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क्या रुद्राक्ष सच में नकारात्मक ऊर्जा से बचा सकता है? सद्गुरु ने बताया अपना नजरिया

सद्गुरु ने अपने एक वीडियो में रुद्राक्ष के आध्यात्मिक महत्व और उससे जुड़े पारंपरिक विश्वासों के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि योग परंपरा में रुद्राक्ष को ऐसा माना जाता है जो व्यक्ति की ऊर्जा (ऑरा) को मजबूत करने, मानसिक संतुलन बनाए रखने और नकारात्मक प्रभावों से बचाव में मदद करता है। सद्गुरु ने यह भी बताया कि पुराने समय में साधु-संत लगातार यात्रा करते थे, इसलिए वे रुद्राक्ष धारण करते थे ताकि अलग-अलग जगहों की ऊर्जा उनके मन और शरीर को प्रभावित न कर सके।

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क्या रुद्राक्ष सच में नकारात्मक ऊर्जा से बचा सकता है? सद्गुरु ने बताया अपना नजरिया

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • सद्गुरु ने बताया रुद्राक्ष धारण करने के पारंपरिक कारण।
  • कहा- रुद्राक्ष ऊर्जा, आभामंडल और मानसिक संतुलन से जुड़ा माना जाता है।
  • रुद्राक्ष को सुरक्षा और आध्यात्मिक जागरूकता का प्राचीन प्रतीक बताया।

सद्गुरु ने अपने एक इंस्टाग्राम वीडियो में रुद्राक्ष के महत्व और उससे जुड़े पारंपरिक विश्वासों के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि भारतीय योग और आध्यात्मिक परंपरा में रुद्राक्ष को सिर्फ एक माला या आभूषण नहीं, बल्कि ऊर्जा और मानसिक संतुलन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। हालांकि, सद्गुरु द्वारा बताए गए कई दावे पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं और इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं माना गया है।

रुद्राक्ष और ऊर्जा का संबंध

सद्गुरु के अनुसार, रुद्राक्ष पहनने का सबसे बड़ा कारण यह है कि यह व्यक्ति के ऊर्जा क्षेत्र (Aura) को मजबूत बनाने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि रुद्राक्ष व्यक्ति के आसपास एक सकारात्मक ऊर्जा का घेरा बनाने में सहायक माना जाता है, जिससे बाहरी नकारात्मक प्रभावों से बचाव होने का विश्वास है।

योग परंपरा में माना जाता है कि संतुलित ऊर्जा व्यक्ति को मानसिक शांति, भावनात्मक स्थिरता और सकारात्मक सोच बनाए रखने में मदद करती है।

यात्रा करने वालों के लिए क्यों पहनते थे रुद्राक्ष?

सद्गुरु ने बताया कि पुराने समय में साधु-संत लगातार एक जगह से दूसरी जगह यात्रा करते थे। अलग-अलग स्थानों पर रहना, खाना और सोना शरीर की ऊर्जा को असंतुलित कर सकता है। ऐसे में रुद्राक्ष को अपनी ऊर्जा को स्थिर रखने का माध्यम माना जाता था।

उन्होंने कहा कि रुद्राक्ष पहनने से व्यक्ति अपनी ऊर्जा का एक सुरक्षा कवच बनाए रखता है, जिससे बाहरी वातावरण का प्रभाव कम महसूस होता है।

ज़हर पहचानने से जुड़ा पारंपरिक विश्वास

सद्गुरु ने रुद्राक्ष से जुड़ी एक प्राचीन मान्यता का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, अगर किसी जंगल में पानी पीने से पहले रुद्राक्ष को पानी के ऊपर रखा जाए और उसमें ज़हर हो, तो रुद्राक्ष उल्टी दिशा (Anti-clockwise) में घूमने लगता है।

हालांकि, यह एक पारंपरिक आध्यात्मिक विश्वास है और इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। पानी की शुद्धता जांचने के लिए हमेशा आधुनिक परीक्षण और सुरक्षित तरीकों का ही उपयोग करना चाहिए।

क्या रुद्राक्ष मन को शांत रखता है?

सद्गुरु ने कहा कि रुद्राक्ष पहनने से शरीर का तनाव कम होता है, नसें शांत रहती हैं और ब्लड प्रेशर पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आज भारत में कुछ डॉक्टर हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी समस्याओं के मरीजों को भी रुद्राक्ष पहनने की सलाह देते हैं।

हालांकि, इन दावों की पुष्टि करने वाले पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए किसी भी स्वास्थ्य समस्या के इलाज के लिए केवल रुद्राक्ष पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

आस्था के साथ जुड़ा एक प्रतीक

आज भी लाखों लोग रुद्राक्ष को आस्था, ध्यान और आत्मिक शांति का प्रतीक मानकर धारण करते हैं। चाहे कोई इसे धार्मिक विश्वास के कारण पहने या ध्यान के अभ्यास का हिस्सा बनाए, रुद्राक्ष लोगों को अपने भीतर संतुलन, शांति और आत्मविश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
 

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