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गुरु पूर्णिमा पर सद्गुरु के साथ चंद्रमा और मन के जादुई संबंध को जानें

सद्गुरु के इस वीडियो के माध्यम से जानें कि कैसे चंद्रमा की किरणें हमारे मन और स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। आधुनिक विज्ञान और प्राचीन आध्यात्मिकता के मेल से समझें कि गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की रोशनी में ध्यान करने से कैसे आंतरिक शांति और नई ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है।

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Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • चंद्रमा का मन पर होता है गहरा प्रभाव
  • चंद्र चक्र नींद और मेलाटोनिन को बदलता है
  • गुरु पूर्णिमा है कृपा पाने का विशेष समय

प्रकृति के रहस्यों में चंद्रमा का स्थान हमेशा से ही अद्वितीय रहा है। हम अक्सर उसे केवल रात में आकाश में चमकने वाला एक सुंदर गोला मान लेते हैं, लेकिन आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु का कहना है कि चंद्रमा का हमारे मन के साथ एक अटूट और अत्यंत गहरा संबंध है। भारतीय प्राचीन परंपराओं में चंद्रमा को 'सोम' कहा गया है, जिसे मन और भावनाओं का कारक माना जाता है।

सद्गुरु इस वीडियो में बताते हैं कि आधुनिक विज्ञान भी अब धीरे-धीरे उन तथ्यों की पुष्टि कर रहा है जिन्हें योगिक विज्ञान सदियों पहले जान चुका था। विज्ञान के अनुसार, चंद्र चक्र  मानव शरीर के हार्मोनल सिस्टम को प्रभावित करता है। विशेष रूप से, यह 'मेलाटोनिन' (जो हमारी नींद के चक्र को नियंत्रित करता है) और 'सेरोटोनिन' (जो हमारे मूड और खुशहाली के लिए जिम्मेदार है) के स्तर में बदलाव लाता है। ये दोनों ही तत्व हमारी मानसिक शांति, आराम और समग्र स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

पूर्णिमा की रात, विशेषकर गुरु पूर्णिमा, आध्यात्मिक साधकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है। सद्गुरु कहते हैं कि यदि आप पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की किरणों के नीचे शांत होकर बैठते हैं और उन किरणों को अपने भीतर समाहित  होने देते हैं, तो आप एक अनोखे 'नशे' या खुमार का अनुभव करेंगे। यह नशा किसी नशीले पदार्थ से नहीं, बल्कि जीवन के प्रति आपकी गहरी जागरूकता और चेतनता से उत्पन्न होता है।

गुरु पूर्णिमा का दिन 'ग्रहणशीलता' और 'कृपा' का उत्सव है। यह वह समय है जब ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रवाह कुछ इस तरह होता है कि कोई भी व्यक्ति अपनी साधना के माध्यम से उच्च चेतना को आसानी से छू सकता है। सद्गुरु एक बहुत ही सरल लेकिन प्रभावी अभ्यास का सुझाव देते हैं। वे कहते हैं कि इस रात को किसी शांत स्थान पर बैठें, अपनी सांसों को धीमा और सचेत करें, और चंद्रमा की उस शीतल चाँदनी को अपने रोम-रोम में महसूस करें।

सद्गुरु के अनुसार, चंद्रमा की शीतलता आपके भीतर एक 'शांत उत्साह' पैदा करती है। यह आपको यह अहसास दिलाता है कि आप केवल एक भौतिक शरीर नहीं हैं, बल्कि इस अनंत अस्तित्व का एक हिस्सा हैं। यह अनुभव आपके अहंकार को कम करता है और आपको अधिक विनम्र और ग्रहणशील बनाता है।

इस डिजिटल युग की भागदौड़ और तनाव के बीच, सद्गुरु का यह संदेश हमें वापस प्रकृति की गोद में ले जाता है। वे हमें याद दिलाते हैं कि असली आनंद और शांति हमारे भीतर ही है, बस हमें सही समय पर प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने की जरूरत है। अगली बार जब आप पूर्णिमा का चांद देखें, तो उसे केवल दूर से निहारें नहीं, बल्कि उसकी शांति और शीतलता को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का प्रयास करें।

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