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तालिबान शासित अफगानिस्तान की यात्रा पर निकलीं भारतीय इन्फ्लुएंसर शरण्या अय्यर; सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
भारतीय ट्रैवल इन्फ्लुएंसर और फिल्ममेकर शरण्या अय्यर (TrulyNomadly) का तालिबान शासित अफगानिस्तान यात्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। नवंबर 2025 में नई दिल्ली से काबुल उड़ान भरने वाली शरण्या ने वहां करीब दो हफ्ते बिताए। उन्होंने बामियान घाटी, पंजशीर और कंधार जैसे दुर्गम इलाकों की यात्रा कर वहां के नागरिकों की वास्तविक जमीनी स्थिति और मानवीय पहलू को दुनिया के सामने रखा है।
इंस्टाग्राम पर उनके 5 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं, जहां वे ब्लॉग्स पोस्ट करती हैं
Photo Credit: instagram
- उन्होंने कहा कि देश की खराब सरकार के लिए वहां के नागरिकों को सजा न दें
- उनकी इस 12-13 दिनों की अफ़ग़ानिस्तान यात्रा का कुल खर्च करीब ₹2.1 लाख आया
- शरण्या अय्यर ने साल 2019 में कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ फुल-टाइम ट्रैवल शुरू
अफ़ग़ानिस्तान की यात्रा और मुख्य आकर्षण
शरण्या अय्यर ने नवंबर 2025 में नई दिल्ली से सीधे काबुल के लिए उड़ान भरी थी। अपनी इस 12 से 13 दिनों की यात्रा के दौरान उन्होंने कुल ₹2.1 लाख खर्च किए, जिसमें उड़ानें, आवास, भोजन और सुरक्षा परमिट शामिल थे। उन्होंने अपनी यात्रा में काबुल के अलावा हिंदूकुश पहाड़ियों में स्थित बामियान घाटी का रुख किया, जहां वर्ष 2001 में तालिबान द्वारा नष्ट की गई दुनिया की सबसे ऊंची बुद्ध मूर्तियों के खाली अवशेष मौजूद हैं। इसके साथ ही उन्होंने पंजशीर घाटी, गज़नी और तालिबान का गढ़ माने जाने वाले कंधार का भी दौरा किया। चूंकि विदेशी पर्यटकों के लिए वहां कड़े नियम हैं, इसलिए सुरक्षा चौकियों को पार करने के लिए उन्होंने एक निजी स्थानीय गाइड और ड्राइवर की मदद ली।
"यह महिलाओं के लिए देश नहीं है"
शरण्या ने अपनी यात्रा को किसी भी तरह से रोमानी या बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की कोशिश नहीं की है। उन्होंने वहां की जमीनी सच्चाई को बेहद ईमानदारी से रखा। उन्होंने खुलकर स्वीकार किया कि मीडिया में अफ़ग़ान महिलाओं के मानवाधिकारों और उनकी आजादी पर लगे प्रतिबंधों को लेकर दिखाई जाने वाली खबरें पूरी तरह सच हैं। वहां कक्षा छह से आगे लड़कियों की शिक्षा और महिलाओं की उच्च शिक्षा व नौकरियों पर कड़ा प्रतिबंध है। वे बिना किसी पुरुष रिश्तेदार के बाहर नहीं निकल सकतीं। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान कई स्थानीय पिताओं ने उनसे अपनी बेटियों के भविष्य के लिए भारत का वीजा दिलाने या बाहर निकलने में मदद करने की गुहार भी लगाई।
बहिष्कार के खिलाफ उठाई आवाज
इस गंभीर संकट को करीब से देखने के बावजूद शरण्या अफ़ग़ानिस्तान का पूरी तरह से आर्थिक या सामाजिक बहिष्कार करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने अपने वीडियो के कैप्शन में एक बेहद विचारणीय प्रश्न उठाया—"अगर किसी देश की सरकार बुनियादी रूप से खराब है, तो क्या वहां के आम नागरिकों को पूरी दुनिया द्वारा भूखा मरने के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए?" उन्होंने कहा कि जब हम अन्य देशों की यात्रा करते हैं, तो वहां की सरकार और वहां के आम नागरिकों की संस्कृति व भोजन को अलग करके देखते हैं, तो अफ़ग़ानिस्तान के साथ ऐसा दोहरा रवैया क्यों? उनके अनुसार, जिम्मेदार पर्यटन के जरिए वहां के गाइड, हस्तशिल्प कलाकारों और ड्राइवरों को एक आर्थिक संबल मिलता है, जो मौजूदा हुकूमत से कोसों दूर हैं। हालांकि, उन्होंने अन्य नए यात्रियों को आगाह किया है कि अफ़ग़ानिस्तान कोई सामान्य वेकेशन स्पॉट नहीं है और यहां जाने के लिए अत्यधिक यात्रा अनुभव और जोखिम उठाने की क्षमता होनी जरूरी है।
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