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ज्योतिषी परवीन शर्मा का बड़ा संदेश: मासिक धर्म कोई सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि सृष्टि का एक पावन वरदान है

ज्योतिषी परवीन शर्मा के इस वीडियो के जरिए जानिए मासिक धर्म के प्रति सनातन धर्म के प्रगतिशील और पवित्र दृष्टिकोण को। गुवाहाटी के कामाख्या देवी मंदिर के संदर्भ में वे बताती हैं कि कैसे यहाँ माँ सती के सृजन स्वरूप की पूजा की जाती है और 'अम्बुवाची मेला' माँ के मासिक चक्र का उत्सव मनाता है। यह वीडियो समाज को पीरियड्स से जुड़ी वर्जनाओं को छोड़कर इसे एक पावन वरदान और शक्ति के रूप में देखने की प्रेरणा देता है।

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ज्योतिषी परवीन शर्मा का बड़ा संदेश: मासिक धर्म कोई सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि सृष्टि का एक पावन वरदान है

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • मासिक धर्म एक अत्यंत पवित्र प्रक्रिया है
  • कामाख्या मंदिर में किसी मूर्ति की जगह माँ सती के योनि स्वरूप की पूजा
  • अम्बुवाची मेला' पीरियड्स को वर्जना मानने के बजाय एक ईश्वरीय

हमारे समाज में आज भी मासिक धर्म  को लेकर कई तरह की झिझक और रूढ़िवादी सोच देखने को मिलती है। लेकिन सनातन धर्म की नींव इस प्राकृतिक प्रक्रिया के प्रति गहरे सम्मान पर टिकी है। इसी बात को खूबसूरती से समझाते हुए ज्योतिषी परवीन शर्मा ने गुवाहाटी के ऐतिहासिक कामाख्या देवी मंदिर  से एक बेहद प्रेरणादायक वीडियो साझा किया है।

सृष्टि की जननी की पूजा

परवीन शर्मा बताती हैं कि मासिक धर्म एक ऐसी शुद्धिकरण की प्रक्रिया है जिससे हर महिला गुजरती है, और यही प्रक्रिया इस दुनिया में एक नए जीवन को जन्म देने के लिए जिम्मेदार है। जिस योनि में एक माँ अपने बच्चे को 9 महीने तक सुरक्षित रखती है, सनातन धर्म में हम उसी सृजन शक्ति की पूजा करते हैं। कामाख्या मंदिर इसका सबसे बड़ा प्रमाण है, जहाँ किसी पारंपरिक मूर्ति की जगह माँ सती के योनि स्वरूप की पूजा की जाती है। यह स्थान अघोरी और तांत्रिक साधकों के लिए साधना का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है।

अम्बुवाची मेला और विश्राम का महत्व

वीडियो में वे यहाँ आयोजित होने वाले प्रसिद्ध 'अम्बुवाची मेले का जिक्र करती हैं। यह तीन दिनों का मेला असल में माँ कामाख्या के मासिक धर्म चक्र  का उत्सव मनाता है। परवीन शर्मा के अनुसार, यह उत्सव हमें दो बेहद जरूरी बातें सिखाता है:

  1. विश्राम की आवश्यकता: यह हमें याद दिलाता है कि मासिक धर्म के समय महिलाओं के शरीर को आराम की सख्त जरूरत होती है, जिसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

  2. रूढ़ियों से मुक्ति: यह हमें सिखाता है कि मासिक धर्म को कोई सामाजिक बुराई या वर्जना  मानने के बजाय एक ईश्वरीय वरदान के रूप में देखा जाना चाहिए।

बिना शक्ति के कुछ भी संभव नहीं

वे अपने संदेश का समापन करते हुए कहती हैं कि बिना शक्ति के इस संसार में सृजन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। शक्ति के बिना यह संसार अधूरा है और यहाँ तक कि शक्ति के बिना शिव भी अपूर्ण हैं। इसलिए हर महिला को अपने इस स्वरूप पर गर्व होना चाहिए।

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