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गौरंग दास ने बताया सोशल मीडिया की सबसे बड़ी बीमारी, क्या आप भी हैं शिकार?
गौरंग दास का कहना है कि आज मैसेज डिकोडिंग एक बड़ी समस्या बन गई है। हम अक्सर छोटे-छोटे मैसेजेस जैसे 'K' या 'Hmm' को लेकर घंटों ओवरथिंकिंग करते हैं और दोस्तों के साथ मिलकर उनकी जासूसी करते हैं। यह आदत रिश्तों को मजबूती देने के बजाय उनमें कड़वाहट और दूरियां पैदा करती है। गौरंग दास सलाह देते हैं कि मैसेज के आधार पर जजमेंट बनाना बंद करें और सीधे संवाद को प्राथमिकता दें।
गौरंग दास ने 'मैसेज डिकोडिंग' को आज की बड़ी बीमारी बताया
Photo Credit: Instagram
- मैसेज में 'K' या 'Hmm' का मतलब ढूंढना रिश्तों के लिए घातक
- गौरंग दास के अनुसार मैसेज डिकोडिंग से ओवरथिंकिंग बढ़ती है
- मैसेज के आधार पर किसी को जज करना गलत
क्या आपको भी किसी का सिर्फ 'K' लिखना परेशान कर देता है? अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं। मशहूर आध्यात्मिक गुरु गौरंग दास, जो अपनी प्रेरणादायक बातों के लिए जाने जाते हैं, ने हाल ही में एक वीडियो में आज की दुनिया की एक ऐसी 'बीमारी' का जिक्र किया है जिससे हम सब कभी न कभी जूझते हैं। उन्होंने इसे 'मैसेज डिकोडिंग' का नाम दिया है, जो हमारे मानसिक सुकून को छीन रहा है।
मैसेज डिकोडिंग का जाल
गौरंग दास कहते हैं कि आज के डिजिटल दौर में लोग सीधे बात करने के बजाय मैसेज के पीछे का छिपा हुआ मतलब ढूंढने में ज्यादा वक्त बिताते हैं। अगर किसी ने 'OK' की जगह सिर्फ 'K' लिख दिया, तो हमें लगता है कि रिश्ता ही खत्म हो गया। हम सोचने लगते हैं कि सामने वाला हमसे नाराज है या वो 'इमोशनली अनअवेलेबल' है। इसी तरह 'Hey' और 'Hi' के बीच के बारीक फर्क को लेकर भी लोग घंटों सिर खपाते हैं और खुद को तनाव में डाल लेते हैं।
दोस्तों के साथ 'FBI' इन्वेस्टिगेशन
वीडियो में गौरंग दास बड़े ही मजाकिया लेकिन सटीक अंदाज में बताते हैं कि कैसे मैसेज डिकोडिंग अब एक 'ग्रुप प्रोजेक्ट' बन गया है। हम अपने दोस्तों को स्क्रीनशॉट भेजते हैं, जूम करके पंक्चुएशन मार्क्स चेक करते हैं और यह जानने की कोशिश करते हैं कि सामने वाले का मूड कैसा है। गौरंग दास कहते हैं, 'पहले लोग क्राइम सीन्स इन्वेस्टिगेट करते थे, अब लोग वॉट्सऐप पर लास्ट सीन चेक करते हैं।' यह आदते हमें एक जासूस बना रही हैं जो हर छोटी बात में बुराई ढूंढती है।
रिश्तों पर पड़ता बुरा असर
उनका कहना है कि पहले लोग खाली समय में सुडोकू या पहेलियां सुलझाते थे, लेकिन अब वे 'Take Care' जैसे साधारण शब्दों के गहरे और डरावने अर्थ निकालने में लगे रहते हैं। गौरंग दास चेतावनी देते हैं कि इस तरह की ओवरथिंकिंग से न सिर्फ हमारा मानसिक सुकून छिनता है, बल्कि हमारे खूबसूरत रिश्ते भी खराब होते हैं।
क्या है गौरंग दास की सलाह?
अपनी बात खत्म करते हुए वे एक बहुत जरूरी सलाह देते हैं। वे कहते हैं कि मैसेज डिकोड करना अपने आप में बुरा नहीं है, लेकिन उस आधार पर किसी इंसान के बारे में अपनी राय या जजमेंट बना लेना बहुत गलत है। हमें चीजों को बहुत ज्यादा पेचीदा बनाने के बजाय सादगी और सीधे संवाद पर ध्यान देना चाहिए। यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है और युवा इसे अपनी जिंदगी से जोड़कर देख रहे हैं।
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