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परिस्थितियों पर नहीं, प्रतिक्रिया पर रखें काबू: गौरांग दास का जीवन मंत्र

गौरांग दास के अनुसार, जीवन में हमारे साथ क्या घटित होता है, उस पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है। लेकिन, हम उन घटनाओं के प्रति कैसी प्रतिक्रिया देते हैं, यह पूरी तरह हमारे हाथ में है। जब हम बाहरी परिस्थितियों को बदलने की कोशिश छोड़ देते हैं और अपने आंतरिक विचारों व प्रतिक्रियाओं को सुधारने पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तभी हमें वास्तविक मानसिक शांति और जीवन में सफलता प्राप्त होती है।

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मानसिक शांति: बुद्धिमानी समस्याओं को खत्म करने में नहीं, उन्हें झेलने में है

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • मानसिक शांति: बुद्धिमानी समस्याओं को खत्म करने में नहीं, उन्हें झेलने में
  • प्रतिक्रिया की शक्ति
  • बाहरी स्थिति: हम दुनिया की घटनाओं को नहीं बदल सकते, पर मन को बदल सकते हैं

हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहाँ सब कुछ अनिश्चित है। कभी मौसम बदल जाता है, कभी ऑफिस में काम का बोझ बढ़ जाता है, तो कभी कोई अजनबी हमारे साथ बुरा व्यवहार कर देता है। अधिकांश लोग अपना पूरा जीवन इन 'बाहरी' चीजों को ठीक करने और उन्हें नियंत्रित करने में लगा देते हैं। इसी संदर्भ में, IIT-एलुमनी और प्रसिद्ध इस्कॉन संन्यासी गौरांग दास का 'इंडिया टुडे' के साथ साझा किया गया विचार हमें जीवन जीने का एक नया दृष्टिकोण देता है: "आप यह नियंत्रित नहीं कर सकते कि आपके साथ क्या होता है, लेकिन आप यह नियंत्रित कर सकते हैं कि आप उसके प्रति कैसी प्रतिक्रिया देते हैं।"

नियंत्रण का भ्रम 

गौरांग दास समझाते हैं कि हमारी अधिकांश मानसिक पीड़ा का कारण यह है कि हम उन चीजों को बदलने की कोशिश करते हैं जो हमारे वश में नहीं हैं। हम चाहते हैं कि लोग हमारे हिसाब से चलें, ट्रैफिक न मिले, या बीमारियाँ न हों। जब ऐसा नहीं होता, तो हम दुखी और तनावग्रस्त हो जाते हैं। यह 'नियंत्रण का भ्रम' हमें थका देता है। सचाई यह है कि जीवन का केवल 10% हिस्सा वह है जो हमारे साथ होता है, बाकी 90% इस बात पर निर्भर करता है कि हम उस पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं।

प्रतिक्रिया की शक्ति 

एक बुद्धिमान व्यक्ति वह है जो यह समझता है कि परिस्थिति और प्रतिक्रिया के बीच एक 'खाली स्थान' होता है। उस स्थान में हमारी सबसे बड़ी शक्ति छिपी होती है 'चुनाव करने की शक्ति'। उदाहरण के लिए, यदि कोई आप पर चिल्लाता है, तो आप भी उस पर चिल्लाकर स्थिति को बिगाड़ सकते हैं, या फिर शांत रहकर अपनी गरिमा बनाए रख सकते हैं। आपका 'रिएक्शन' ही यह तय करता है कि अगली सुबह आप प्रसन्न रहेंगे या ग्लानि में।

आंतरिक इंजीनियरिंग 

गौरांग दास का संदेश हमें 'आंतरिक रूप से मजबूत' बनने की प्रेरणा देता है। जब हम अपनी प्रतिक्रियाओं पर काम करना शुरू करते हैं, तो हम बाहरी दुनिया के गुलाम नहीं रह जाते। हम यह सीखना शुरू कर देते हैं कि किसी भी तूफान के बीच खुद को शांत कैसे रखा जाए। यह आत्म-संयम ही सच्ची स्वतंत्रता है।

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