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रोज़ अंडों की जगह क्या खाएं? सद्गुरु की खास सलाह
हाल ही में सद्गुरु का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा कि रोज़ाना अंडे खाना अच्छी आदत नहीं है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि अंडों पर निर्भर रहने के बजाय दक्षिण भारत के पारंपरिक शाकाहारी भोजन को अपनाना चाहिए, क्योंकि इनमें भी प्रोटीन और विटामिन B12 जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं।
रोज़ अंडों की जगह क्या खाएं? सद्गुरु की खास सलाह
Photo Credit: Instagram
- वायरल वीडियो में सद्गुरु ने अंडों पर सवाल उठाए
- B12 से भरपूर शाकाहारी विकल्प अपनाने की सलाह दी
- बयान के बाद सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य को लेकर बहस छिड़ी
आज के समय में अंडों को प्रोटीन का सबसे आसान और लोकप्रिय स्रोत माना जाता है। लेकिन हाल ही में एक सोशल मीडिया वीडियो में सद्गुरु ने इस सोच पर सवाल उठाते हुए अलग राय रखी है। उन्होंने कहा कि रोज़ाना अंडे खाने की आदत पर दोबारा विचार करना चाहिए और खासकर मौसम बदलने के दौरान सही भोजन चुनना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि इस समय शरीर की ऊर्जा पर असर पड़ सकता है।
सद्गुरु के अनुसार, गलत खान-पान की वजह से थकान, सुस्ती और शरीर की ऊर्जा में कमी महसूस हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि भोजन में ऐसे पोषक तत्व शामिल हों जो शरीर को पर्याप्त ताकत और संतुलन दें।
प्रोटीन और विटामिन B12 क्यों हैं जरूरी?
प्रोटीन शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। यह शरीर के ऊतकों की मरम्मत करने, मांसपेशियों को मजबूत बनाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और एंजाइम व हार्मोन बनाने में मदद करता है। चूंकि शरीर प्रोटीन को स्टोर नहीं कर सकता, इसलिए इसे नियमित रूप से भोजन के जरिए लेना जरूरी होता है। वहीं, विटामिन B12 भी शरीर के लिए उतना ही जरूरी है। यह नसों को स्वस्थ रखने, दिमाग की कार्यक्षमता बेहतर बनाने और याददाश्त व एकाग्रता बढ़ाने में मदद करता है। शरीर में विटामिन B12 की कमी होने पर थकान, कमजोरी, मूड में बदलाव और नसों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
खासतौर पर महिलाओं के लिए शरीर में पर्याप्त विटामिन B12 बनाए रखना बहुत जरूरी माना जाता है, क्योंकि यह उनके संपूर्ण स्वास्थ्य और ऊर्जा स्तर को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।

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दक्षिण भारत के ये देसी खाने बताए सद्गुरु ने
सद्गुरु का कहना है कि हमारे पुराने पारंपरिक खाने में भी शरीर के लिए जरूरी पोषण मिलता है। उन्होंने तीन ऐसे देसी व्यंजनों का जिक्र किया जो सालों से लोग खाते आ रहे हैं और आज भी काफी फायदेमंद माने जाते हैं।
लक्ष्मी चारु (Lakshmi Charu)
यह आंध्र प्रदेश का एक लोकप्रिय व्यंजन है। इसे चावल पकाने के बाद बचे पानी, इमली और मसालों से बनाया जाता है। यह हल्का होता है, पेट पर बोझ नहीं डालता और आसानी से पच जाता है। लोग इसे आमतौर पर चावल के साथ खाते हैं।
पझाया सदम (Pazhaya Sadam)
यह तमिलनाडु का एक पारंपरिक खाना है। इसमें रात के बचे चावल को पानी में भिगोकर रखा जाता है और सुबह दही, प्याज या अचार के साथ खाया जाता है। माना जाता है कि यह पेट को ठंडक देता है और पाचन के लिए अच्छा होता है, खासकर गर्मियों में।
कूझ (Koozh)
कूझ रागी या बाजरे से बना एक गाढ़ा दलिया जैसा भोजन है। यह पेट भरने वाला होता है और लंबे समय तक ऊर्जा देने में मदद करता है। गांवों में इसे आज भी बड़े चाव से खाया जाता है।
सद्गुरु की सलाह क्या है?
सद्गुरु का कहना है कि अच्छी सेहत के लिए सिर्फ अंडों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। हमारे पारंपरिक भारतीय खाने में भी कई ऐसे विकल्प मौजूद हैं जो शरीर को जरूरी पोषण दे सकते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय और संतुलित खाना शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।
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