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वोडाफोन-आइडिया के रिकॉर्ड मुनाफे का सच: रचना रानाडे ने डिकोड किया गणित

वोडाफोन आइडिया ने हाल ही में ₹51,976 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज कर बाजार को हैरान कर दिया है। CA रचना रानाडे के अनुसार, यह मुनाफा कंपनी के टेलीकॉम बिजनेस में सुधार से नहीं, बल्कि AGR बकाये में सरकारी कटौती और अकाउंटिंग मानकों के तहत देनदारियों के पुनर्मूल्यांकन से आया है। कंपनी को अभी भी परिचालन स्तर पर घाटा हो रहा है, इसलिए इसे 'वन-टाइम अकाउंटिंग गेन' कहना अधिक सटीक होगा।

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वोडाफोन-आइडिया के रिकॉर्ड मुनाफे का सच: रचना रानाडे ने डिकोड किया गणित

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • अचानक उछाल: Vi ने ₹51,976 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज कर सबको चौंकाया
  • AGR विवाद: सरकार द्वारा बकाये के पुनर्मूल्यांकन से मिला भारी लाभ
  • कागजी लाभ: यह पैसा बिजनेस से नहीं, बल्कि अकाउंटिंग बदलाव से आया है

शेयर बाजार में जब वोडाफोन आइडिया के तिमाही नतीजे सामने आए, तो हर कोई दंग रह गया। एक ऐसी कंपनी जो सालों से अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही थी और हर तिमाही हज़ारों करोड़ का घाटा झेल रही थी, उसने अचानक ₹51,976 करोड़ का Net Profit घोषित कर दिया। क्या यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास का सबसे बड़ा टर्नअराउंड है? प्रसिद्ध चार्टर्ड अकाउंटेंट और मार्केट एक्सपर्ट रचना रानाडे ने अपनी हालिया चर्चा में इस मुनाफे की परतों को उधेड़ा है और बताया है कि चमकने वाली हर चीज़ सोना नहीं होती।

1. सामान्य बिजनेस नंबर बनाम असाधारण आंकड़े 
रचना रानाडे अपने विश्लेषण की शुरुआत कंपनी के 'नॉर्मल बिजनेस' नंबरों से करती हैं। यदि हम असाधारण मदों  को हटा दें, तो कहानी कुछ और ही है:

  • राजस्व  ₹11,332 करोड़ 

  • ब्याज और टैक्स से पहले की हानि : ₹629 करोड़ का घाटा।
    लेकिन अचानक 'एक्सेप्शनल आइटम्स' के कॉलम में ₹57,491 करोड़ का एक बड़ा नंबर जुड़ गया, जिसने पूरे समीकरण को मुनाफे में बदल दिया। सवाल यह है कि यह 'जायंट नंबर' आया कहाँ से?

2. AGR विवाद और सरकारी राहत 
Adjusted Gross Revenue के बकाये से जुड़ा है। सालों से टेलीकॉम कंपनियों और भारत सरकार के बीच स्पेक्ट्रम और लाइसेंस शुल्क को लेकर विवाद चल रहा था। दूरसंचार विभाग के अनुसार कंपनियों पर भारी बकाया था। रचना बताती हैं कि दिसंबर 2025 तक Vi ने अपनी किताबों में लगभग ₹80,502 करोड़ की देनदारी  दर्ज कर रखी थी।

हाल ही में, सरकार ने इन बकायों का Reassessment किया और इसे घटाकर ₹64,046 करोड़ कर दिया। इसके साथ ही, इस राशि के भुगतान की अवधि को बढ़ाकर 2041 तक कर दिया गया है। भुगतान में मिली इस राहत ने ही अकाउंटिंग का खेल बदल दिया।

3. IndAS 109 और 'प्रेजेंट वैल्यू' का गणित 
यहीं पर IndAS 109 की भूमिका आती है। रचना रानाडे विस्तार से समझाती हैं कि जब भविष्य में किए जाने वाले भुगतानों की अवधि बढ़ जाती है, तो उनकी 'प्रेजेंट वैल्यू'  हो जाती है।

  • Vi की पुरानी देनदारी: ₹80,502 करोड़।

  • नई रिवाइज्ड देनदारी  ₹24,880 करोड़।
    इन दोनों के बीच का अंतर लगभग ₹35,622 करोड़ रहा। जब इसमें अन्य प्रावधानों और ब्याज की गणना को जोड़ा गया, तो कंपनी को कुल ₹57,491 करोड़ का 'कागजी' फायदा हुआ, जिसे कंपनी ने अपने P&L स्टेटमेंट में 'मुनाफे' के रूप में दिखाया।

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