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यादों के जाल से कैसे निकलें बाहर? सद्गुरु ने बताया जीवन को गहराई से अनुभव करने का राज

सद्गुरु ने अपने नवीनतम संदेश में बताया है कि इंसान अक्सर अपनी यादों का गुलाम बनकर रह जाता है, जिससे वह वर्तमान की खूबसूरती और ऊर्जा को नहीं देख पाता। उनके अनुसार, जीवन को पूर्ण रूप से अनुभव करने के लिए एकाग्रता सबसे महत्वपूर्ण है। यदि हम बिना किसी स्वार्थ के वर्तमान क्षण पर पूरी तीव्रता के साथ ध्यान केंद्रित करते हैं, तो हम ब्रह्मांड के उन रहस्यों को जान सकते हैं जो साधारणतः आँखों से ओझल रहते हैं।

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'मेमोरी कार्ड' नहीं, वर्तमान में जिएं: सद्गुरु ने समझाया ध्यान का असली महत्व

Photo Credit: instagram

ख़ास बातें
  • 'मेमोरी कार्ड' नहीं, वर्तमान में जिएं
  • यादों के जाल से कैसे निकलें बाहर
  • सद्गुरु ने समझाया ध्यान का असली महत्व

आध्यात्मिक गुरु और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु ने एक बार फिर अपने गहरे ज्ञान से मानवता को नई दिशा दिखाई है। हाल ही में एक समुद्र तट से साझा किए गए अपने वीडियो में सद्गुरु ने बताया कि कैसे हमारी यादें  हमें वर्तमान जीवन का आनंद लेने से रोकती हैं और कैसे हम उनसे मुक्त होकर ब्रह्मांड के रहस्यों को जान सकते हैं।

यादों का 'मेमोरी कार्ड' और वर्तमान की उपेक्षा

सद्गुरु कहते हैं कि जब आप अपनी यादों के घेरे में रहते हैं, तो आप वह भी नहीं देख पाते जो ठीक आपके सामने मौजूद है। उन्होंने इसे एक 'मेमोरी कार्ड' की तरह समझाया। यदि आपका दिमाग पुरानी यादों को ही Recycle करता रहेगा, तो आप जीवन के विशाल पहलुओं को देखने से चूक जाएंगे। उदाहरण के तौर पर, आप समुद्र किनारे बैठे हो सकते हैं, लेकिन यदि आपका मन ऑफिस, परिवार या पिछली बातों में उलझा है, तो आप उस खूबसूरत समुद्र को कभी देख ही नहीं पाएंगे।

एकाग्रता  की शक्ति

सद्गुरु के अनुसार, जीवन को अनुभव करने का एकमात्र तरीका आपके 'ध्यान' या Intensity of Attention है। वे कहते हैं कि यदि आप बिना किसी विशेष उद्देश्य या Intent के पूरी तरह से वर्तमान में एकाग्र होते हैं, तो आपके लिए इस ब्रह्मांड के द्वार खुल जाते हैं।

बिना मंशा के ध्यान 

सद्गुरु ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात साझा की कि जब हमारे ध्यान के पीछे कोई स्वार्थ या विशेष मंशा होती है, तो हमें उसके अनुसार परिणाम मिल सकते हैं। लेकिन, जब हम बिना किसी मंशा के पूरी तीव्रता के साथ वर्तमान क्षण में मौजूद होते हैं, तब हम जीवन को उसके असली और विशाल स्वरूप में देख पाते हैं।

सद्गुरु का यह संदेश हमें याद दिलाता है कि अतीत की कड़वी या मीठी यादों में खोए रहने के बजाय, वर्तमान की शक्ति को पहचानना ही जीवन की असली सार्थकता है।

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