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लेफ्टिनेंट से ब्रिगेडियर तक की कमाई: अंकुर वारिको का वायरल वीडियो

डिजिटल क्रिएटर अंकुर वारिको ने भारतीय सेना के अधिकारियों की सैलरी और मिलने वाली सुविधाओं का पूरा विवरण साझा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे एक लेफ्टिनेंट की सैलरी 95 हजार से शुरू होकर ब्रिगेडियर बनने तक 2.5 लाख रुपये तक पहुँचती है। वीडियो में सिर्फ पैसे ही नहीं, बल्कि सरकारी बंगले, कार और सहायक जैसी सुविधाओं के बारे में भी बताया गया है, जो इस करियर को और भी आकर्षक और सम्मानजनक बनाती हैं।

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लेफ्टिनेंट से ब्रिगेडियर तक की कमाई: अंकुर वारिको का वायरल वीडियो

Photo Credit: instagram

ख़ास बातें
  • रिटायरमेंट के बाद भी मिलते हैं शानदार करियर के मौके
  • अंकुर वारिको ने बताया कर्नल को मिलता है सरकारी बंगला
  • लेफ्टिनेंट की इन-हैंड सैलरी 95 हजार से शुरू होती है

भारतीय सेना में ऑफिसर बनना गौरव की बात है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस सम्मान के साथ मिलने वाली सैलरी और सुविधाएं कितनी शानदार होती हैं? मशहूर डिजिटल क्रिएटर और इन्फ्लुएंसर अंकुर वारिको ने अपने लेटेस्ट वीडियो में भारतीय सेना के ऑफिसर्स की कमाई और उनके करियर ग्राफ का एक विस्तृत ब्यौरा साझा किया है। यह वीडियो उन युवाओं के लिए बेहद प्रेरणादायक है जो देश की सेवा के साथ-साथ एक सुरक्षित भविष्य की तलाश कर रहे हैं। अंकुर वारिको का यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है।

शुरुआती साल: लेफ्टिनेंट से मेजर तक का सफर
अंकुर वारिको बताते हैं कि जब कोई युवा भारतीय सेना में 'लेफ्टिनेंट' के रूप में नियुक्त होता है, तो उसका सफर लेवल 10 के पे-स्केल से शुरू होता है। उनकी बेसिक सैलरी 56,100 रुपये होती है, लेकिन इसमें हाउसिंग, राशन और मेडिकल जैसे भत्तों को जोड़ दिया जाए, तो शुरुआती इन-हैंड सैलरी ही 95,000 से लेकर 1.10 लाख रुपये तक पहुँच जाती है। इसके बाद, सर्विस के तीसरे साल में प्रमोशन पाकर वे 'कैप्टन' बन जाते हैं, जहाँ उनकी सैलरी बढ़कर 1.30 लाख रुपये तक हो जाती है। वहीं सात साल की सर्विस पूरी करने पर 'मेजर' के पद के साथ उनकी मासिक आय 1.45 लाख रुपये तक पहुँच जाती है।

जिम्मेदारी और रुतबा: कर्नल और सुविधाओं का लाभ
अंकुर कहते हैं कि 14 साल की सर्विस के बाद ऑफिसर 'लेफ्टिनेंट कर्नल' बन जाते हैं। इस स्तर पर सैलरी 1.80 लाख से 2.15 लाख रुपये के बीच होती है और वे करीब 800 सैनिकों की बटालियन को लीड करते हैं। 20वें साल तक 'कर्नल' का पद मिलता है, जहाँ वेतन 2.30 लाख रुपये तक होता है। अंकुर ने इस बात पर जोर दिया कि यहाँ मिलने वाली सुविधाएं बेमिसाल हैं। कर्नल को शानदार सरकारी बंगला मिलता है, जिसकी मार्केट वैल्यू लाखों में होती है, लेकिन ऑफिसर के लिए यह फ्री होता है। साथ ही ऑफिशियल कार, सहायक और कैंटीन जैसी अन्य सुविधाएं उनके जीवन को बहुत आसान बना देती हैं।

ब्रिगेडियर का पद और सुरक्षित रिटायरमेंट
जब कोई ऑफिसर अपनी सर्विस के 26वें साल में पहुँचता है, तो वह 'ब्रिगेडियर' बन जाता है। इस समय तक उनकी सैलरी 2.50 लाख रुपये प्रति माह के आसपास होती है। अंकुर वारिको के मुताबिक, रिटायरमेंट के बाद भी सेना के ऑफिसर्स का करियर खत्म नहीं होता। उन्हें पूरी उम्र पेंशन तो मिलती ही है, साथ ही वे डिफेंस पीएसयू या कॉर्पोरेट सेक्टर में सिक्योरिटी हेड जैसे ऊंचे पदों पर भी काम कर सकते हैं। यह जानकारी बताती है कि सेना की नौकरी सिर्फ साहस की ही नहीं, बल्कि एक सुरक्षित जीवनशैली की भी गारंटी है।

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