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मां-बाप की संपत्ति पर आपका अधिकार है या नहीं? अनुष्का राठौड़ ने बताया सच

फाइनेंस इन्फ्लुएंसर अनुष्का राठौड़ ने हिंदू उत्तराधिकार कानून की एक महत्वपूर्ण बारीकी साझा की है। उनके अनुसार, बच्चों का हर संपत्ति पर जन्मसिद्ध अधिकार नहीं होता। पैतृक संपत्ति पर तो बच्चों का बराबर हक है, लेकिन माता-पिता द्वारा अपनी कमाई से खरीदी गई Self-acquired संपत्ति पर उनका पूर्ण अधिकार होता है। वे चाहें तो कानूनी रूप से अपने बच्चों को इससे वंचित कर सकते हैं।

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मां-बाप की संपत्ति पर आपका अधिकार है या नहीं,अनुष्का राठौड़ ने बताया सच

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • पैतृक संपत्ति: 4 पीढ़ियों से चली आ रही जायदाद पर बच्चों का हक बराबर है
  • स्व-अर्जित संपत्ति: मां-बाप की खुद की कमाई
  • बेदखली का अधिकार: माता-पिता अपनी खरीदी संपत्ति से बच्चों को निकाल सकते है

ज्यादातर भारतीयों का मानना है कि उनके माता-पिता के पास जो भी घर या जमीन है, उस पर उनका 'जन्मसिद्ध अधिकार' है। लेकिन प्रसिद्ध फाइनेंस इन्फ्लुएंसर अनुष्का राठौड़ ने अपने एक हालिया वीडियो में इस भ्रम को तोड़ दिया है। अनुष्का ने केरल के एक वास्तविक मामले का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे एक बेटा अपनी मां से संपत्ति का हिस्सा मांगते हुए कोर्ट में केस हार गया।

संपत्ति की दो श्रेणियां 

अनुष्का समझाती हैं कि हिंदू कानून के तहत संपत्तियों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है:

1. पैतृक संपत्ति 

यह वह संपत्ति है जो परिवार में कम से कम चार पीढ़ियों  से चली आ रही हो। इस संपत्ति पर आपका जन्मसिद्ध अधिकार होता है। इसका मतलब यह है कि यदि आपके पिता या दादा जीवित भी हैं, तब भी आप उस संपत्ति के बराबर के हिस्सेदार हैं। उनकी अनुमति के बिना इस संपत्ति को न तो बेचा जा सकता है और न ही आपको इससे बेदखल किया जा सकता है।

2. स्व-अर्जित संपत्ति 

यही वह जगह है जहाँ अधिकांश लोग धोखा खाते हैं। यदि आपके माता-पिता ने अपने पैसों से, मेहनत की कमाई से, या किसी गिफ्ट या वसीयत के जरिए कोई प्रॉपर्टी हासिल की है, तो वह 'स्व-अर्जित' कहलाती है। इस संपत्ति पर बच्चों का कोई जन्मसिद्ध अधिकार नहीं होता। माता-पिता इस प्रॉपर्टी के पूर्ण मालिक हैं और वे इसे किसी को भी बेच सकते हैं, गिफ्ट कर सकते हैं, या वसीयत में किसी बाहरी व्यक्ति के नाम कर सकते हैं। वे कानूनी रूप से अपने बच्चों को इस संपत्ति से पूरी तरह बाहर  कर सकते हैं।

बिना वसीयत के मौत होने पर क्या होता है? 

अनुष्का ने एक और महत्वपूर्ण बिंदु बताया है। यदि माता-पिता अपनी स्व-अर्जित संपत्ति के लिए कोई वसीयत नहीं छोड़ते और उनकी मृत्यु हो जाती है, तो कानून सक्रिय हो जाता है। ऐसी स्थिति में, हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत संपत्ति को पति/पत्नी, बेटे, बेटी और मां के बीच बराबर-बराबर बांट दिया जाता है।

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