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आनंद और उल्लास का जादू: सद्गुरु ने बताया क्यों खुश रहने से आसान हो जाता है जीवन

सद्गुरु के अनुसार, जब आप भीतर से आनंद और उल्लास से भरे होते हैं, तो पूरी दुनिया आपके लिए एक सहायक यंत्र बन जाती है। आपकी सकारात्मकता न केवल मनुष्यों को बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं को भी आपकी ओर आकर्षित करती है। आनंदमय रहने से जीवन की बाधाएं हट जाती हैं और आपका सफर सुगम हो जाता है। अपनी आंतरिक ऊर्जा को उल्लासपूर्ण बनाना ही खुशहाल जीवन की असली नींव है।

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आनंद और उल्लास का जादू: सद्गुरु ने बताया क्यों खुश रहने से आसान हो जाता है जीवन

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • बाधाओं का अंत: समावेशी जीवन आपकी हर मुश्किल को सुगम बना देता है
  • आकर्षण की शक्ति: जब आप आनंदित होते हैं, तो लोग खुद आपसे प्यार करते हैं
  • प्रकृति का साथ: पक्षी, जानवर और पेड़ भी आपकी ऊर्जा को महसूस करते हैं

आज की भागदौड़ भरी और तनावपूर्ण दुनिया में हम अक्सर बाहरी सफलताओं के पीछे भागते हैं, यह भूलकर कि हमारी असली शक्ति हमारे भीतर है। प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु ने हाल ही में एक बहुत ही संजीदा विचार साझा किया है। उनका संदेश बहुत सरल है: "उठो और चमक उठो  लेकिन यह चमक तभी संभव है जब आप भीतर से आनंदित हों।

1. खुशी का आकर्षण 
सद्गुरु कहते हैं कि जब आप आनंद और उल्लास से भरे होते हैं, तो लोग स्वाभाविक रूप से आपसे प्यार करने लगते हैं। यह कोई दिखावा नहीं है, बल्कि एक चुंबकीय शक्ति है। जब आप दूसरों को प्यार देते हैं, तो वे अपने हृदय में प्रेम का अनुभव करते हैं, जो उनके लिए तो अच्छा है ही, लेकिन आपके लिए भी एक सुखद वातावरण तैयार करता है।

2. जीवन की बाधाएं और समावेशिता 
सद्गुरु एक बहुत ही गहरी बात कहते हैं "जब आपके आस-पास का पूरा जीवन आपसे प्रेम करने लगता है, तो वह आपके रास्ते में बाधा (Impediment) बनकर नहीं खड़ा होता।" इसके विपरीत, वह आपकी हर कोशिश को सुगम  बनाने में मदद करता है। जब आप 'समावेशी' बन जाते हैं, यानी खुद को सबसे जुड़ा हुआ महसूस करते हैं, तो पूरी सृष्टि आपके साथ संरेखित हो जाती है।

3. प्रकृति की प्रतिक्रिया 
समावेशिता का अहसास केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है। सद्गुरु के अनुसार, पक्षी, जानवर, पौधे और पेड़ भी आपकी ऊर्जा को महसूस करते हैं। यदि आप भीतर से आनंदित हैं, तो वे आपके प्रति अलग तरह से प्रतिक्रिया देंगे। आपका उल्लास ब्रह्मांड की हर जीवित कोशिका के साथ एक सामंजस्य बिठा लेता है।

4. विशेष संदेश: जीवन को एक 'खेल' बनाएं
जब आप दुख और अवसाद में होते हैं, तो आप खुद को दुनिया से अलग कर लेते हैं। यह अलगाव आपको और अधिक कष्ट देता है। सद्गुरु सलाह देते हैं कि "अपनी आंतरिकता की इंजीनियरिंग करें"। अपने आप को इतना ऊर्जावान और उल्लासपूर्ण बनाएं कि यह पूरी दुनिया आपके लिए एक बोझ नहीं, बल्कि एक आनंदमय 'खेल' बन जाए।

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