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मिट्टी से बने शिवलिंग का विसर्जन कैसे करें? जानें परवीन शर्मा से शिव भक्ति का यह अनमोल पाठ
पार्थिव शिवलिंग की पूजा के बाद उसका विसर्जन करना एक महत्वपूर्ण धार्मिक प्रक्रिया है। ज्योतिषाचार्य परवीन शर्मा ने बताया है कि विसर्जन का सही समय और तरीका क्या है। उन्होंने यह भी समझाया कि कैसे मिट्टी से बना शिवलिंग जीवन और मृत्यु के चक्र को दर्शाता है। इस पवित्र जल को पौधों में डालकर आप न केवल श्रद्धा प्रकट करते हैं, बल्कि प्रकृति का सम्मान भी करते हैं।
परवीन शर्मा
Photo Credit: Instagram
- पार्थिव शिवलिंग विसर्जन के नियम और सही समय की जानकारी
- विसर्जन के बाद जल को पौधों में डालना है शुभ
- शिव ही सत्य हैं और यह संसार नश्वर है
भगवान शिव की आराधना के कई रूप हैं, जिनमें 'मिट्टी से बना शिवलिंग की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। पिछले वीडियो में हमने देखा था कि इसे कैसे बनाया जाता है, लेकिन इसकी पूजा जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही ज़रूरी है इसका सही तरीके से विसर्जन करना। मशहूर ज्योतिषाचार्य परवीन शर्मा ने हाल ही में पार्थिव शिवलिंग विसर्जन की पूरी विधि और इसके पीछे छिपे जीवन दर्शन को समझाया है।
विसर्जन का सही समय
परवीन शर्मा के अनुसार, विसर्जन का समय इस बात पर निर्भर करता है कि आपने इसे किस अवसर पर बनाया है। यदि आपने महाशिवरात्रि, सावन की शिवरात्रि या किसी विशेष शुभ दिन पर पार्थिव शिवलिंग की स्थापना की है, तो आप इसे पूरी रात अपने पास रख सकते हैं। लेकिन साधारण दिनों में, पूजा संपन्न होने के बाद सूर्योदय से पहले इसका विसर्जन करना अनिवार्य होता है।
विसर्जन की सही विधि
विसर्जन करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए:
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जलाधारी का मुख: विसर्जन के समय शिवलिंग की जलाधारी का मुख आपकी अपनी ओर होना चाहिए।
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प्रार्थना: जैसे-जैसे विसर्जन की प्रक्रिया हो, श्रद्धापूर्वक महादेव से प्रार्थना करें कि वे आपके जीवन के सभी दुखों और कष्टों को हर लें।
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प्रकृति का सम्मान: परवीन शर्मा एक बहुत ही सुंदर और पर्यावरण के अनुकूल सलाह देती हैं। वे कहती हैं कि शिवलिंग के विसर्जन के बाद उस पवित्र जल और घुली हुई मिट्टी को इधर-उधर फेंकने के बजाय अपने घर के पौधों में डाल देना चाहिए। यह न केवल श्रद्धा का विषय है, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान भी है।
सृजन और विनाश का चक्र
पार्थिव शिवलिंग हमें जीवन का एक बहुत बड़ा पाठ सिखाता है। यह 'सृजन' और 'विनाश' के चक्र को दर्शाता है। जिस तरह निराकार शिव ने मिट्टी के माध्यम से एक आकार लिया और विसर्जन के समय वे पुनः निराकार हो गए, ठीक वैसे ही हमारा यह शरीर भी नश्वर है। मिट्टी से बने इस शिवलिंग की तरह ही एक दिन सब कुछ मिट्टी में मिल जाना है। परवीन शर्मा कहती हैं, "यह संसार नश्वर है और केवल शिव ही सत्य हैं।
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