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- क्या सिर्फ जन्म देने से कोई 'माँ' बन जाती है? सद्गुरु के इस वायरल वीडियो ने बदल दिया सोचने का नज़रिया
क्या सिर्फ जन्म देने से कोई 'माँ' बन जाती है? सद्गुरु के इस वायरल वीडियो ने बदल दिया सोचने का नज़रिया
आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने मातृत्व के गहरे अर्थ पर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि माँ का महत्व केवल बच्चे को जन्म देने में नहीं, बल्कि उसे अपने हिस्से के रूप में स्वीकार करने में है। सद्गुरु के अनुसार, मातृत्व की असली खूबसूरती 'समावेशन' (Inclusion) की भावना में छिपी है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है और हमें माँ के प्यार को देखने का एक बिल्कुल नया और प्रेरणादायक नजरिया प्रदान करता है।
बायोलॉजिकल प्रोसेस से बड़ा है मां का प्यार: सद्गुरु
Photo Credit: Instagram
- किसी और को अपना मानना ही असली मातृत्व
- सद्गुरु का यह वीडियो सोशल मीडिया पर छाया
- सद्गुरु ने मातृत्व की खूबसूरती पर खास बात की
हम सब अपनी माँ को बहुत प्यार करते हैं और उनके प्रति हमारा सम्मान सबसे ऊपर होता है। लेकिन क्या आपने कभी गहराई से सोचा है कि एक माँ हमारे लिए इतनी खास क्यों होती है? क्या यह सिर्फ इसलिए है क्योंकि उन्होंने हमें जन्म दिया है? हाल ही में, मशहूर आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने एक वीडियो साझा किया है जिसने इंटरनेट पर हलचल मचा दी है। इस वीडियो में उन्होंने मातृत्व यानी 'मदरहुड' के पीछे के असली अर्थ को बहुत ही सरल और प्रभावशाली तरीके से समझाया है, जिसे सुनकर आपका नजरिया बदल जाएगा।
मातृत्व और जीव विज्ञान
सद्गुरु अपने वीडियो की शुरुआत में एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कहते हैं। उनके अनुसार, मातृत्व की असली खूबसूरती केवल बच्चे को जन्म देने या जीव विज्ञान की प्रक्रिया में नहीं छिपी है। अक्सर समाज में यह माना जाता है कि क्योंकि एक माँ ने नौ महीने तक बच्चे को कोख में रखा और उसे जन्म दिया, इसलिए वह पूजनीय है। लेकिन सद्गुरु इस बात को एक अलग और व्यावहारिक नजरिए से देखते हैं। वह कहते हैं कि सिर्फ जन्म देना काफी नहीं है। अगर कोई मां केवल बच्चे को जन्म दे और उसके बाद उसकी ओर ध्यान न दे, तो वह उस बच्चे के लिए सबसे बड़ी दुश्मन भी बन सकती है। इसलिए, केवल जैविक रूप से बच्चा पैदा करना ही किसी को सच्ची 'माँ' नहीं बनाता।
समावेशन की शक्ति
सद्गुरु के अनुसार, मातृत्व का असली और गहरा मतलब 'इंक्लूजन' यानी समावेशन है। इसका सीधा सा मतलब है किसी दूसरे जीवन को अपने हिस्से के रूप में देखना और महसूस करना। जब एक मां अपने बच्चे की ओर देखती है, तो वह उसे खुद से अलग नहीं मानती। वह उस नन्हीं जान को अपना ही विस्तार समझती है। यही वह निस्वार्थ भावना है जो एक मां को दुनिया में सबसे कीमती और महान बनाती है। वह अपनी मर्जी से दूसरे जीवन को अपने अस्तित्व में शामिल कर लेती है और उसे वही प्यार देती है जो वह खुद से करती है।
मदर्स डे का असली जश्न
आजकल सोशल मीडिया पर मदर्स डे का काफी क्रेज रहता है, लेकिन सद्गुरु हमें इसके पीछे की मूल भावना की याद दिलाते हैं। उनके अनुसार, हमें इसी 'समावेशन' की खूबसूरती का जश्न मनाना चाहिए। यह भावना केवल महिलाओं या जैविक माताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा गुण है जिसे हर इंसान अपने भीतर जगा सकता है। सद्गुरु का यह वीडियो हमें सिखाता है कि जब हम दूसरों को अपना हिस्सा मानकर अपनाने लगते हैं, तभी जीवन में असली प्रेम और करुणा का जन्म होता है।
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Further reading: Sadhguru 10 love quotes
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