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सफलता की असली माप पैसा नहीं, समय और आदतें हैं: अंकुर वारिकू ने समझाया कामयाबी का नया फॉर्मूला

मशहूर क्रिएटर अंकुर वारिकू ने सफलता को मापने का एक अनोखा तरीका बताया है। उन्होंने गूगल मैप्स का उदाहरण देते हुए कहा कि कामयाबी को दूरी (जैसे पैसा या गाड़ी) के बजाय समय और निरंतरता से मापना चाहिए। उनके अनुसार, 365 दिनों तक लगातार मेहनत करना और अच्छी आदतें बनाना ही सफलता का असली राज है। आदतों की ताकत बड़े लक्ष्यों को भी छोटा बना देती है और मंजिल आसान हो जाती है।

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अंकुर वारिकू ने सफलता को रुपयों के बजाय समय और आदतों से मापने की सलाह दी

Photo Credit: instagram

ख़ास बातें
  • गूगल मैप्स की तरह मंजिल की दूरी नहीं, बल्कि समय का गणित समझना जरूरी है
  • सफलता 1 करोड़ दूर नहीं, बल्कि 365 दिन लगातार सही काम करने जितनी दूर है
  • प्रतिदिन के छोटे-छोटे प्रयास और अच्छी आदतें बड़े लक्ष्यों को मात देती हैं

क्या आप भी अपनी सफलता को रुपयों या बड़ी गाड़ियों से मापते हैं? अगर हाँ, तो शायद आप गलत दिशा में जा रहे हैं। डिजिटल क्रिएटर और मशहूर एंटरप्रेन्योर अंकुर वारिकू ने हाल ही में एक ऐसा वीडियो साझा किया है जो कामयाबी को देखने का आपका नजरिया हमेशा के लिए बदल देगा। उन्होंने बहुत ही सरल शब्दों में समझाया है कि हम अक्सर अपनी मंजिल की दूरी तो देखते हैं, लेकिन वहां तक पहुँचने के समय और प्रयास को भूल जाते हैं।

 कामयाबी का नया नक्शा

अंकुर वारिकू अपनी बात एक बहुत ही साधारण लेकिन दिलचस्प सवाल से शुरू करते हैं। वह पूछते हैं, "5 किलोमीटर लंबा है या 40 मिनट?" सुनने में यह सवाल थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन इसके पीछे एक बहुत ही गहरा मतलब छिपा है। हम अक्सर गूगल मैप्स का इस्तेमाल करते समय दूरी से ज्यादा इस बात की चिंता करते हैं कि हमें वहां पहुँचने में कितना समय लगेगा। अंकुर कहते हैं कि जिंदगी में भी हमें यही नजरिया अपनाना चाहिए।

दूरी या समय?

अंकुर बताते हैं कि अक्सर हम अपनी कामयाबी को 'डिस्टेंस' यानी दूरी में मापते हैं। हम कहते हैं कि मेरी सफलता 1 करोड़ रुपये दूर है, या एक शानदार गाड़ी दूर है, या फिर एक प्रमोशन दूर है। लेकिन अंकुर के अनुसार, यह सिर्फ एक फासला है, यह यह नहीं बताता कि वहां तक पहुँचने में कितना वक्त और मेहनत लगेगी। असली सवाल यह नहीं है कि आपकी मंजिल कितनी दूर है, बल्कि यह है कि वहां तक पहुँचने में आपको कितना समय लगेगा।

गूगल मैप्स का फॉर्मूला

अंकुर एक बहुत ही बेहतरीन तकनीक साझा करते हैं। वह कहते हैं कि हमें गूगल मैप्स की तरह अपने समय को मापना शुरू करना चाहिए। जैसे कि, "मैं हर रोज एक ईमेल भेजूंगा, मैं हर दिन वर्कआउट करूंगा, मैं रोज कुछ नया सीखूंगा या किताब के कुछ पन्ने पढ़ूंगा।" यह छोटे-छोटे कदम ही तय करते हैं कि आप अपनी मंजिल के कितने करीब हैं।

आदतों की ताकत

अंकुर वारिकू का मानना है कि सफलता शायद 1 करोड़ रुपये दूर नहीं है, बल्कि वह सिर्फ 365 दिनों तक लगातार काम करने जितनी दूर है। वह कहते हैं कि अच्छी आदतें हर रोज बड़े-बड़े लक्ष्यों और टारगेट को मात दे देती हैं। अगर आप अपनी आदतों को सुधार लेते हैं, तो कामयाबी खुद-ब-खुद आपके कदम चूमेगी। तो क्या आप तैयार हैं अपनी आदतों के साथ सफलता का नया सफर शुरू करने के लिए?

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