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सद्गुरु का दावा: सिर्फ 3 दिन छोड़ें नॉन-वेज, अपने आप छूट जाएगी शराब पीने की आदत

आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने हाल ही में एक दिलचस्प बात साझा की है कि कैसे हमारा खान-पान हमारी आदतों को प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि मांसाहार और शराब की तलब के बीच गहरा संबंध है। उनके अनुसार, अगर कोई व्यक्ति सिर्फ तीन दिन के लिए शाकाहारी भोजन अपनाता है, तो उसकी नशा करने की इच्छा काफी कम हो जाती है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है और लोगों को जीवन के प्रति जागृत रहने की प्रेरणा दे रहा है।

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सद्गुरु ने बताया मांस और शराब के बीच का गहरा रिश्ता

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • सद्गुरु ने बताया मांस और शराब के बीच का गहरा रिश्ता
  • केवल 3 दिन शाकाहारी बनकर देखें, शराब की तलब होगी कम
  • सद्गुरु के अनुसार नशा 'मृत्यु' की ओर इशारा करता है

क्या आप भी अपनी शराब पीने की आदत से परेशान हैं और इसे छोड़ने का कोई आसान तरीका ढूंढ रहे हैं? सोशल मीडिया पर अक्सर अपनी बातों से सुर्खियाँ बटोरने वाले मशहूर आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने एक ऐसी बात कही है जो शायद आपको हैरान कर दे। 

मांस और शराब का क्या है कनेक्शन?

सद्गुरु के मुताबिक, हमारा खान-पान केवल हमारी सेहत ही नहीं बल्कि हमारी मानसिक इच्छाओं को भी तय करता है। वे कहते हैं कि जहाँ भी मांस का सेवन अधिक होता है, वहां शराब पीने की तलब स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। आपने गौर किया होगा कि अक्सर नॉन-वेज खाने के साथ ड्रिंक्स की डिमांड बढ़ जाती है। सद्गुरु का मानना है कि यह कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि हमारे शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो भारी भोजन को पचाने या उसके प्रभाव को संतुलित करने के लिए नशे की तलाश करती है।

बस 3 दिन का शाकाहार चैलेंज

अगर आप शराब छोड़ना चाहते हैं, तो सद्गुरु एक बहुत ही आसान सा उपाय बताते हैं। वे कहते हैं, "बस तीन दिन के लिए पूरी तरह से शाकाहारी आहार  लेकर देखें।" उनके अनुसार, जैसे ही आप मांस छोड़कर सादा और शाकाहारी भोजन अपनाते हैं, नशा करने की इच्छा अपने आप कम होने लगती है। उन्होंने बताया कि उन्होंने यह प्रयोग हज़ारों लोगों पर किया है और इसके नतीजे वाकई चौंकाने वाले रहे हैं। यह बदलाव आपके सिस्टम को शांत करता है और कृत्रिम उत्तेजना की ज़रूरत कम कर देता है।

गर्म और ठंडे पानी का अनोखा उदाहरण

सद्गुरु ने जीवन जीने के दो तरीकों को एक बहुत ही दिलचस्प उदाहरण से समझाया है। उन्होंने इसकी तुलना गर्म और ठंडे पानी के शॉवर से की है। वे कहते हैं कि गर्म पानी से नहाना बहुत अच्छा और आरामदायक लगता है, लेकिन यह आपको सुस्त बना देता है। इसके विपरीत, ठंडे पानी का शॉवर आपको तुरंत जगा देता है और आपके शरीर में एक नई ऊर्जा भर देता है। योग में, एक तरीका 'जीवन-उन्मुख' है और दूसरा 'मृत्यु-उन्मुख' है।

नशे की चाहत का असली मतलब

सद्गुरु के अनुसार, नशा करने या बहुत ज़्यादा सोने की इच्छा रखना असल में अनजाने में 'मृत्यु' की ओर कदम बढ़ाना है। वे कहते हैं कि जब हम होश खोना चाहते हैं, तो हम अपनी चेतना से दूर जा रहे होते हैं। एक जागरूक और जोश से भरा जीवन वही है जिसमें आप पूरी तरह से जागृत और सचेत रहें।

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