सहज और आरामदायक महसूस करेंगी। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि हर व्यक्ति की ट्रांजिशन जर्नी अलग होती है और इसका समय हर किसी के लिए एक जैसा नहीं होता।

पहचान और खुद को स्वीकार करने की कहानी

सुशांत दिवगीकर की पहचान सिर्फ एक कलाकार या एक्टिविस्ट के तौर पर नहीं है। वह 2014 में मिस्टर गे इंडिया का खिताब जीत चुकी हैं और बाद में ड्रैग आर्टिस्ट रानी को-हे-नूर के नाम से भी अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने मनोरंजन की दुनिया में एलजीबीटीक्यूआईए+ कम्युनिटी की मौजूदगी और प्रतिनिधित्व को लेकर लगातार आवाज उठाई है।

उनकी नई जर्नी भी इसी सोच का हिस्सा है। सुशांत का यह कदम बताता है कि अपनी पहचान को समझना और उसके साथ सहज होना हर व्यक्ति के लिए एक अलग और निजी सफर हो सकता है। अपनी मेडिकल ट्रांजिशन के बारे में खुलकर बात करके सुशांत ने एक बार फिर खुद को स्वीकार करने और अपनी जिंदगी को अपनी शर्तों पर जीने का संदेश दिया है।

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