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रिश्तों में कड़वाहट क्यों बढ़ती है? गौर गोपाल दास का 'टंग ट्विस्टर' वाला मंत्र
आध्यात्मिक गुरु गौर गोपाल दास के अनुसार, जीवन और रिश्तों में अक्सर 'कड़वाहट' आ जाती है। वे 'बैटी और बटर' के टंग ट्विस्टर का उदाहरण देते हुए समझाते हैं कि जिस तरह कड़वे मक्खन को ठीक करने के लिए 'बेहतर मक्खन' की जरूरत होती है, वैसे ही हमें भी जीवन की कड़वी यादों को बेहतर आचरण से बदलना चाहिए। यदि हम कड़वे बने रहेंगे, तो हम केवल और अधिक कड़वाहट को ही अपनी ओर आकर्षित करेंगे।
रिश्तों में कड़वाहट क्यों बढ़ती है? गौर गोपाल दास का 'टंग ट्विस्टर' वाला मंत्र
Photo Credit: Instagram
- अनोखी सीख: एक टंग ट्विस्टर के जरिए गौर गोपाल दास ने समझाया जीवन का सार
- चुनाव की शक्ति: कड़वा बने रहना है या बेहतर होना, यह पूरी तरह आपके हाथ में
- ऊर्जा का नियम: आपकी नकारात्मकता ही और अधिक कड़वाहट को आकर्षित करती है
बचपन में हम सभी ने Tongue Twisters के साथ मस्ती की है। शब्दों का वह उलझाव केवल जीभ की कसरत के लिए था, लेकिन प्रसिद्ध लाइफ कोच गौर गोपाल दास ने इसमें से एक ऐसा जीवन दर्शन निकाला है जो आज के तनावपूर्ण रिश्तों के लिए रामबाण इलाज है। उन्होंने एक प्रसिद्ध अंग्रेजी टंग ट्विस्टर "Betty bought some butter, but the butter was too bitter, so Betty bought a bit of better butter to make the bit of bitter butter better" के माध्यम से एक बहुत ही संजीदा संदेश दिया है।
1. कड़वाहट का प्रवेश
गौर गोपाल दास कहते हैं कि जैसे बैटी का मक्खन कड़वा निकला, वैसे ही हमारी जिंदगी में भी कई बार स्थितियां और लोग कड़वाहट लेकर आते हैं। हमारे साथ कुछ गलत हो जाता है, कोई हमें धोखा देता है, या रिश्तों में दूरियां आ जाती हैं। यह 'कड़वाहट' हमारे नियंत्रण में नहीं होती। जैसे बैटी को पता नहीं था कि मक्खन कड़वा होगा, वैसे ही हमें भी पता नहीं होता कि कब कोई परिस्थिति हमें दुखी कर देगी।
2. कड़वाहट का आकर्षण
यहाँ लेख का सबसे गहरा मनोवैज्ञानिक बिंदु आता है। गौर गोपाल दास चेतावनी देते हैं कि यदि हमारे साथ कुछ बुरा हुआ है और हम उसके बदले खुद 'कड़वे' बन जाते हैं, तो हम एक खतरनाक 'वाइब्रेशन' और ऊर्जा पैदा करते हैं। ब्रह्मांड का नियम है कि आप जो भेजते हैं, वही वापस आता है। यदि आप भीतर से कड़वाहट और नफरत से भरे हुए हैं, तो आप अनजाने में अपने जीवन में और अधिक कड़वे अनुभव, झगड़े और दुखद स्थितियों को आकर्षित करने लगेंगे।
3. 'बेटर' होने का चुनाव
टंग ट्विस्टर का समाधान यह था कि बैटी ने उस कड़वे मक्खन को फेंकने के बजाय उसमें 'बेहतर मक्खन' मिलाया ताकि वह ठीक हो जाए। गौर गोपाल दास समझाते हैं कि हमें भी यही करना चाहिए। हमारे साथ जो हुआ, उसे हम बदल नहीं सकते, लेकिन हम खुद को 'बेहतर' बनाने का चुनाव जरूर कर सकते हैं।
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रिएक्ट न करें: कड़वाहट के बदले कड़वाहट देना केवल आग में घी डालना है।
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रिस्पॉन्स दें: परिपक्वता का अर्थ है यह तय करना कि "भले ही मेरे साथ बुरा हुआ है, लेकिन मैं बुरा इंसान नहीं बनूंगा।"
4. रिश्तों में इसका महत्व
रिश्तों में अक्सर हम सालों पुरानी बातों को लेकर कड़वे बने रहते हैं। गौर गोपाल दास का मानना है कि कड़वे रहने से कोई समस्या नहीं सुलझती, बल्कि वह सड़ती रहती है। जो व्यक्ति यह चुन लेता है कि उसे इस स्थिति से ऊपर उठना है और खुद को निखारना है, वह न केवल अपनी शांति वापस पा लेता है, बल्कि वह दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन जाता है।
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