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वॉटरफॉल्स और संगीत से सजे कैफे; नॉर्थ-ईस्ट यात्रा का शिलॉन्ग डायरी

ओरिफ्लेम द्वारा प्रस्तुत 'नॉर्थ-ईस्ट इन्फ्लुएंसर यात्रा' मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग पहुँची। जयवीर सिंह ने बताया कि कैसे इस शहर ने 24 घंटों में ही उन्हें अपना बना लिया। उमियम झील की धुंधभरी सुबह, एलिफेंट फॉल्स की शांति और लैटुमखराह के संगीत से भरे कैफे इस यात्रा के मुख्य आकर्षण रहे। पुलिस बाज़ार की हलचल और पहाड़ों की ताज़ा हवा के बीच शिलॉन्ग केवल एक गंतव्य नहीं, बल्कि एक गहरा अनुभव बन गया।

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एलिफेंट फॉल्स की गर्जना और शिलॉन्ग पीक से बादलों का अद्भुत नज़ारा

ख़ास बातें
  • एलिफेंट फॉल्स की गर्जना और शिलॉन्ग पीक से बादलों का अद्भुत नज़ारा
  • पुलिस बाज़ार की रौनक में दिखी शहर की असली रूह
  • उमियम झील की शांति

मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग, जिसे अपनी वास्तुकला और आब-ओ-हवा के कारण 'पूर्व का स्कॉटलैंड' कहा जाता है, इन दिनों 'Whosthat360 नॉर्थ-ईस्ट इन्फ्लुएंसर यात्रा' का गवाह बन रहा है। 'ओरिफ्लेम' द्वारा प्रस्तुत इस यात्रा के दौरान Whosthat360 के कंटेंट हेड जयवीर सिंह ने शिलॉन्ग में बिताए गए 24 यादगार घंटों का ब्योरा साझा किया है। धुंधभरी झीलें, गर्जना करते झरने और संगीत से सजे कैफे- यहाँ का हर पल किसी कविता जैसा है।

धुंध और परिंदों की चहचहाहट के साथ सुबह

शिलॉन्ग की सुबह बेहद शांत और रूमानी होती है। जयवीर के अनुसार, दिन की शुरुआत उमियम झील के किनारे हुई, जहाँ पानी आकाश को एक दर्पण की तरह प्रतिबिंबित करता है। झील के किनारे बैठकर गरमागरम चाय की चुस्कियाँ लेना और पहाड़ों की ताज़ा हवा को महसूस करना आपको दुनिया की भागदौड़ और डेडलाइन्स से दूर ले जाता है। यहाँ की शांति आपको धीमे चलने और उस पल को जीने के लिए प्रेरित करती है।

झरनों का शोर और पहाड़ों की ऊँचाई

देर सुबह तक टीम एलिफेंट फॉल्स पहुँची। यहाँ चट्टानों से टकराकर गिरते पानी की आवाज़ शांति को भंग नहीं करती, बल्कि उसे और भी ध्यानपूर्ण  बना देती है। इसके बाद, शिलॉन्ग पीक से शहर का 360-डिग्री नज़ारा देखने को मिला, जहाँ बादल आँखों के ठीक सामने तैरते हुए महसूस होते हैं। यहाँ पहुँचकर शिलॉन्ग सिर्फ एक डेस्टिनेशन नहीं, बल्कि एक अहसास बन जाता है।

कैफे कल्चर और स्थानीय रंग

शिलॉन्ग का असली दिल उसके कैफे में बसता है। दोपहर के समय जयवीर ने लैटुमखराह की गलियों में स्थित छोटे और आकर्षक कैफे एक्सप्लोर किए। 'ML 05 कैफे' जैसे स्थानों पर सॉफ्ट रॉक म्यूजिक, ताज़ा कॉफी और स्थानीय लोगों की रचनात्मकता शिलॉन्ग के मॉडर्न और कल्चर को दर्शाती है।

शाम होते-होते पुलिस बाज़ार की रौनक और बढ़ गई। स्ट्रीट शॉप्स, म्यूज़िक स्टोर्स और लोगों की चहल-पहल के बीच शिलॉन्ग की एक अलग ही लय दिखाई देती है। रात के समय शहर किसी पुराने दोस्त की तरह महसूस होता है।

क्यों खास है यह अनुभव?

जयवीर सिंह का कहना है कि शिलॉन्ग को सिर्फ देखा नहीं जाता, बल्कि इसे महसूस किया जाता है। 24 घंटों का यह सफर यह साबित करता है कि मेघालय की यह राजधानी अपने भीतर संस्कृति, सादगी और प्रकृति का अनमोल खजाना समेटे हुए है। यहाँ से जाते समय आप सिर्फ तस्वीरें नहीं, बल्कि एक ऐसी याद लेकर लौटते हैं जो लंबे समय तक आपके साथ रहती है।

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