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सावन से शुरू करें 16 सोमवार व्रत: जानें परवीन शर्मा से पूजा की सही विधि और नियम
श्रावण के पहले सोमवार से 16 सोमवार व्रत की शुरुआत होती है। ज्योतिषाचार्य परवीन शर्मा के अनुसार यह व्रत केवल अच्छे पति के लिए नहीं, बल्कि शिव से जुड़ने के लिए है। हर सोमवार शिव अभिषेक, सुबह-शाम कपूर आरती और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र की 3 माला का जाप करें। अंतिम सोमवार को अन्नदान कर व्रत पूर्ण करें। यह साधना मानसिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है।
परवीन शर्मा
Photo Credit: Instagram
- सावन के पहले सोमवार से शुरू करें 16 सोमवार का व्रत
- भगवान शिव का अभिषेक और पंचाक्षरी मंत्र का जाप फलदायी है
- अंतिम सोमवार को अन्नदान के साथ पूर्ण करें अपनी शिव साधना
श्रावण (सावन) का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इसी दौरान शुरू होने वाले '16 सोमवार व्रत' का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। अक्सर यह माना जाता है कि यह व्रत केवल अविवाहित महिलाएं अच्छे पति की प्राप्ति के लिए रखती हैं, लेकिन ज्योतिषाचार्य परवीन शर्मा के अनुसार, यह व्रत हर उस व्यक्ति के लिए है जो महादेव से दिल से जुड़ना चाहता है।
साधना की शुरुआत
16 सोमवार व्रत की शुरुआत सावन के पहले सोमवार से होती है और यह अगले 16 सोमवार तक लगातार चलता है। यह एक अनुशासन और समर्पण की यात्रा है, जो भक्त के जीवन में सकारात्मकता और शांति लाती है।
पूजा की सही विधि
परवीन शर्मा ने इस व्रत को फलदायी बनाने के लिए कुछ मुख्य नियम बताए हैं:
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शिव अभिषेक: हर सोमवार को भगवान शिव का अभिषेक करें। आप यह अपने घर के मंदिर या पास के किसी शिव मंदिर में कर सकते हैं। हालांकि, मंदिर जाकर पूजा करना अधिक फलदायी माना जाता है।
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आरती और दीप दान: सुबह और शाम दोनों समय भगवान शिव के सामने दीया जलाएं और कर्पूर आरती ज़रूर करें।
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मंत्र जाप: रुद्राक्ष की माला से पंचाक्षरी मंत्र (ॐ नमः शिवाय) की कम से कम 3 माला का जाप प्रतिदिन करें। यह मंत्र आपकी एकाग्रता और शिव से जुड़ाव को बढ़ाता है।
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व्रत का समापन और अन्नदान: 16वें सोमवार को पूजा संपन्न करने के बाद किसी ज़रूरतमंद को भोजन कराएं या अन्नदान करें। इसके साथ ही आपकी साधना पूर्ण होती है।
विशेष परिस्थिति में नियम
परवीन शर्मा एक बहुत ज़रूरी जानकारी भी साझा करती हैं। यदि व्रत के दौरान महिलाओं का मासिक चक्र आता है, तो उन्हें घबराने की ज़रूरत नहीं है। वे इस दौरान शारीरिक पूजा के बजाय 'मानसिक पूजा' के माध्यम से अपनी साधना जारी रख सकती हैं।
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Further reading: Parveen Sharma
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