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सद्गुरु ने लॉन्च की ‘डिसअपियरिंग फेसेस’, हिमालय के अनदेखे चेहरों को किया कैमरे में कैद

सद्गुरु ने अपनी नई फोटो-बुक ‘डिसअपियरिंग फेसेस’ लॉन्च की है। किताब में नेपाल और तिब्बत के दूर-दराज़ हिमालयी इलाकों में मिले लोगों की तस्वीरें शामिल हैं, जो प्रकृति के करीब रहने वाले जीवन की झलक दिखाती हैं।

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सद्गुरु की नई किताब ‘डिसअपियरिंग फेसेस’ में हिमालय के दूर-दराज़ इलाकों में मिले लोगों और समुदायों की तस्वीरें शामिल हैं।

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • सद्गुरु ने लॉन्च की नई फोटो-बुक ‘डिसअपियरिंग फेसेस’
  • नेपाल और तिब्बत के हिमालयी इलाकों के लोगों की तस्वीरें शामिल
  • 2006 से हिमालय की यात्राओं से जुड़ा है सद्गुरु का खास रिश्ता

सद्गुरु ने अपनी नई फ़ोटोग्राफ़ी-बुक ‘डिसअपियरिंग फेसेस' लॉन्च की है। यह किताब हिमालय के दूर-दराज़ इलाकों में रहने वाले लोगों और समुदायों की तस्वीरों का खास संग्रह है। इन तस्वीरों को सद्गुरु ने हिमालय की अपनी दशकों पुरानी यात्राओं के दौरान कैमरे में कैद किया। ‘डिसअपियरिंग फेसेस' को सोमवार को नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में लॉन्च किया गया। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया भी मौजूद रहे। किताब के लॉन्च के बाद सद्गुरु और लेखक व कमेंटेटर आनंद रंगनाथन के बीच बातचीत हुई, जिसमें तस्वीरों के पीछे छिपी कहानियों और सद्गुरु के अनुभवों पर चर्चा की गई।

हिमालय के दूर-दराज इलाकों के लोगों की तस्वीरें

पेंगुइन इंडिया द्वारा प्रकाशित इस किताब में नेपाल और तिब्बत के दूर-दराज़ हिमालयी इलाकों में मिले लोगों की तस्वीरें शामिल हैं। सद्गुरु ने अपनी यात्राओं के दौरान कैमरा अपने साथ रखा और उन लोगों के चेहरों को तस्वीरों में कैद करना शुरू किया, जिनकी जिंदगी प्रकृति के बेहद करीब है और जो आधुनिक जीवन की भागदौड़ से काफी दूर हैं।

‘ये चेहरे एक ऐसे दौर की झलक दिखाते हैं जो जल्द गायब हो जाएगा'

किताब के बारे में बात करते हुए सद्गुरु ने कहा कि इन तस्वीरों में ऐसे चेहरों की झलक मिलती है, जो एक ऐसे दौर को दिखाते हैं जो आने वाले समय में शायद गायब हो जाएगा। उनके मुताबिक इन चेहरों पर प्रकृति के अलग-अलग मौसम और परिस्थितियों का असर साफ दिखाई देता है।
 

उन्होंने कहा कि ये चेहरे एक ऐसे सादे जीवन को दिखाते हैं, जो देखने में भले ही साधारण लगे, लेकिन जमीन, हवा, पानी और लोगों के गहरे अनुभवों से समृद्ध है। सद्गुरु ने यह भी बताया कि पिछले पांच दशकों में हिमालय की खूबसूरती और वहां के लोगों ने उन्हें लगातार इन पहाड़ों की गहरी घाटियों और वादियों की ओर खींचा है।

2006 से हिमालय से जुड़ा है सद्गुरु का रिश्ता

सद्गुरु ने पहली बार 2006 में मानसरोवर और माउंट कैलाश की यात्रा की थी। इसके बाद से वह लगातार हिमालय की यात्रा करते रहे हैं और वहां तीर्थयात्रा पर जाने वाले साधकों का मार्गदर्शन भी करते रहे हैं।

2025 में कैलाश की अपनी पहली मोटरसाइकिल यात्रा के बाद सद्गुरु इस साल एक बार फिर मोटरसाइकिल से वहां लौटने वाले हैं। इस तरह हिमालय की पवित्र धरती के साथ उनका रिश्ता लगातार बना हुआ है।

किताब में दर्ज हैं बदलती दुनिया के अनमोल चेहरे

‘डिसअपियरिंग फेसेस' सिर्फ तस्वीरों का संग्रह नहीं, बल्कि हिमालय में तेजी से बदलती जीवनशैली और वहां के लोगों की झलक भी पेश करती है। किताब उन चेहरों और जीवन के अनुभवों को सामने लाती है, जो आधुनिक दुनिया की तेज रफ्तार से काफी अलग हैं।

सद्गुरु लंबे समय से हिमालय को अपने जीवन का अहम हिस्सा मानते रहे हैं और लोगों की खुशहाली, मानव चेतना को बढ़ाने और पर्यावरण को फिर से बेहतर बनाने से जुड़े कामों में भी सक्रिय रहे हैं।

कहां मिलेगी ‘डिसअपियरिंग फेसेस'?

‘डिसअपियरिंग फेसेस' हार्डबैक और पेपरबैक, दोनों फॉर्मेट में उपलब्ध है। किताब को Amazon, Crossword, SapnaOnline और Atlantic पर खरीदा जा सकता है।

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