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कामाख्या देवी के दर पर पहुँचीं उर्फी जावेद: पारंपरिक लिबास और माथे पर सिंदूर लगाए आईं नजर
हमेशा अपने अनूठे फैशन के लिए चर्चा में रहने वाली उर्फी जावेद इस बार गुवाहाटी के कामाख्या देवी मंदिर में दर्शन करने को लेकर सुर्खियों में हैं। उर्फी ने पारंपरिक पोशाक में माथे पर सिंदूर लगाए मंदिर परिसर से अपनी तस्वीरें साझा की हैं। यह दौरा उनके उस हालिया स्पष्टीकरण के ठीक बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने अपने धर्म परिवर्तन और नाम बदलकर 'रीता भारद्वाज' रखने की अफवाहों को पूरी तरह खारिज किया था।
कामाख्या देवी के दर पर पहुँचीं उर्फी जावेद
Photo Credit: Instagram
- कामाख्या देवी के दरबार में उर्फी जावेद का सादगी भरा अंदाज
- पारंपरिक लुक में माँ के दर्शन करती आईं नजर
- "न नाम बदला, न धर्म परिवर्तन किया"
सोशल मीडिया पर अक्सर अपने बोल्ड और अतरंगे कपड़ों के लिए ट्रोलर्स के निशाने पर रहने वाली उर्फी जावेद का एक बिल्कुल नया और शांत रूप प्रशंसकों के सामने आया है। उर्फी ने असम के गुवाहाटी में स्थित पवित्र कामाख्या देवी मंदिर का दौरा किया। उन्होंने मंदिर परिसर से अपनी कुछ तस्वीरें पोस्ट की हैं, जिसमें वे बेहद सादगी भरे पारंपरिक कपड़ों में, माथे पर लाल सिंदूर लगाए और हाथ जोड़े माँ के दर्शन करती दिख रही हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट के कैप्शन में बस इतना लिखा "गुवाहाटी में कामाख्या देवी मंदिर के दर्शन किए।"
नाम बदलने की अफवाहों पर लगाया पूर्णविराम
उर्फी का यह मंदिर दौरा इसलिए भी लोगों का ध्यान खींच रहा है क्योंकि कुछ ही दिनों पहले इंटरनेट पर उनके धर्म और पहचान को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे थे। सोशल मीडिया पर यह अफवाह तेजी से फैली थी कि उर्फी जावेद ने हिंदू धर्म अपना लिया है और अपना नाम बदलकर 'रीता भारद्वाज' रख लिया है। एक पत्रकार द्वारा साझा किए गए वीडियो के बाद इन दावों ने और जोर पकड़ लिया था।
उर्फी ने इन खबरों को पूरी तरह से बकवास और मनगढ़ंत बताते हुए अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर लिखा था कि इन आरोपों में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि उन्होंने न तो अपना नाम बदला है और न ही किसी विशेष धर्म को अपनाया है। उन्होंने बिना फैक्ट-चेक किए सार्वजनिक रूप से ऐसी भ्रामक जानकारियां फैलाने वालों पर भी कड़े सवाल उठाए थे।
विवाद जो आसानी से खत्म नहीं हुआ
यह मामला केवल स्पष्टीकरण तक ही सीमित नहीं रहा। उर्फी ने बाद में कुछ ऐसे मैसेजेस के स्क्रीनशॉट्स भी साझा किए, जो उनके अनुसार उसी कंटेंट क्रिएटर द्वारा भेजे गए थे जिसने उनकी अफवाह उड़ाई थी। उर्फी ने बताया कि मैसेजेस इतने आपत्तिजनक थे कि वे उन्हें पूरी तरह पोस्ट नहीं कर सकती थीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बाद में उस क्रिएटर ने अपना वह वीडियो डिलीट कर दिया और उर्फी को सोशल मीडिया पर ब्लॉक कर दिया। यह पूरी घटना इंटरनेट पर गलत सूचनाओं और जवाबदेही को लेकर एक बड़ी बहस का कारण बनी।
आस्था का यह रूप पहली बार नहीं
दिलचस्प बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब उर्फी किसी मंदिर में दर्शन करने पहुँची हों। इससे पहले वे मुंबई के प्रसिद्ध बाबूलाल मंदिर भी गई थीं, जहाँ उन्होंने गहरी श्रद्धा दिखाते हुए घुटनों के बल चलकर मंदिर की खड़ी सीढ़ियाँ चढ़ी थीं। उर्फी जावेद भले ही अपने बोल्ड बयानों या अनोखे कपड़ों के लिए हेडलाइंस में रहती हों, लेकिन कामाख्या मंदिर की इन तस्वीरों ने यह साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया की चकाचौंध से दूर, वे व्यक्तिगत अनुभवों और आध्यात्मिक शांति को भी उतना ही महत्व देती हैं।

Photo Credit: Instagram
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Further reading: Uorfi Javed, Kamakhya Temple, social media, news and media, Whosthat360
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