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युद्ध के दौर में बाजार में कैसे निवेश करें? अनुष्का राठौड़ ने समझाया समझदारी वाला तरीका

जियोपॉलिटिकल तनाव या युद्ध के समय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है. ऐसे में कई छोटे निवेशक घबराकर गलत फैसले ले लेते हैं. फाइनेंस इन्फ्लुएंसर अनुष्का राठौड़ बताती हैं कि अनुभवी निवेशक ऐसे समय में कैसे धैर्य रखते हैं और चरणों में निवेश करके जोखिम कम करते हैं.

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Anushka Rathod Breaks Down How Smart Investors Handle Markets in Times of War

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • अनुष्का राठौड़ ने युद्ध जैसे समय में धीरे-धीरे निवेश करने की सलाह दी
  • विशेषज्ञ अचानक बढ़ रहे तेल, सोना, डिफेंस शेयरों के पीछे भागने से बचते हैं
  • ETF जैसे विकल्प कम जोखिम के साथ निवेश करने में मदद करते हैं

जब दुनिया में कहीं युद्ध या बड़ा जियोपॉलिटिकल तनाव शुरू होता है, तो उसका असर अक्सर शेयर बाजार पर भी तुरंत दिखने लगता है. कीमतें तेजी से ऊपर-नीचे होती हैं और ऐसे समय में छोटे निवेशक अक्सर घबराकर फैसले ले लेते हैं. फाइनेंस इन्फ्लुएंसर अनुष्का राठौड़ कहती हैं कि अनुभवी निवेशक ऐसे समय में घबराने के बजाय शांत रहते हैं. वे डेटा, धैर्य और एक साफ रणनीति के साथ बाजार को समझते हैं, जिससे वे मुश्किल दौर में भी बेहतर फैसले ले पाते हैं.

घबराहट में लिए फैसले अक्सर नुकसान देते हैं

अनुष्का बताती हैं कि बाजार में अचानक गिरावट आते ही कई लोग सबसे पहले अपना पैसा निकालकर कैश में बैठने की कोशिश करते हैं. उन्हें लगता है कि इससे जोखिम कम हो जाएगा. लेकिन लंबे समय तक कैश रखने से महंगाई धीरे-धीरे पैसे की असली कीमत घटा देती है. यानी पैसा सुरक्षित दिखता है, लेकिन उसकी ताकत कम होती जाती है. कुछ निवेशक इसके उलट बिल्कुल कुछ नहीं करते और गिरते बाजार को बस देखते रहते हैं. वहीं कुछ लोग अचानक बढ़ रहे सेक्टर जैसे तेल, सोना या डिफेंस स्टॉक्स के पीछे भागने लगते हैं और ऊंचे दाम पर खरीद लेते हैं.

अनुष्का के मुताबिक ये तीनों ही प्रतिक्रियाएं आम हैं, लेकिन अक्सर सही नहीं होतीं.

अनुभवी निवेशक क्या अलग करते हैं

अनुभवी निवेशक आम तौर पर बाजार की शुरुआती घबराहट में बड़े फैसले नहीं लेते. वे सिर्फ इसलिए अपने लंबे समय के निवेश नहीं बेचते क्योंकि बाजार गिर गया है.

साथ ही वे अचानक तेजी दिखा रहे शेयरों के पीछे भी नहीं भागते. उनका तरीका थोड़ा अलग होता है.

वे पहले स्थिति को समझने और देखने की कोशिश करते हैं. इतिहास बताता है कि किसी भी बड़े वैश्विक तनाव के शुरुआती दिनों में बाजार काफी उतार-चढ़ाव दिखाता है. ऐसे समय में जल्दबाजी में लिया गया फैसला बाद में नुकसान दे सकता है.

धीरे-धीरे निवेश करने की रणनीति

अनुष्का बताती हैं कि ऐसे समय में एक अच्छा तरीका है स्टैगर्ड इन्वेस्टिंग, यानी धीरे-धीरे अलग-अलग समय पर निवेश करना.

इस तरीके के कई फायदे होते हैं:

  • बाजार गिरने पर कम कीमत पर ज्यादा यूनिट खरीदी जा सकती हैं.
  • बाजार ऊपर आने पर कम यूनिट खरीदी जाती हैं.
  • कुल मिलाकर निवेश की औसत लागत कम हो जाती है.
  • और सबसे बड़ी बात, बाजार का बिल्कुल सही निचला स्तर पकड़ने का दबाव खत्म हो जाता है.

यह तरीका खासकर ETF जैसे लिक्विड निवेश विकल्पों में ज्यादा काम आता है, क्योंकि इनमें खरीद-फरोख्त करना आसान होता है.

असली ताकत : धैर्य रखें

अनुष्का राठौड़ का कहना है कि युद्ध या संकट के समय निवेश का असली खेल भविष्य की भविष्यवाणी करने का नहीं होता. असली बात होती है अपने व्यवहार को संभालने की. अगर निवेशक धैर्य रखें, निवेश को अलग-अलग हिस्सों में करें और अपने लंबे लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखें, तो वे बाजार की उथल-पुथल के बीच भी बेहतर फैसले ले सकते हैं.

उनके मुताबिक, जब बाजार युद्ध या संकट से हिलता है, तब घबराहट नहीं, बल्कि अनुशासन ही निवेशक की सबसे बड़ी ताकत बनता है.

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