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K-ब्यूटी का काला सच? 'Medicube' के विज्ञापनों पर लगा बैन, डॉ. जुष्या ने बताया क्या है असली मामला

मशहूर डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. जुष्या ने दक्षिण कोरिया में 'मेडिक्यूब' ब्रांड पर हुई हालिया कार्रवाई का विश्लेषण किया है। वहाँ के रेगुलेटर्स ने कंपनी के 'एक्सोसोम' उत्पादों के विज्ञापनों पर जून 2026 तक रोक लगा दी है। कारण यह है कि कंपनी ने कॉस्मेटिक उत्पादों के लिए 'टिश्यू रिपेयर' और 'बीमारी के इलाज' जैसे झूठे दावे किए थे। डॉ. जुष्या ने स्पष्ट किया कि कॉस्मेटिक्स और दवाओं (जैसे ट्रेटिनॉइन) के बीच एक बड़ी कानूनी और वैज्ञानिक लकीर होती है।

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K-ब्यूटी का काला सच? 'Medicube' के विज्ञापनों पर लगा बैन, डॉ. जुष्या ने बताया क्या है असली मामला

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • बड़ी कार्रवाई: दक्षिण कोरिया ने 'मेडिक्यूब' के भ्रामक विज्ञापनों पर रोक
  • झूठे दावे: कॉस्मेटिक्स को 'फार्मास्युटिकल ग्रेड' बताकर बेचना पड़ा भारी
  • असली अंतर: रेटिनॉल केवल निखार देता है, जबकि ट्रेटिनॉइन एक असली दवा है

आज के समय में कोरियन स्किनकेयर को दुनिया भर में 'गोल्ड स्टैंडर्ड' माना जाता है। लेकिन हाल ही में दक्षिण कोरिया से आई एक खबर ने इस चमक-धमक वाली इंडस्ट्री की नींव हिला दी है। प्रसिद्ध हेल्थ इन्फ्लुएंसर डॉ. जुष्या ने अपने हालिया वीडियो में एक बड़ी खबर साझा की है, जो हर उस व्यक्ति के लिए जरूरी है जो इंटरनेट पर विज्ञापन देखकर स्किनकेयर प्रोडक्ट्स खरीदता है।

1. मेडिक्यूब पर क्यों लगा प्रतिबंध? 
दक्षिण कोरिया के 'खाद्य और औषधि सुरक्षा मंत्रालय' ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए मशहूर ब्रांड 'मेडिक्यूब' को निर्देश दिया है कि वे जून 8, 2026 तक अपने विशिष्ट "एक्सोसोम" उत्पादों का विज्ञापन बंद कर दें।

डॉ. जुष्या बताती हैं कि यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि कंपनी के विज्ञापनों में इस्तेमाल की गई भाषा ग्राहकों को गुमराह कर रही थी। विज्ञापनों में यह आभास दिया जा रहा था कि ये उत्पाद 'फार्मास्युटिकल' या 'मेडिकल ग्रेड' उपचार हैं, जो वास्तव में वे नहीं थे।

2. कॉस्मेटिक बनाम ड्रग: क्या है कानूनी सीमा? 
स्किनकेयर की दुनिया में उत्पादों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है  कॉस्मेटिक्स और ड्रग्स डॉ. जुष्या ने इनके बीच का सूक्ष्म अंतर बहुत सरलता से समझाया है:

  • कॉस्मेटिक्स : इनका काम त्वचा को साफ करना, सुरक्षित रखना और दिखने में सुधार लाना है। ये त्वचा की ऊपरी परतों पर काम करते हैं।

  • ड्रग्स  ये वे उत्पाद हैं जिन्हें बहुत सख्त नियमों के तहत रेगुलेट किया जाता है। ये दावा कर सकते हैं कि वे 'टिश्यू को पुनर्जीवित' करेंगे, 'कोशिकीय क्षति को ठीक' करेंगे या किसी 'बीमारी का इलाज' करेंगे।

मेडिक्यूब की गलती यह थी कि वे एक कॉस्मेटिक उत्पाद बेच रहे थे, लेकिन दावे किसी जीवन रक्षक दवा जैसे कर रहे थे।

3. रेटिनॉल बनाम ट्रेटिनॉइन: एक क्लासिक उदाहरण
डॉ. जुष्या ने इस भ्रम को दूर करने के लिए रेटिनॉल और ट्रेटिनॉइन का उदाहरण दिया।

  • रेटिनॉल (0.1%): यह एक कॉस्मेटिक उत्पाद है। यह त्वचा को बेहतर जरूर बनाता है, लेकिन यह कानूनी रूप से 'स्ट्रक्चरल बदलाव' का दावा नहीं कर सकता।

  • ट्रेटिनॉइन : यह एक 'प्रिस्क्रिप्शन ड्रग' है। यह चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित है कि यह कोलेजन पर सीधे असर डालता है और त्वचा की संरचना  में बदलाव लाता है।
    यही कारण है कि ट्रेटिनॉइन बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिल सकता, जबकि रेटिनॉल कोई भी खरीद सकता है।

4. पैकिंग बनाम विज्ञान: उपभोक्ता क्या सीखें? 
डॉ. जुष्या का यह वीडियो एक चेतावनी की तरह है। वे कहती हैं, "क्वालिफिकेशन पर भरोसा करें, पैकेजिंग पर नहीं।" आज की डिजिटल दुनिया में कंपनियां भारी मार्केटिंग बजट और मशहूर चेहरों के जरिए ऐसे दावे करती हैं जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता। एक जागरूक उपभोक्ता के रूप में हमें यह समझना होगा कि यदि कोई उत्पाद 'रातों-रात चमत्कार' का वादा करता है, तो वह संभवतः सच नहीं है।

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