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पसीना बहाने से नहीं होता बॉडी डिटॉक्स: डायटीशियन पूजा मखीजा ने तोड़ा फिटनेस की दुनिया का सबसे बड़ा मिथक

क्या ज्यादा पसीना बहने का मतलब बेहतर डिटॉक्स है? डायटीशियन पूजा मखीजा के अनुसार, यह सिर्फ एक मिथक है। शरीर को डिटॉक्स करने का असली काम लिवर और किडनी करते हैं, न कि पसीना। गर्मियों में एक्सरसाइज करने का असली उद्देश्य ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाना और लिम्फैटिक सिस्टम को मजबूत करना है। पूजा मखीजा सलाह देती हैं कि भारी वर्कआउट के बजाय इस मौसम में खुद को हाइड्रेटेड रखते हुए निरंतरता और हल्के मूवमेंट पर ध्यान दें।

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पूजा मखीजा ने तोड़ा फिटनेस की दुनिया का सबसे बड़ा मिथक

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • ज्यादा पसीना यानी ज्यादा डिटॉक्स
  • डायटीशियन पूजा मखीजा ने तोड़ा फिटनेस का यह पुराना मिथक
  • डिटॉक्स का काम लिवर और किडनी का है

अक्सर जिम में या वर्कआउट करते समय लोग यह सोचते हैं कि जितना ज्यादा पसीना निकलेगा, शरीर से उतने ही ज्यादा टॉक्सिन्स  बाहर निकलेंगे। लेकिन क्या वाकई पसीना बहाना ही डिटॉक्सिफिकेशन है? इसी भ्रम को दूर करते हुए जानी-मानी सेलिब्रिटी डायटीशियन पूजा मखीजा ने बताया कि आपके शरीर की डिटॉक्स प्रक्रिया वास्तव में आपके आंतरिक अंगों जैसे लिवर और किडनी द्वारा संचालित होती है, न कि पसीने से। तो फिर हमें इस भीषण गर्मी में भी एक्टिव क्यों रहना चाहिए? क्योंकि शारीरिक गतिविधि उस चीज को सपोर्ट करती है जिस पर आपका शरीर वास्तव में निर्भर करता है और वह है सर्कुलेशन 

गर्मियों में क्यों जरूरी है मूवमेंट? 

पूजा मखीजा स्पष्ट करती हैं कि एक्सरसाइज का मतलब सिर्फ कैलोरी बर्न करना या पसीना बहाना नहीं है। जब आप अपने शरीर को हिलाते-डुलाते हैं, तो यह रक्त प्रवाह  को बढ़ाता है, जिससे ऑक्सीजन और पोषक तत्व पूरे शरीर में अधिक कुशलता से पहुंचते हैं। यह बेहतर सर्कुलेशन हमारे लिम्फैटिक सिस्टम  को भी सपोर्ट करता है, जो शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाता है। गर्मियों में थकान से बचने और शरीर का संतुलन बनाए रखने के लिए वॉक, स्ट्रेचिंग या लाइट वेट ट्रेनिंग जैसी कम तीव्रता वाली गतिविधियां भी बेहद फायदेमंद होती हैं।

हीट एडाप्टेशन की ताकत 

गर्मियों में वर्कआउट करने का एक और अनदेखा फायदा यह है कि यह आपके शरीर को गर्मी को बेहतर तरीके से सहन करना सिखाता है। जब आप गर्म मौसम में समझदारी से वर्कआउट करते हैं, तो धीरे-धीरे आपका शरीर तापमान के प्रति अनुकूल हो जाता है। आपका कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम मजबूत होता है, ब्लड वॉल्यूम सुधरता है और शरीर अधिक प्रभावी ढंग से पसीना बहाकर खुद को तेजी से ठंडा करना सीख जाता है। इससे आप गर्मियों में थका हुआ महसूस करने के बजाय अधिक लचीले और सहज बन जाते हैं।

तीव्रता नहीं, निरंतरता है जरूरी 

पूजा मखीजा के इस संदेश का सबसे बड़ा सार यह है कि गर्मियों के वर्कआउट का थकाऊ या बहुत भारी होना जरूरी नहीं है। इस मौसम में अपने शरीर की सुनना और वर्कआउट में निरंतरता  बनाए रखना ज्यादा मायने रखता है। एक्सरसाइज को शरीर के लिए एक सजा की तरह देखने के बजाय इसे सेल्फ-केयर के रूप में अपनाएं। खुद को हाइड्रेटेड रखकर, दिन का सही समय चुनकर और वर्कआउट की इंटेंसिटी को मौसम के हिसाब से एडजस्ट करके आप अपने स्वास्थ्य को बेहतरीन बनाए रख सकते हैं। पसीना भले ही आपका मुख्य डिटॉक्स रास्ता न हो, लेकिन इस मौसम में समझदारी से किया गया मूवमेंट आपकी सेहत के लिए चमत्कार कर सकता है।

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