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सिद्धार्थ मल्होत्रा ने ऐसे संभाली कियारा की 'पोस्टपार्टम' जर्नी, मुश्किल दिनों में दी हिम्मत
अभिनेत्री कियारा आडवाणी ने अपनी बेटी सरायाह के जन्म के बाद के भावनात्मक अनुभवों को साझा किया है। उन्होंने बताया कि 'पोस्टपार्टम' के उन कठिन और चुनौतीपूर्ण दिनों में उनके पति सिद्धार्थ मल्होत्रा उनकी सबसे बड़ी ढाल बने। सिद्धार्थ के अटूट सहयोग, धैर्य और समझदारी ने कियारा को मानसिक तनाव से उबरने और मातृत्व की नई खुशियों को अपनाने में बहुत मदद की। यह जोड़ा अब एक साथ अपनी नई भूमिका का आनंद ले रहा है।
सिद्धार्थ मल्होत्रा ने ऐसे संभाली कियारा की 'पोस्टपार्टम' जर्नी, मुश्किल दिनों में दी हिम्मत
Photo Credit: Instagram
ख़ास बातें
- भावनात्मक सहारा
- परफेक्ट पार्टनर
- पेरेंटिंग गोल्स: कियारा के अनुसार सिद्धार्थ के सहयोग से आसान हुआ मातृत्व
बॉलीवुड की सबसे पसंदीदा जोड़ियों में से एक, कियारा आडवाणी और सिद्धार्थ मल्होत्रा, इन दिनों अपनी जिंदगी के सबसे खूबसूरत और महत्वपूर्ण पड़ाव का आनंद ले रहे हैं। अपनी बेटी सरायाह मल्होत्रा के स्वागत के बाद से ही यह जोड़ा चर्चा में है। हाल ही में एक बातचीत के दौरान, कियारा ने अपनी प्रेग्नेंसी के बाद के उन दिनों के बारे में खुलकर बात की, जिन्हें अक्सर समाज में नजरअंदाज कर दिया जाता है वह है 'पोस्टपार्टम' यानी बच्चे के जन्म के बाद का भावनात्मक और शारीरिक बदलाव।
सिद्धार्थ: एक 'अल्टिमेट' सपोर्ट सिस्टम
कियारा ने साझा किया कि माँ बनने के शुरुआती दिन भावनाओं के उतार-चढ़ाव से भरे थे। नई जिम्मेदारियों का अहसास और शरीर में होने वाले बदलाव कई बार 'ओवरवेल्मिंग' हो जाते थे। ऐसे में सिद्धार्थ मल्होत्रा न केवल एक पिता के रूप में बल्कि एक बेहतरीन जीवनसाथी के रूप में उनके साथ खड़े रहे। कियारा के अनुसार, सिद्धार्थ ने उनकी उन खामोश भावनाओं को भी समझा जिन्हें वे शब्दों में नहीं कह पा रही थीं। उन्होंने कियारा को वह मानसिक शांति और सुकून दिया जिसकी एक नई माँ को सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
साझेदारी वाली पेरेंटिंग
आज के दौर में जहाँ 'पेरेंटिंग' को अक्सर केवल माँ की जिम्मेदारी मान लिया जाता है, सिद्धार्थ ने उसे बदल दिया। कियारा ने बताया कि सिद्धार्थ घर और बच्चे की जिम्मेदारियों में पूरी तरह शामिल रहे हैं। चाहे वह कियारा को आराम देने की बात हो या बेटी सरायाह का ख्याल रखना, सिद्धार्थ ने साबित कर दिया कि वे एक 'इम्पैथेटिक' साथी हैं। सिद्धार्थ के इसी स्वभाव की वजह से कियारा अपनी इस नई यात्रा को बिना किसी डर के जी पाईं।
कियारा का 'पोस्टपार्टम' दिनों के बारे में बात करना बहुत महत्वपूर्ण है। यह समाज को संदेश देता है कि एक नई माँ को केवल दवाइयों की नहीं, बल्कि अपनों के साथ और समझ की भी जरूरत होती है। सिद्धार्थ और कियारा की यह कहानी यह भी दर्शाती है कि एक सफल रिश्ता वही है जहाँ कठिन समय में एक-दूसरे का हाथ थामकर चला जाए।
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