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F&O ट्रेडिंग में रिटेल निवेशकों को ₹91,685 करोड़ का घाटा: CA रचना रानाडे ने बताए आंकड़े और नया ट्विस्ट
मशहूर फाइनेंस एजुकेटर सीए रचना रानाडे ने F&O ट्रेडिंग के नए आंकड़े पेश किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, FY26 में रिटेल निवेशकों का कुल घाटा घटकर ₹91,685 करोड़ रह गया है, जो पिछले साल ₹1.12 लाख करोड़ था। हालांकि, ट्रेडर्स की संख्या कम होने के बावजूद, प्रति व्यक्ति औसत नुकसान ₹1.14 लाख से बढ़कर ₹1.17 लाख हो गया है। रचना ने बताया कि सेबी के नए नियमों के कारण बाजार में भागीदारी तो कम हुई है, लेकिन व्यक्तिगत जोखिम बढ़ गया है।
FY26 में रिटेल निवेशकों को F&O ट्रेडिंग में ₹91,685 करोड़ का घाटा हुआ
Photo Credit: instagram
- पिछले वर्ष FY25 के तुलनात्मक ₹1.12 लाख करोड़ के मुकाबले कुल घाटा घटा
- F&O में एक्टिव ट्रेडर्स की संख्या 98.1 लाख से घटकर 78.6 लाख रह गई है
- कांट्रैक्ट साइज़ और मार्जिन नियमों को सख्त करने से बाजार पर असर पड़ा
शेयर बाजार की दुनिया बाहर से जितनी रंगीन दिखती है, इसके अंदर के आंकड़े उतने ही चौंकाने वाले हो सकते हैं। हाल ही में जानी-मानी फाइनेंस एक्सपर्ट और इन्फ्लुएंसर सीए रचना रानाडे ने एक वीडियो साझा किया है, जिसमें उन्होंने फ्यूचर एंड ऑप्शंस यानी F&O ट्रेडिंग में होने वाले भारी-भरकम नुकसान के बारे में बात की है। अगर आप भी क्विक प्रॉफिट के चक्कर में ट्रेडिंग करते हैं, तो ये रिपोर्ट आपके होश उड़ा सकती है।
नुकसान के बड़े आंकड़े
रचना रानाडे ने बताया कि वित्त वर्ष 2026 (FY26) में रिटेल निवेशकों को F&O ट्रेडिंग में कुल 91,685 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि पिछले साल यानी FY25 के मुकाबले यह घाटा कम हुआ है। पिछले साल यह आंकड़ा 1.12 लाख करोड़ रुपये था। राज्यसभा में वित्त मंत्रालय द्वारा दिए गए एक जवाब और सेबी के विश्लेषण के आधार पर ये आंकड़े सामने आए हैं।
ट्रेडर्स की घटती संख्या
बाजार में बढ़ते जोखिम को देखते हुए अब लोग थोड़े सतर्क नजर आ रहे हैं। रचना बताती हैं कि इंडिविजुअल ट्रेडर्स की संख्या में भी बड़ी गिरावट आई है। जहाँ पहले 98.1 लाख लोग ट्रेडिंग कर रहे थे, अब यह संख्या घटकर 78.6 लाख रह गई है। सरकार का मानना है कि नवंबर 2024 से लागू किए गए नए नियमों की वजह से रिटेल भागीदारी और कुल घाटे में कमी आई है।
नए नियमों का असर
मार्केट को सुरक्षित बनाने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। इनमें कॉन्ट्रैक्ट साइज को बढ़ाना, वीकली और मंथली इंडेक्स डेरिवेटिव्स को व्यवस्थित करना, ऑप्शन प्रीमियम का पहले कलेक्शन और पोजीशन लिमिट पर कड़ी निगरानी शामिल है। इन सख्त नियमों का मकसद छोटे निवेशकों को बड़े वित्तीय जोखिम से बचाना है।
असली पेंच यहाँ है
लेकिन इस पूरी कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट है। रचना रानाडे ने आगाह किया कि भले ही कुल घाटा कम हुआ है, लेकिन प्रति ट्रेडर होने वाला औसत नुकसान बढ़ गया है। FY25 में एक औसत ट्रेडर 1.14 लाख रुपये गँवा रहा था, जो FY26 में बढ़कर 1.17 लाख रुपये हो गया है। यानी जो लोग अभी भी ट्रेडिंग कर रहे हैं, उनका जोखिम पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। निवेश करने से पहले एक्सपर्ट्स की सलाह और सही जानकारी होना बहुत जरूरी है।
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