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महाशिवरात्रि 2026: 'प्रहर पूजा' से पाएं महादेव की कृपा; साई प्रवीण ने बताए शुभ समय और विधि

महाशिवरात्रि का पर्व, जो इस साल 15 फरवरी 2026 को पड़ रहा है, आध्यात्मिक उन्नति और आंतरिक परिवर्तन के लिए साल की सबसे शक्तिशाली रात मानी जाती है। एस्ट्रो इन्फ्लुएंसर साई प्रवीण के अनुसार, इस रात को चार प्रहरों में विभाजित किया गया है, जहाँ हर प्रहर की अपनी विशिष्ट ऊर्जा होती है। इन चरणों के साथ साधना करने से आप 'शिव तत्व' से जुड़ सकते हैं।

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महाशिवरात्रि 2026: चार प्रहर पूजा का शुभ समय, अभिषेक विधि और विशेष उपाय

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • महाशिवरात्रि पर कैसे करें महादेव का अभिषेक
  • 15 फरवरी को चार प्रहर की पूजा से पाएं शिव कृपा
  • साई प्रवीण से जानें चारों प्रहर का शुभ समय और विधि

महाशिवरात्रि आध्यात्मिक उन्नति और आंतरिक परिवर्तन के लिए साल की सबसे शक्तिशाली रात मानी जाती है। एस्ट्रो इन्फ्लुएंसर साई प्रवीण के अनुसार, इस रात को चार प्रहरों में विभाजित किया गया है, जहाँ हर प्रहर की अपनी विशिष्ट ऊर्जा होती है। इन चरणों के साथ साधना करने से आप 'शिव तत्व' से जुड़ सकते हैं।

चार प्रहर और उनका पवित्र अभिषेक

1. प्रथम प्रहर: शाम 06:23 से रात 09:32 तक
इस चरण की शुरुआत जल से अभिषेक के साथ होती है, जो शरीर, मन और सूक्ष्म ऊर्जाओं की शुद्धि का प्रतीक है। साई प्रवीण बताते हैं कि यह समय बेचैनी को त्यागने और स्पष्टता के साथ इस पवित्र रात में प्रवेश करने के लिए आदर्श है।

2. द्वितीय प्रहर : रात 09:32 से 12:41 (16 फरवरी) तक
इस दौरान दही से अभिषेक किया जाता है, जो स्थिरता और पोषण देने वाली ऊर्जा का प्रतीक है। इस प्रहर की पूजा भावनात्मक स्थिरता को मजबूत करती है, जिससे साधक को रात भर एकाग्र बने रहने में मदद मिलती है।

3. तृतीय प्रहर: रात 12:41 से सुबह 03:50 (16 फरवरी) तक
यह प्रहर तपस्वी शक्ति का केंद्र है। यहाँ घी से अभिषेक किया जाता है, जो चमक, साहस और आध्यात्मिक सहनशक्ति को जागृत करता है। साई प्रवीण के अनुसार, यह प्रहर साधक की 'आंतरिक अग्नि' को प्रज्वलित कर ध्यान को गहराई प्रदान करता है।

4. चतुर्थ प्रहर: सुबह 03:50 से 06:59 (16 फरवरी) तक
रात का समापन शहद (Honey) के अभिषेक से होता है, जो साधना में सामंजस्य और मधुरता लाता है। यह अंतिम चरण रात की सभी ऊर्जाओं को एकीकृत करता है और साधक को आंतरिक संतुष्टि प्रदान करता है।

सबसे शक्तिशाली समय

समय: रात 12:16 से 01:06 

यह महाशिवरात्रि का सबसे मुख्य और शुभ समय है। यहाँ भक्त पंचामृत से अभिषेक करते हैं। साई प्रवीण जोर देते हैं कि यदि आप चारों प्रहर की पूजा न कर सकें, तो भी 'निशिता काल' की पूजा बिल्कुल न छोड़ें, क्योंकि यह शिव की परम शांति और साधक के मिलन का क्षण है।

पूजा के बाद क्या करें?
प्रहर पूजा के समापन पर प्रार्थना, आभार व्यक्त करें और भजन गाएं। व्रत का पारण सात्विक भोजन के साथ करें और यदि संभव हो तो अपनी परंपरा के अनुसार 'अन्नदान' करें।

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