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AI और आपकी नौकरी: अनुष्का राठौड़ ने बताया क्या सच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस छीन लेगा आपका रोजगार?

क्या AI वाकई आपकी नौकरी छीन लेगा? फाइनेंस एक्सपर्ट अनुष्का राठौड़ के इस वीडियो में स्टैनफोर्ड प्रोफेसर की रिसर्च के जरिए जानिए ऑटोमेशन का असली सच। इतिहास गवाह है कि कंप्यूटर और इंटरनेट जैसी बड़ी क्रांतियों के बाद भी बदलाव हमेशा धीरे-धीरे ही आए हैं। बुनियादी ढांचे और सरकारी नीतियों जैसे 'वीकलिंक्स' के कारण AI रातों-रात आपकी जगह नहीं ले सकता। इसलिए डरने के बजाय समय के साथ AI को सीखना ही आपके करियर के लिए सबसे सुरक्षित कदम है.

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क्या सच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस छीन लेगा आपका रोजगार?

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • क्या AI छीन लेगा आपकी नौकरी? जानिए इतिहास और हकीकत
  • रातों-रात नहीं बदलेगी दुनिया, अनुष्का राठौड़ से समझिए AI का सच
  • AI से डरें नहीं, इसे अपनी ताकत बनाना सीखें

आज के समय में हर कामकाजी व्यक्ति और छात्र के मन में यह सबसे बड़ा डर है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भविष्य में उनकी नौकरी को खत्म कर देगा? टेक जगत में फैली इस घबराहट और नकारात्मक भविष्यवाणियों के बीच फाइनेंस इन्फ्लुएंसर अनुष्का राठौड़ ने एक बहुत ही व्यावहारिक और सकारात्मक दृष्टिकोण पेश किया है.

पुरानी तकनीकों का इतिहास और उत्पादकता

अनुष्का कहती हैं कि यह पहली बार नहीं है जब इंसान किसी नई तकनीक को लेकर इतना डरा हुआ है. जब बिजली, कार , ट्रेन  कंप्यूटर और इंटरनेट आए थे, तब भी समाज में ऐसा ही डर था. लेकिन अगर हम इतिहास के आंकड़ों को देखें, तो इतनी बड़ी क्रांतियों के बावजूद भी औसत विकास दर हमेशा 2% के आसपास ही टिकी रही है. उदाहरण के लिए, 1970 के मुकाबले आज हमारे पास करोड़ों गुना अधिक ट्रांजिस्टर और शक्तिशाली फोन हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम करोड़ों गुना अधिक उत्पादक हो गए हैं; असल में हमारी उत्पादकता केवल 2-3 गुना ही बढ़ी है.

'वीकलिंक्स' और AI के तीन मॉडल

किसी भी तकनीक का प्रभाव रातों-रात क्यों नहीं दिखता, इसका कारण है 'वीकलिंक्स' कोई भी नई टेक्नोलॉजी आने पर मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर को बदलना पड़ता है, लोगों को नए सिरे से शिक्षित करना पड़ता है और सरकारी नीतियां व नियम आड़े आते हैं, जिससे वास्तविक दुनिया में इसे पूरी तरह लागू होने में दशकों लग जाते हैं.

स्टैनफोर्ड के प्रोफेसर ने भविष्य के 3 मॉडल तैयार किए हैं:

  1. अपूर्ण स्वचालन : जहाँ 90% काम ऑटोमेट हो जाता है और कुछ हिस्सा इंसानों के पास ही रहता है.

  2. पूर्ण स्वचालन : जहाँ इंसानों द्वारा किए जाने वाले सभी काम मशीनें करने लगती हैं.

  3. क्रमिक विकास : जहाँ AI हर साल थोड़ा-थोड़ा करके आगे बढ़ता है.

डरें नहीं, AI को अपना हमसफर बनाएं

अनुष्का के अनुसार, निष्कर्ष बिल्कुल साफ है कि अगले 10 से 15 सालों में हमारी नौकरियों और बिजनेस में बहुत बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे, लेकिन वे रातों-रात नहीं बल्कि बेहद क्रमिक और धीरे-धीरे होंगे. इसलिए AI से डरकर पीछे हटने या घबराने के बजाय, हमें AI को सीखने  पर ध्यान देना चाहिए. जो लोग समय रहते इस तकनीक को सीख लेंगे, वे अपनी इंडस्ट्री में काम करने के तरीकों को बदलकर लीडर बन सकते हैं.

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