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पाचन और गट हेल्थ के लिए अपनाएं कांसा, डॉ. जय मदान ने साझा की खास जानकारी
मशहूर एस्ट्रोलॉजर और लाइफ कोच डॉ. जय मदान ने कांसा के बर्तनों में भोजन करने के चमत्कारी फायदों के बारे में बताया है। उनके अनुसार, कांसा न केवल पाचन तंत्र को मजबूत करता है बल्कि शरीर में सूजन को भी कम करता है। आयुर्वेद में भी कांसा के बर्तनों का विशेष महत्व बताया गया है। डॉ. मदान ने आधुनिक क्रॉकरी छोड़कर पारंपरिक कांसा अपनाने की सलाह दी है ताकि स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।
पाचन और गट हेल्थ के लिए अपनाएं कांसा, डॉ. जय मदान ने साझा की खास जानकारी
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- डॉ. जय मदान ने साझा की खास जानकारी
- पाचन और गट हेल्थ के लिए अपनाएं कांसा
- सेहत का राज
आज की आधुनिक जीवनशैली में हम अक्सर सुंदर दिखने वाली क्रॉकरी और पोर्सिलेन के बर्तनों का उपयोग करते हैं, लेकिन क्या ये हमारी सेहत के लिए वाकई सही हैं? मशहूर लाइफ कोच और एस्ट्रोलॉजर डॉ. जय मदान ने अपने हालिया वीडियो में पारंपरिक कांसा के बर्तनों में भोजन करने के उन फायदों को उजागर किया है, जिन्हें हम अक्सर भूल चुके हैं। डॉ. मदान का कहना है कि सात्विक और जैविक जीवन शैली अपनाने के लिए बर्तनों का चुनाव भी सही होना चाहिए।
पाचन तंत्र के लिए वरदान
डॉ. मदान बताती हैं कि कांसा एक ऐसा मेटल है जो हमारे पाचन में सीधे तौर पर मदद करता है। आयुर्वेद के अनुसार, कांसा के बर्तन में भोजन करने से शरीर के दोषों का संतुलन बना रहता है। यह विशेष रूप से हमारी गट हेल्थ यानी पेट के स्वास्थ्य का ख्याल रखता है। जब आप इस धातु के पात्र में भोजन करते हैं, तो यह मेटाबॉलिज्म को सुधारने में भी सहायक होता है।
सूजन कम करने में मददगार
वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक दोनों ही दृष्टियों से कांसा के बर्तनों में भोजन करना लाभकारी है। डॉ. जय मदान के अनुसार, यह शरीर के भीतर होने वाली इन्फ्लेमेशन या सूजन को कम करने में मदद करता है। आज के समय में जब गलत खान-पान से शरीर में टॉक्सिन्स बढ़ रहे हैं, ऐसे में कांसा एक प्राकृतिक डिटॉक्स की तरह काम करता है।
तांबा से भी बेहतर और टिकाऊ
अक्सर लोग तांबे के फायदों की चर्चा करते हैं, लेकिन डॉ. मदान का कहना है कि कांसा तांबे से भी अधिक मजबूत और टिकाऊ होता है। इसकी फिनिशिंग और बनावट भोजन के अनुभव को और भी खास बना देती है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह भोजन के स्वाद और उसके पोषक तत्वों को बिल्कुल भी प्रभावित नहीं करता, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखता है।
सावधानी भी है जरूरी
वीडियो में डॉ. मदान ने एक जरूरी सलाह भी दी है। उनका कहना है कि कांसा के बर्तनों में बहुत अधिक एसिडिक (खट्टा) खाना लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए और न ही इसमें पकाना चाहिए। तुरंत खट्टा भोजन करना ठीक है, लेकिन इसे स्टोर करने से बचना चाहिए ताकि कोई रासायनिक प्रतिक्रिया न हो।
क्यों बदलें अपनी आदत?
डॉ. जय मदान ने सुझाव दिया है कि हमें अपनी आधुनिक क्रॉकरी की जगह फिर से कांसा के बर्तनों को देनी चाहिए। यह न केवल हमारी समृद्ध परंपराओं से जुड़ाव है, बल्कि हमारे और हमारे परिवार के बेहतर स्वास्थ्य के लिए एक छोटा लेकिन क्रांतिकारी कदम है। उनके इस वीडियो को सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है और लोग अपनी पुरानी विरासत की ओर लौटने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
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