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कल की चिंता या आज की योजना? सद्गुरु ने बताया क्यों हम उस भविष्य से डरते हैं जो आया ही नहीं

आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु के अनुसार, भविष्य की योजना बनाना एक तार्किक और आवश्यक प्रक्रिया है, लेकिन उस भविष्य के लिए आज चिंता करना जो अभी घटित ही नहीं हुआ, केवल एक मानसिक प्रताड़ना है। हम अक्सर अपनी यादों या कल्पनाओं के कारण दुखी होते हैं। सच्ची बुद्धिमानी इसमें है कि हम कल की तैयारी तो पूरी गंभीरता से करें, लेकिन उस 'अज्ञात कल' के डर को अपने आज की शांति भंग न करने दें।

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कल की चिंता या आज की योजना? सद्गुरु ने बताया क्यों हम उस भविष्य से डरते हैं जो आया ही नहीं

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • बुद्धि का उपयोग: भविष्य की योजना बनाना एक रचनात्मक और जरूरी कदम है
  • कल्पना की पीड़ा: जो अभी हुआ ही नहीं, उसके लिए दुखी होना मानसिक भ्रम है
  • वर्तमान में जिएं: भविष्य के डर से मुक्त होकर ही हम आज बेहतर काम कर सकते

आज के इस प्रतिस्पर्धी युग में, 'चिंता' और 'ओवरथिंकिंग'  हमारी जीवनशैली का हिस्सा बन गए हैं। हम हर पल आने वाले कल को लेकर डरे रहते हैं। इसी गंभीर विषय पर प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु ने एक बहुत ही सरल लेकिन क्रांतिकारी विचार साझा किया है। उनका संदेश है: "भविष्य की योजना बनाना एक बात है लेकिन उस भविष्य के लिए पीड़ा सहना जो अभी आया ही नहीं, दूसरी बात है।"

1. योजना और चिंता का मौलिक अंतर 
सद्गुरु समझाते हैं कि भविष्य के लिए तैयारी करना एक बौद्धिक कार्य है। जैसे अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे बचाना, करियर का रास्ता चुनना या घर बनाने की योजना बनाना। यह सकारात्मक है क्योंकि इसमें 'क्रिया' शामिल है।

लेकिन 'चिंता' करना भावनात्मक है। जब हम यह सोचने लगते हैं कि "क्या होगा अगर मेरी नौकरी चली गई?" या "अगर मैं असफल हो गया तो क्या होगा?", तो हम उस स्थिति को जी रहे होते हैं जो अभी है ही नहीं। योजना बनाना आपको मजबूत बनाता है, जबकि चिंता करना आपकी ऊर्जा सोख लेता है।

2. हम अपनी कल्पनाओं के शिकार हैं 
सद्गुरु एक बहुत ही गहरा सत्य बताते हैं "मनुष्य दुनिया की समस्याओं से उतना दुखी नहीं है, जितना वह अपनी यादों और कल्पनाओं से दुखी है।"
हमारी अधिकांश पीड़ा  काल्पनिक होती है। हम उन दृश्यों के लिए रोते हैं जो केवल हमारे दिमाग में चल रहे हैं। जो भविष्य अभी पैदा ही नहीं हुआ, उसकी पीड़ा आज सहना बुद्धिमानी नहीं, बल्कि एक मानसिक विकार है। जब आप अपनी कल्पना को अपनी हकीकत बना लेते हैं, तो आप वर्तमान के आनंद को पूरी तरह खो देते हैं।

3. वर्तमान की शक्ति 
लेख का सार यह है कि जीवन केवल 'अभी'  में मौजूद है। भविष्य केवल एक संभावना है। यदि आप आज पूरी जागरूकता और आनंद के साथ काम करते हैं, तो आपका भविष्य अपने आप संवर जाएगा। सद्गुरु सलाह देते हैं कि भविष्य को एक 'प्रोजेक्ट' की तरह देखें जिसे सुलझाना है, न कि एक 'राक्षस' की तरह जिससे डरना है। जब आप डर से मुक्त होकर योजना बनाते हैं, तो आपकी बुद्धिमानी और कार्यक्षमता  कई गुना बढ़ जाती है।

4. युवाओं के लिए एक नई दृष्टि
आज के छात्र और युवा पेशेवर अक्सर भविष्य के दबाव में अपनी मानसिक शांति खो देते हैं। सद्गुरु का यह संदेश उन्हें याद दिलाता है कि सफलता के लिए 'टेंशन' की नहीं, बल्कि 'अटेंशन' की जरूरत है।

  • योजना बनाएं: अपने लक्ष्यों को कागज पर लिखें और उन पर काम करें।

  • पीड़ा का त्याग करें: यह स्वीकार करें कि आप हर चीज़ को कंट्रोल नहीं कर सकते।

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    सजग रहें: अपने विचारों को अपनी पीड़ा का जरिया न बनने दें

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