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क्या आप सही बर्तन में खा रहे हैं? परवीन शर्मा से जानें धातुओं का जादुई असर

एस्ट्रो-इन्फ्लुएंसर परवीन शर्मा के अनुसार, हम जिस बर्तन में खाना खाते या पानी पीते हैं, वह हमारे स्वास्थ्य और ऊर्जा को गहराई से प्रभावित करता है। तांबा पाचन और शुद्धि के लिए, चांदी शीतलता और मानसिक शांति के लिए, और कांसा स्थिरता के लिए सर्वोत्तम है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों इस बात की पुष्टि करते हैं कि धातुओं के गुण हमारे भोजन के 'गुणों' को बदलकर शरीर और मन को प्रभावित करते हैं।

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क्या आप सही बर्तन में खा रहे हैं? परवीन शर्मा से जानें धातुओं का जादुई असर

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • चांदी की ठंडक: गुस्सा कम करने और शरीर को शीतल रखने के लिए चांदी है उत्तम
  • तांबे का जादू: रात भर तांबे में रखा पानी पाचन और इम्यूनिटी के लिए बेस्ट
  • धातु और ऊर्जा: हर बर्तन आपके भोजन में एक खास 'इमप्रिंट' छोड़ता है

अक्सर हम इस बात पर बहुत ध्यान देते हैं कि हम क्या खा रहे हैं क्या वह ऑर्गेनिक है? क्या उसमें विटामिन्स हैं? लेकिन हम एक बहुत ही बुनियादी बात भूल जाते हैं: वह भोजन किस बर्तन में रखा गया है? मशहूर लाइफस्टाइल और एस्ट्रो-इन्फ्लुएंसर परवीन शर्मा ने हाल ही में एक विचारोत्तेजक जानकारी साझा की है। उनका मानना है कि भोजन और पानी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बर्तन केवल उपयोगिता के साधन नहीं हैं; वे एक ऐसी ऊर्जा का संचार करते हैं जो हमारे शरीर और मन को सूक्ष्म रूप से प्रभावित करती है।

यह ज्ञान आयुर्वेद की प्राचीन समझ और आधुनिक विज्ञान के सिद्धांतों का एक अद्भुत संगम है। आइए जानते हैं कि अलग-अलग धातुएं हमारे भोजन के 'गुणों' को कैसे बदलती हैं:

1. तांबा  सक्रियता और शुद्धिकरण
सदियों से भारतीय घरों में तांबे के बर्तनों का विशेष स्थान रहा है। परवीन शर्मा बताती हैं कि तांबा गर्मी और सक्रियता से जुड़ा है। जब पानी को रात भर तांबे के बर्तन में रखा जाता है, तो वह तांबे के गुणों को सोख लेता है।

  • स्वास्थ्य लाभ: यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है, वात-पित्त-कफ  को संतुलित करता है और शरीर की आंतरिक शुद्धि करता है।

  • वैज्ञानिक पहलू: आधुनिक विज्ञान भी तांबे के 'एंटी-माइक्रोबियल' गुणों को स्वीकार करता है, जो हानिकारक बैक्टीरिया को मारने में सक्षम है।

2. कांसा : स्थिरता और संतुलन
कांसा, तांबे की तुलना में अधिक नरम और स्थिर धातु मानी जाती है। परवीन के अनुसार, इसमें एक 'ग्राउंडिंग' ऊर्जा होती है जो व्यक्ति को मानसिक स्थिरता प्रदान करती है।

  • सही उपयोग: पारंपरिक रूप से कांसे का उपयोग भोजन परोसने और खाने के लिए किया जाता रहा है, न कि उसे लंबे समय तक स्टोर करने के लिए। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो अपने जीवन में शांति और संतुलन की तलाश में हैं।

3. चांदी : शीतलता और मानसिक शांति
चांदी, जिसे आयुर्वेद में 'रजत' कहा जाता है, अपने ठंडे स्वभाव के लिए जानी जाती है। परवीन शर्मा कहती हैं कि चांदी के बर्तन में रखा पानी या भोजन शरीर को शीतलता प्रदान करता है।

  • भावनात्मक प्रभाव: यह क्रोध को नियंत्रित करने, मानसिक तनाव को कम करने और शरीर की अतिरिक्त गर्मी को बाहर निकालने में मदद करता है। यह चंद्रमा की ऊर्जा का प्रतीक है, जो मन को शांत और स्थिर रखता है।

4. पीतल  शक्तिशाली लेकिन प्रतिक्रियाशील
पीतल का उपयोग हमारे किचन और धार्मिक अनुष्ठानों में बहुत अधिक होता है। हालांकि यह एक बहुत ही ऊर्जावान धातु है, लेकिन यह काफी Reactive भी है। इसीलिए, खट्टे खाद्य पदार्थों को पीतल में रखने से मना किया जाता है। परवीन शर्मा सलाह देती हैं कि पीतल का उपयोग करते समय सावधानी और जागरूकता की आवश्यकता होती है।

5. धातु का  Energetic Imprint
लेख का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हर धातु अपना एक प्रभाव छोड़ती है। जिस तरह केमिस्ट्री में 'आयन एक्सचेंज' होता है, उसी तरह हमारे पूर्वज 'ऊर्जा विनिमय' को समझते थे। भोजन जिस धातु के संपर्क में आता है, वह उसके मौलिक स्वभाव को बदल देता है। जागरूक जीवन की ओर बढ़ने का अर्थ है यह समझना कि प्रकृति की हर वस्तु यहाँ तक कि आपके हाथ में मौजूद गिलास भी आपकी चेतना का हिस्सा बन रही है।

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