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राशी गौर ने समझाया 'फ्रीक्वेंसी' का खेल: जब रिश्ते खत्म हों, तो उदास न हों
मशहूर लाइफ कोच और ज्योतिषी राशी गौर ने बताया है कि रिश्तों का टूटना सिर्फ एक दुखद अंत नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा का खेल है। हर इंसान एक निश्चित 'फ्रीक्वेंसी' और 'वाइब्रेशन' पर जीता है। जब दो लोगों की फ्रीक्वेंसी का तालमेल बिगड़ जाता है, तो रिश्ता अपने आप टूटने लगता है। राशी गौर के अनुसार, इसे उदासी मानने के बजाय जीवन को नए सिरे से संवारने और आगे बढ़ने का एक मौका समझना चाहिए।
राशी गौर ने समझाया 'फ्रीक्वेंसी' का खेल: जब रिश्ते खत्म हों, तो उदास न हों
Photo Credit: Instagram
- रिश्तों का टूटना उदासी नहीं, बल्कि बदलाव का संकेत है
- हर इंसान एक खास फ्रीक्वेंसी पर काम करता है
- फ्रीक्वेंसी बदलने पर पुराने रिश्ते पीछे छूट जाते हैं
जीवन में किसी भी रिश्ते का अंत होना हमेशा एक दर्दनाक अनुभव होता है। चाहे वह कोई बिजनेस पार्टनरशिप हो, कोई रोमांटिक रिश्ता हो या फिर किसी परिवार के सदस्य के साथ पुराना जुड़ाव। जब भी कोई बॉन्ड टूटता है, तो ऐसा महसूस होता है जैसे किसी ने हमारा दिल तोड़ दिया हो। लेकिन मशहूर ज्योतिषी और लाइफ कोच राशी गौर का मानना है कि इन सब चीजों के पीछे ब्रह्मांड का एक गहरा नियम काम करता है, जिसे हमें समझने की जरूरत है।
क्या है रिश्तों के टूटने की असली वजह?
राशी गौर के अनुसार, जब भी कोई रिश्ता खत्म होने की कगार पर आता है, तो उसकी शुरुआत असल में बहुत पहले ही हो चुकी होती है। हमारे जीवन में हर एक व्यक्ति एक निश्चित ऊर्जा यानी फ्रीक्वेंसी पर काम करता है। हम सब अपनी एक खास वाइब्रेशन के साथ जीते हैं, जो कभी ऊँची हो सकती है और कभी नीची
वाइब्रेशन का हमारे जीवन पर असर
जब हमारी वाइब्रेशन ऊँची होती है, तो हम अपने जीवन में सकारात्मकता, खुशियाँ, उत्सव और समृद्धि को आकर्षित करते हैं। यह हमारे जीवन का एक ऐसा दौर होता है जहाँ हम अंदर से खुद को बहुत मजबूत और खुश महसूस करते हैं। दूसरी ओर, जब हमारी फ्रीक्वेंसी या वाइब्रेशन नीची होती है, तो हमें अक्सर ईर्ष्या, कार्यों में देरी, किसी व्यक्ति के प्रति बहुत अधिक निर्भरता या फिर दिल में गहरी उदासी जैसी भावनाओं का सामना करना पड़ता है।
फ्रीक्वेंसी का मेल और अलगाव
जब दो लोग एक ही तरह की फ्रीक्वेंसी पर होते हैं और जीवन से एक जैसी चीजों की उम्मीद करते हैं, तो उनके बीच का तालमेल बहुत खूबसूरत होता है। चाहे वह दोनों ही उच्च स्तर पर हों या निम्न स्तर पर, उनका जुड़ाव बना रहता है। लेकिन पेंच तब आता है जब इनमें से कोई एक व्यक्ति अपनी फ्रीक्वेंसी बदल लेता है।
जैसे ही कोई एक व्यक्ति किसी नए दौर में कदम रखता है चाहे वह बेहतर जीवन की ओर बढ़े या फिर किसी अन्य दिशा में दोनों की ऊर्जा का संतुलन बिगड़ जाता है। राशी गौर कहती हैं कि जब आप एक ही स्तर पर नहीं रहते, तो वह रिश्ता धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है और अंततः टूट जाता है।
यह उदासी नहीं, एक नई शुरुआत है
राशी गौर का कहना है कि रिश्ते के इस तरह टूटने को हमें केवल एक दुखद घटना के रूप में नहीं देखना चाहिए। यह वास्तव में ब्रह्मांड का एक तरीका है जो आपको यह बताता है कि अब आपको खुद को नए सिरे से संवारने की आवश्यकता है। अगर कोई आपकी जिंदगी से जा रहा है, तो उसके लिए खुद को परेशान न करें।
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