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"छुट्टियां सिर्फ थकान मिटाने के लिए नहीं होतीं": राधिका दास से जानिए क्यों आज का युवा लक्ज़री वेकेशन छोड़ चुन रहा है आध्यात्मिक रिट्रीट
कीर्तन लीडर और आध्यात्मिक गुरु राधिका दास ने जयवीर सिंह के साथ एक विशेष साक्षात्कार में अपनी कॉर्पोरेट लाइफ से भक्ति मार्ग तक के सफर को साझा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे आज के समय में लोग मानसिक शांति के लिए लक्ज़री वेकेशंस की जगह आध्यात्मिक रिट्रीट्स को पसंद कर रहे हैं। राधिका दास के अनुसार, कीर्तन और मंत्रों का जाप इंसान को वर्तमान में जीना सिखाता है, जो मानसिक तनाव और बर्नआउट से मुक्ति पाने का सबसे सरल और प्रभावी जरिया है।
राधिका दास से जानिए क्यों आज का युवा लक्ज़री वेकेशन छोड़ चुन रहा है आध्यात्मिक रिट्रीट
Photo Credit: Instagram
- कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़ राधिका दास ने क्यों चुना कीर्तन और भक्ति का मार्ग
- "एक वेकेशन आपकी जगह बदलता है, लेकिन रिट्रीट आपका नजरिया"
- आध्यात्मिक यात्रा के बढ़ते क्रेज पर बोले राधिका दास
आज की अत्यधिक व्यस्त और तनावपूर्ण दुनिया में मानसिक शांति की खोज हर व्यक्ति की प्राथमिकता बन चुकी है। इसी विषय पर गहराई से बात करते हुए आध्यात्मिक शिक्षक राधिका दास ने बताया कि कैसे प्राचीन भारतीय सनातन परंपराएं, कीर्तन और सामूहिक साधना आधुनिक जीवन में संतुलन बिठाने का सबसे सरल जरिया हैं।
कॉर्पोरेट करियर से पूर्णकालिक भक्ति तक का सफर
जब राधिका दास से पूछा गया कि उन्होंने एक सुरक्षित कॉर्पोरेट करियर को छोड़कर कीर्तन को पूर्णकालिक क्यों चुना, तो उन्होंने बेहद सुंदर जवाब दिया, "ऐसा नहीं था कि मैंने कॉर्पोरेट जगत को छोड़ने का कोई सचेत निर्णय लिया; बल्कि बात यह थी कि मुझे कुछ ऐसा मिल गया जो मेरी आत्मा के अधिक करीब था। भक्ति के माध्यम से, मुझे एक ऐसा उद्देश्य मिला जो किसी भौतिक करियर या सफलता से परे था। जब संगीत और मंत्रों ने मेरे अपने जीवन को इतनी गहराई से बदल दिया, तो मैंने इस अनुभव को दूसरों के साथ साझा करने के लिए अपना जीवन समर्पित करने का फैसला किया।"
साधारण छुट्टियों और आध्यात्मिक रिट्रीट में अंतर
आजकल के युवाओं का रुझान प्राकृतिक और आध्यात्मिक रिट्रीट्स की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। इस पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि लोग अब ऐसी छुट्टियां नहीं चाहते जिससे वापस आने के बाद उन्हें आराम करने की जरूरत पड़े। लोग ऐसे अनुभवों की तलाश में हैं जो उन्हें वास्तव में अंदर से ठीक करें। एक साधारण वेकेशन आपके केवल आस-पास के माहौल को बदलता है, लेकिन एक आध्यात्मिक रिट्रीट आपके जीने के नजरिए को बदल देता है। यह गगनचुंबी इमारतों और निरंतर स्क्रीन टाइम से दूर, खुद से दोबारा जुड़ने का एक सुंदर माध्यम है।
तनाव और बर्नआउट की सबसे बड़ी दवा: कीर्तन
राधिका दास के अनुसार, कीर्तन लोगों को बहुत ही सौम्य तरीके से वर्तमान क्षण में वापस ले आता है। कल की चिंताओं या आने वाले कल की एंग्जायटी को ढोने के बजाय, लोग मंत्रों की लय, अपनी सांसों और एक साथ गाने के सामूहिक अनुभव में डूब जाते हैं। उन्होंने कई बार देखा है कि लोग रिट्रीट में भारी मानसिक तनाव लेकर आते हैं, लेकिन कीर्तन के बाद वे बिल्कुल हल्के होकर वापस लौटते हैं।
'सच्ची भलाई' का अर्थ
शारीरिक फिटनेस से इतर कल्याण के अर्थ को स्पष्ट करते हुए राधिका दास ने कहा, "सच्ची भलाई शरीर, मन और आत्मा के बीच का सामंजस्य है। हम अपना बहुत सा समय अपने शारीरिक स्वास्थ्य की देखभाल में बिताते हैं, लेकिन हमें अपने आंतरिक जीवन को भी पोषण देने की उतनी ही आवश्यकता है। मेरे लिए, वैलनेस का मतलब एक उद्देश्य के साथ सुबह उठना, अर्थपूर्ण रिश्ते बनाना, करुणा के साथ दूसरों की सेवा करना और ईश्वर या अपने से परे किसी उच्च शक्ति से जुड़ा हुआ महसूस करना है।"
जो लोग इस मार्ग पर नए हैं, उन्हें सलाह देते हुए वे कहते हैं कि शुरुआत बहुत सरल होनी चाहिए। गाड़ी चलाते समय कोई मंत्र सुन लें, सुबह पाँच मिनट शांत बैठें या किसी स्थानीय कीर्तन मंडली में खुले दिल से शामिल हों। इसके लिए आपको किसी कठिन दर्शन को जानने या संस्कृत बोलने की आवश्यकता नहीं है; भक्ति पूर्ण होने के बारे में नहीं…यह केवल आपके भीतर की सच्चाई और निष्कपटता के बारे में है।
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