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- "जीवित शरीर में मत डालो मरा हुआ खाना!" सद्गुरु के इस वीडियो ने खोल दिए ज़्यादा नींद और सुस्ती के गहरे राज
"जीवित शरीर में मत डालो मरा हुआ खाना!" सद्गुरु के इस वीडियो ने खोल दिए ज़्यादा नींद और सुस्ती के गहरे राज
आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने हाल ही में बताया कि हफ़्तों पुरानी ब्रेड और बासी खाना हमारे शरीर में Inertia पैदा करता है, जिससे हमें ज़्यादा नींद और सुस्ती महसूस होती है। उन्होंने ताजे फलों के सेवन पर ज़ोर देते हुए कहा कि 'जीवित' शरीर को हमेशा ताजे भोजन की ज़रूरत होती है। अगर हम ताजे फलों का सेवन करें, तो शरीर की ऊर्जा बढ़ेगी और नींद की ज़रूरत 1-2 घंटे कम हो सकती है।
सद्गुरु के अनुसार बासी खाना शरीर में सुस्ती पैदा करता है
Photo Credit: instagram
- ज़्यादातर ब्रेड हफ़्तों पुरानी होती है, बोले सद्गुरु
- ताजे फल खाने से नींद की ज़रूरत कम हो सकती है, सद्गुरु बोले
- जीवित शरीर को हमेशा ताजे भोजन की ज़रूरत होती है
क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी किचन में रखी ब्रेड असल में कितनी पुरानी है? आध्यात्मिक गुरु और योगी सद्गुरु ने एक वीडियो के ज़रिए हमारी खाने-पीने की आदतों पर एक गहरी और चौंकाने वाली बात साझा की है, जो शायद आपकी सेहत और ऊर्जा के स्तर को पूरी तरह से बदल सकती है।
बासी खाने का कड़वा सच
सद्गुरु का कहना है कि आज के दौर में हम जो खाना खा रहे हैं, वह अक्सर एक से तीन महीने पुराना होता है। सुपरमार्केट में मिलने वाली ब्रेड शायद ही कभी सीधे बेकरी से ताजी-ताजी आती हो। ज़्यादातर मामलों में यह हफ़्तों पुरानी होती है और इसे खराब होने से बचाने के लिए कड़े कोल्ड स्टोरेज या फ्रिज में रखा जाता है। अब गरम और ताजी ब्रेड की उम्मीद करना जैसे पुरानी बात हो गई है। सद्गुरु बताते हैं कि जब हम ऐसा बासी भोजन करते हैं, तो यह हमारे सिस्टम में 'इनर्शिया' यानी जड़ता पैदा करता है। इसका सीधा मतलब है कि आपका शरीर अंदर से भारी और सुस्त महसूस करने लगता है।
नींद और भोजन का गहरा नाता
अगर आपको लगता है कि आप ज़रूरत से ज़्यादा सो रहे हैं और सुबह उठने में दिक्कत होती है, तो इसकी एक बड़ी वजह आपका भोजन हो सकता है। सद्गुरु के मुताबिक, जब शरीर में भोजन के कारण जड़ता बढ़ती है, तो हमें स्वाभाविक रूप से ज़्यादा नींद आती है। शरीर उस भारी और 'मृत' खाने को पचाने की कोशिश में अपनी सारी ऊर्जा खर्च कर देता है। उन्होंने एक बहुत ही सरल तरीका सुझाया है। उनका कहना है कि अगर आप सिर्फ एक हफ्ते के लिए 'फ्रूट डाइट' यानी ताजे फलों के आहार पर चले जाएं, तो आप अपनी नींद में 1 से 2 घंटे की कमी महसूस करेंगे और पहले से ज़्यादा सक्रिय रहेंगे।
जीवित शरीर और मरा हुआ खाना
सद्गुरु ने एक बहुत ही मार्मिक बात कही, "हम एक जीवित शरीर में 'मरा हुआ' खाना डाल रहे हैं, जो कि स्वास्थ्य के नज़रिए से बिल्कुल गलत है।" उनके अनुसार, जीवित शरीर को अपनी जीवंतता और ऊर्जा बनाए रखने के लिए ताजे और प्राणों से भरपूर भोजन की ज़रूरत होती है। फल ताजे और 'अलाइव' होते हैं, जो शरीर को तुरंत एनर्जी देते हैं। सद्गुरु की यह सलाह उन सभी के लिए एक बड़ी सीख है जो अपनी लाइफस्टाइल और दिमागी सतर्कता में सुधार करना चाहते हैं। ताज़ा खाना केवल पोषण ही नहीं देता, बल्कि आपको पूरे दिन तरोताज़ा और हल्का महसूस कराता है।
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