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श्री श्री रविशंकर: टॉक्सिक रिश्तों से कैसे उबरें और खुद को करें हील
श्री श्री रविशंकर के अनुसार, टॉक्सिक रिश्तों से हीलिंग की शुरुआत खुद के भीतर से होती है। पुरानी यादों के बोझ को छोड़कर, ध्यान और करुणा के जरिए अपनी आंतरिक शांति वापस पाएं। 'लेटिंग गो' अतीत को भूलना नहीं, बल्कि खुद को दोबारा चुनना और आगे बढ़ना है।
श्री श्री रविशंकर ने बताया 'हीलिंग' का सबसे सरल रास्ता
Photo Credit: Instagram
- कड़वे रिश्तों के बोझ से कैसे पाएं मुक्ति
- दुख दूसरों से मिलता है, पर शांति अपने भीतर
- टॉक्सिक बॉन्ड्स से उबरने के लिए गुरुदेव के अनमोल सूत्र
टॉक्सिक या ज़हरीले रिश्ते हमारे मन पर गहरे घाव छोड़ जाते हैं, जो हमारे आत्म-सम्मान, मानसिक स्पष्टता और दूसरों पर भरोसा करने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर एक बहुत ही शक्तिशाली नज़रिया साझा करते हैं: "हीलिंग का मतलब यह नहीं है कि आप जो हुआ उसे भूल जाएँ, बल्कि इसका मतलब है अपनी शांति वापस पाना और अपनी आंतरिक शक्ति से फिर से जुड़ना।" उनका संदेश हमें याद दिलाता है कि दुख भले ही दूसरों के कारण आया हो, लेकिन उससे उबरने की शुरुआत हमेशा आपके भीतर से ही होती है।
भावनात्मक कचरे को बाहर निकालें:
श्री श्री समझाते हैं कि असली टॉक्सिसिटी केवल वह व्यक्ति नहीं है, बल्कि वह 'भावनात्मक अवशेष' है जो पीछे छूट गया है। दर्दनाक यादें, कड़वे शब्द और अनसुलझे झगड़े मन में एक लूप की तरह चलते रहते हैं और आपकी ऊर्जा सोख लेते हैं। इस लूप को तोड़ना जागरूकता से शुरू होता है। जब आप यह समझ जाते हैं कि वे विचार अब आपको उस व्यक्ति से भी ज्यादा चोट पहुँचा रहे हैं, तब आप भावनात्मक आज़ादी की ओर बढ़ते हैं। 'लेटिंग गो' (पुरानी बातों को छोड़ना) का मतलब उनके व्यवहार को सही ठहराना नहीं है, बल्कि अपनी शांति को चुनना है।
अपने आंतरिक स्पेस को फिर से सजाएं:
हीलिंग के लिए अपने भीतर उस खाली जगह को फिर से भरना जरूरी है जहाँ कभी टॉक्सिसिटी भरी थी। श्री श्री ध्यान, गहरी सांस लेने की प्रक्रिया और ग्राउंडिंग एक्सरसाइज की सलाह देते हैं ताकि आंतरिक वातावरण को शुद्ध किया जा सके। ये अभ्यास मन में स्पष्टता, शांति और नई ऊर्जा लाते हैं। जैसे-जैसे मन हल्का होता है, दिल को आगे बढ़ने की ताकत मिलती है। आप घावों पर प्रतिक्रिया देने के बजाय बुद्धिमानी से काम लेना शुरू करते हैं।
बिना कड़वाहट के विरक्त होना सीखें:
श्री श्री का दृष्टिकोण करुणा के साथ 'वैराग्य' पर जोर देता है। वैराग्य का मतलब दुनिया से कट जाना नहीं है, बल्कि दर्द से खुद को अलग कर लेना है। जब आप मन से नाराजगी निकाल देते हैं, तो आप पुराने रिश्तों को अपने वर्तमान पर असर डालने की शक्ति देना बंद कर देते हैं। करुणा आपके मन को कठोर होने से बचाती है, जबकि वैराग्य आपके दिल को पुराने ढर्रे पर वापस जाने से रोकता है।
दर्द से परे खुद को पहचानें:
ज़हरीले रिश्ते आपकी पहचान को छोटा कर देते हैं। हीलिंग उसे फिर से विस्तार देती है। खुद के उन हिस्सों पर ध्यान दें जिन्हें आपने नज़रअंदाज़ कर दिया था आपके शौक, सपने, ताकत और खुशियाँ। जिस पल आप खुद को दोबारा चुनते हैं, ज़िंदगी बदलने लगती है। जैसा कि श्री श्री याद दिलाते हैं, "दर्द आपको परिभाषित नहीं करता। उससे ऊपर उठने की आपकी क्षमता आपको परिभाषित करती है।"
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