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क्या पैसे से तय होती है महिलाओं की वैल्यू? सद्गुरु ने दिया बड़ा बयान
सद्गुरु ने मातृत्व और करियर के बीच संतुलन पर अपने विचार साझा किए हैं। उनका कहना है कि महिलाओं की वैल्यू केवल उनके द्वारा कमाए गए पैसों से तय नहीं होनी चाहिए। अगर आर्थिक जरूरत है, तो काम करना सही है, लेकिन घर पर रहकर बच्चों की परवरिश करना या अपने शौक पूरे करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। हमें सर्वाइवल से ऊपर उठकर जीवन की खूबसूरती और खुशियों को ज्यादा महत्व देना चाहिए।
महिलाओं की वैल्यू पैसे से तय नहीं होती: सद्गुरु
Photo Credit: Instagram
- सद्गुरु ने कहा- आर्थिक जरूरत हो तो जरूर करें काम
- बच्चों को प्यार देना और कुकिंग भी है बहुत कीमती
- सर्वाइवल से ज्यादा जिंदगी की खूबसूरती जरूरी है
आज के समय में जब भी हम सफलता की बात करते हैं, तो सबसे पहले दिमाग में पैसा और करियर ही आता है। लेकिन क्या एक महिला के लिए मातृत्व और करियर के बीच संतुलन बिठाना वाकई इतना मुश्किल है? आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने हाल ही में इस विषय पर अपने विचार साझा किए हैं, जो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे हैं। यह वीडियो न केवल कामकाजी महिलाओं बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए है जो सफलता को सिर्फ पैसों के पैमाने पर मापता है।
पैसे से बढ़कर है जीवन
सद्गुरु का कहना है कि आज के दौर में महिलाएं भी पुरुषों की तरह ही एक 'गलती' कर रही हैं। वे भी यह मानने लगी हैं कि उनके जीवन की कीमत इस बात से तय होगी कि वे कितना पैसा कमाती हैं। सद्गुरु के अनुसार, पैसा कमाना केवल जीवन जीने का एक साधन है, न कि जीवन का असली पैमाना। अगर किसी परिवार में आर्थिक तंगी है, तो यकीनन एक महिला को बाहर निकलकर काम करना चाहिए, और इसमें कोई बुराई नहीं है। लेकिन इसे एक मजबूरी या प्रतियोगिता नहीं बनाना चाहिए।
हर काम की अपनी अहमियत
वीडियो में सद्गुरु एक बहुत ही खूबसूरत उदाहरण देते हैं। वे कहते हैं कि अगर एक महिला संगीत बजाती है, अपने बच्चों को जी-जान से प्यार करती है, या बहुत प्यार से खाना बनाती है, तो वह भी उतना ही कीमती काम है जितना कि ऑफिस जाकर पैसे कमाना। उनका मानना है कि अगर कोई महिला एक फूल की तरह खूबसूरती से जी रही है, तो वह भी समाज के लिए एक बड़ा योगदान है। हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि सिर्फ ऑफिस जाने वाली महिलाएं ही कुछ महत्वपूर्ण कर रही हैं।
मजबूरी नहीं, खुशी चुनें
सद्गुरु का कहना है कि हमें सर्वाइवल यानी सिर्फ पेट पालने को जिंदगी की खूबसूरती से ऊपर नहीं रखना चाहिए। उनका मानना है कि करियर चुनना एक व्यक्तिगत पसंद होनी चाहिए, न कि किसी सामाजिक दबाव का नतीजा। अगर आपका पैशन आपको बाहर काम करने के लिए प्रेरित करता है, तो आप जरूर करें। लेकिन अगर आपकी खुशी घर और बच्चों में है, तो उसे कमतर समझना गलत है। सद्गुरु की ये बातें हमें एक बार फिर सोचने पर मजबूर करती हैं कि हम अपनी वैल्यू किस आधार पर तय कर रहे हैं।
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