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52,000 करोड़ का प्रॉफिट: रचना रानाडे ने बताया इसके पीछे का असली सच

वोडाफोन-आइडिया ने हाल ही में 52,000 करोड़ रुपये का भारी मुनाफा दर्ज किया है, जिसने सबको चौंका दिया। सीए रचना रानाडे ने इस मुनाफे के पीछे का असली सच बताया है। उन्होंने समझाया कि यह कोई व्यापारिक मुनाफा नहीं, बल्कि सरकार द्वारा AGR बकाये के पुनर्मूल्यांकन के कारण हुआ एक अकाउंटिंग एडजस्टमेंट है। इंड एएस 109 के नियमों के तहत देनदारी घटने से हुए इस एक्सेप्शनल गेन ने कंपनी के मुनाफे को बढ़ाकर दिखाया है।

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सीए रचना रानाडे ने वोडाफोन-आइडिया के मुनाफे का सच बताया

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • कंपनी को 52,000 करोड़ रुपये का अचानक भारी फायदा हुआ है
  • यह मुनाफा बिजनेस ग्रोथ नहीं बल्कि अकाउंटिंग एडजस्टमेंट है।
  • सीए रचना रानाडे ने वोडाफोन-आइडिया के मुनाफे का सच बताया

क्या आपने भी वोडाफोन-आइडिया (Vi) के हालिया मुनाफे की खबर सुनी और दंग रह गए? 52,000 करोड़ का मुनाफा! सुनने में तो ऐसा लगता है कि कंपनी की किस्मत रातों-रात बदल गई है। लेकिन क्या यह वाकई कंपनी की मेहनत की कमाई है या फिर कुछ और? जानी-मानी फिन-इन्फ्लुएंसर और डिजिटल क्रिएटर सीए रचना रानाडे ने अपने लेटेस्ट वीडियो में इस राज से पर्दा उठाया है। उन्होंने बहुत ही सरल भाषा में समझाया है कि यह भारी-भरकम मुनाफा असल में आया कहां से और इसका असली मतलब क्या है।

क्या यह सच में बड़ा टर्नअराउंड है?

रचना रानाडे बताती हैं कि अगर हम कंपनी के सामान्य बिजनेस नंबर्स को देखें, तो कहानी कुछ और ही नजर आती है। कंपनी का रेवेन्यू करीब 11,332 करोड़ रुपये था, लेकिन ईबीआईटी (EBIT) में उसे 629 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। तो फिर 52,000 करोड़ का मुनाफा कहां से आया? इसका जवाब एक्सेप्शनल आइटम्स के कॉलम में छिपा है, जहां 57,491 करोड़ रुपये की बड़ी रकम दर्ज है। रचना कहती हैं कि यह कोई साधारण कमाई नहीं, बल्कि एक खास अकाउंटिंग एडजस्टमेंट का नतीजा है।

एजीआर DUES और सरकार का फैसला

इस पूरे मामले की जड़ 'एजीआर' Adjusted Gross Revenue ड्यूज़ में है। सालों से वोडाफोन-आइडिया और सरकार के बीच स्पेक्ट्रम और लाइसेंस शुल्क को लेकर विवाद चल रहा था। कंपनी ने अपनी किताबों में 80,502 करोड़ रुपये की देनदारी दिखा रखी थी। लेकिन हाल ही में सरकार ने इन बकाये का reassessment किया और इसे घटाकर करीब 64,046 करोड़ रुपये कर दिया। इसके साथ ही भुगतान की अवधि को भी 2041 तक बढ़ा दिया गया।

अकाउंटिंग का खेल

रचना रानाडे ने समझाया कि Ind AS 109 के तहत, जब पुरानी देनदारी कम होती है, तो उस अंतर को फायदे के रूप में दिखाया जाता है। कंपनी ने 80,502 करोड़ की पुरानी लायबिलिटी को हटाकर 24,880 करोड़ की नई संशोधित लायबिलिटी दर्ज की। इस बदलाव और अन्य प्रावधानों के कारण 57,491 करोड़ रुपये का 'एक्सेप्शनल गेन' हुआ, जिससे कंपनी का नेट प्रॉफिट रातों-रात बढ़ गया।

रचना कहती हैं कि यह मुनाफा कंपनी के कामकाज में सुधार से ज्यादा कागजी एडजस्टमेंट है। हालांकि यह निवेशकों के लिए एक राहत भरी खबर हो सकती है, लेकिन इसे कंपनी का पूरी तरह से संकट से बाहर निकलना कहना अभी जल्दबाजी होगी। उनके इस सरल विश्लेषण ने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा छेड़ दी है।

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