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गायत्री मंत्र का सही उच्चारण: परवीन शर्मा से जानिए कैसे एक गलत शब्द बदल देता है मंत्र का पूरा अर्थ

क्या आप गायत्री मंत्र का सही पाठ कर रहे हैं? ज्योतिषी परवीन शर्मा के इस ज्ञानवर्धक वीडियो के अनुसार, मंत्र एक शक्तिशाली साउंड कैप्सूल होते हैं जिनका सही उच्चारण अनिवार्य है। अक्सर लोग मंत्र की अंतिम पंक्ति "धियो यो नः प्रचोदयात" में 'नः' की जगह 'न' बोल देते हैं, जिससे उसका अर्थ प्रार्थना से बदलकर 'बुद्धि नहीं चाहिए' में तब्दील हो जाता है। अपने दिन को ऊर्जावान बनाने के लिए इसे ध्यान से सुनें और सही ढंग से जाप करें।

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जानिए कैसे एक गलत शब्द बदल देता है मंत्र का पूरा अर्थ

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • गायत्री मंत्र जपते समय कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये बड़ी भूल
  • मंत्रों के सही उच्चारण का विज्ञान समझा रही हैं परवीन शर्मा
  • 'नः' और 'न' का अंतर जानिए, और अपनी प्रार्थनाओं को सही फल दें

सनातन परंपरा में गायत्री मंत्र को महामंत्र माना गया है, जिसके नियमित जाप से बुद्धि, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस मंत्र का आप रोज जाप कर रहे हैं, उसका उच्चारण बिल्कुल सही है या नहीं? प्रसिद्ध ज्योतिषी परवीन शर्मा के अनुसार, अक्सर लोग गायत्री मंत्र की एक मुख्य पंक्ति को गलत तरीके से बोलते हैं, जिससे मिलने वाला शुभ फल प्रभावित हो सकता है।

साउंड कैप्सूल है मंत्र 

परवीन शर्मा समझाती हैं कि मंत्र केवल शब्दों का समूह नहीं हैं, बल्कि वे एक वैज्ञानिक 'साउंड कैप्सूल' हैं। इनका हमारे शरीर और आसपास के वातावरण पर गहरा कंपन  होता है। यही वजह है कि मंत्र का प्रभाव तभी मिलता है जब उसका उच्चारण शत-प्रतिशत सही हो। अपने दिन को शक्तिशाली और ऊर्जावान बनाने के लिए वे सुबह 15 मिनट इसके जाप की सलाह देती हैं।

कहाँ होती है सबसे बड़ी गड़बड़ी?

वीडियो में वे उस आम गलती को रेखांकित करती हैं जो अमूमन हर कोई करता है। गायत्री मंत्र की आखिरी पंक्ति है: "धियो यो नः प्रचोदयात" 

यहाँ 'नः' का वास्तविक अर्थ है कि "मैं सूर्य भगवान से प्रार्थना कर रहा हूँ कि वे मुझे सही और उत्तम बुद्धि प्रदान करें।"

मगर, ज्यादातर लोग अनजाने में इसे 'न' बोल देते हैं। संस्कृत और हिंदी में 'न' का मतलब 'नहीं' होता है। इस तरह 'धियो यो न प्रचोदयात' बोलने का अनर्थ यह हो जाता है कि "मुझे बुद्धि नहीं चाहिए।" इस एक छोटी सी चूक की वजह से पूरे मंत्र का अर्थ ही बदल जाता है। इसलिए, किसी भी मंत्र का जाप शुरू करने से पहले उसे बहुत ध्यान से सुनना और सीखना चाहिए। 

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