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बैंकों की मनमानी पर RBI का कड़ा प्रहार; सीए साक्षी जैन ने बताया ग्राहकों के लिए क्यों जरूरी है ये खबर
भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों में मिस-सेलिंग और दबावपूर्ण बिक्री रोकने के लिए कड़े नियम प्रस्तावित किए हैं। साक्षी जैन के अनुसार, अब बैंकों को उत्पादों में पूर्ण पारदर्शिता बरतनी होगी। यदि कोई बैंक गलत तरीके से उत्पाद बेचता है, तो उसे ग्राहक को मुआवजा देना होगा। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों के हितों की रक्षा करना और बैंकिंग प्रणाली में जवाबदेही तय करना है।
बैंकों की मनमानी पर RBI का कड़ा प्रहार; साक्षी जैन ने समझाए ग्राहकों के नए अधिकार
Photo Credit: Instagram
- साक्षी जैन ने बताया कैसे सुरक्षित होगी आपकी कमाई
- बैंकों की मनमानी पर RBI का कड़ा प्रहार
- साक्षी जैन ने समझाए ग्राहकों के नए अधिकार
अक्सर आप बैंक किसी एक काम के लिए जाते हैं, लेकिन बाहर निकलते समय आपके हाथ में कई ऐसे प्रोडक्ट्स बीमा, क्रेडिट कार्ड, म्यूचुअल फंड थमा दिए जाते हैं जिनकी आपको जरूरत ही नहीं थी। फाइनेंस इन्फ्लुएंसर साक्षी जैन ने साझा किया है कि भारतीय रिजर्व बैंक RBI के नए ड्राफ्ट नियम अब ग्राहकों को इस 'मिस-सेलिंग' से बचाने के लिए ढाल का काम करेंगे।
पारदर्शिता अब अनिवार्य
सालों से बैंक ग्राहकों को गुमराह करके या दबाव बनाकर ऐसे प्रोडक्ट्स बेचते आए हैं जिन्हें वे पूरी तरह समझते भी नहीं थे। RBI के नए प्रस्तावों के अनुसार, अब हर प्रोडक्ट के लिए ग्राहक की स्पष्ट और सूचित सहमति लेना अनिवार्य होगा।
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अब 'सिंगल क्लिक' में कई प्रोडक्ट्स को एक साथ नहीं बेचा जा सकेगा।
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हर प्रोडक्ट के बारे में अलग से, साफ-साफ और ईमानदारी से बताना होगा।
'मिस-सेलिंग' का दायरा बढ़ा: क्या-क्या है शामिल?
साक्षी जैन के अनुसार, अब RBI ने 'मिस-सेलिंग' की परिभाषा को और कड़ा कर दिया है। इसमें शामिल हैं:
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आपकी आय, उम्र या जोखिम प्रोफाइल के हिसाब से गलत प्रोडक्ट बेचना।
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भ्रामक जानकारी देना या छिपी हुई फीस वसूलना।
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बिना विकल्प दिए प्रोडक्ट्स को एक साथ बंडल करके बेचना।
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डिजिटल एप्स पर चालाकी भरे डिजाइन्स का उपयोग करना।
नियमों के उल्लंघन पर बैंक को न केवल पूरा पैसा वापस करना होगा, बल्कि ग्राहक के नुकसान की भरपाई भी करनी पड़ सकती है।
टारगेट के नाम पर दबाव खत्म
ड्राफ्ट नियमों में बैंक के अंदर बढ़ती सेल्स कल्चर पर भी चोट की गई है।
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बैंक अब अपने कर्मचारियों को ऐसे इंसेंटिव नहीं दे पाएंगे जो उन्हें किसी भी कीमत पर थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट बेचने के लिए उकसाते हों।
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अब सेल्स टारगेट से ज्यादा ग्राहक की जरूरत पर ध्यान देना होगा।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी नज़र
बैंक के ऐप्स और वेबसाइट्स पर अब ये चालाकियाँ नहीं चलेंगी:
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पहले से टिक किए हुए सहमति बॉक्स।
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झूठी जल्दबाजी दिखाने वाले अर्जेंसी टाइमर।
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जटिल कैंसिलेशन प्रक्रिया।
साक्षी जैन इसे आसान शब्दों में समझाती हैं
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आपको हर चार्ज की स्पष्ट जानकारी मिलेगी।
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आपके पास 'ना' कहने का असली विकल्प होगा।
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प्रेशर सेलिंग के खिलाफ सुरक्षा मिलेगी।
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गलत तरीके से बेचे गए प्रोडक्ट पर रिफंड मिलेगा।
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