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सद्गुरु का संदेश: नियमित अभ्यास से कैसे बदलती है आपकी जीवन ऊर्जा
सद्गुरु के अनुसार शांभवी महामुद्रा आपके भीतर एक 'जीवित बीज' की तरह रोपी जाती है। जैसे एक छोटे से बीज को रोज़ पानी देकर विशाल वृक्ष बनाया जा सकता है, ठीक वैसे ही इस सरल योगिक अभ्यास को रोज़ नर्चर करने से आपके जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन आता है। बस इस प्रक्रिया के प्रति समर्पित रहें और रोज़ इसका अभ्यास करें। 'इनर इंजीनियरिंग' प्रोग्राम के ज़रिये आप इसे सीख सकते हैं।
सद्गुरु का संदेश: नियमित अभ्यास से कैसे बदलती है आपकी जीवन ऊर्जा
Photo Credit: Instagram
- शांभवी महामुद्रा आपके भीतर एक जीवित बीज की तरह है
- सद्गुरु ने बताया आध्यात्मिक विकास के लिए निरंतरता ही असली कुंजी है
- इनर इंजीनियरिंग से पाएं जीवन में असली सुख और मानसिक शांति
हम सब अपनी जिंदगी में शांति, खुशी और संतुलन की तलाश में रहते हैं। अक्सर हम योग और ध्यान को केवल शरीर को फिट रखने का जरिया मानते हैं। लेकिन आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु का कहना है कि 'इनर इंजीनियरिंग' और 'शांभवी महामुद्रा' इससे कहीं बढ़कर है। उन्होंने एक बहुत ही सुंदर उदाहरण के जरिए समझाया कि यह प्रक्रिया आपके भीतर कैसे काम करती है।
एक जीवित प्रक्रिया, मृत विचार नहीं
सद्गुरु कहते हैं कि जब आप शांभवी महामुद्रा सीखते हैं, तो इसे केवल एक एक्सरसाइज या तकनीक मत समझिए। यह आपके भीतर एक 'जीवित बीज' को बोने जैसा है। जैसे एक बीज में पूरा विशाल पेड़ बनने की क्षमता छिपी होती है, वैसे ही इस प्रक्रिया में आपके जीवन को पूरी तरह बदलने की शक्ति है। यह कोई पुराना विचार नहीं है जिसे आपको रटना है, बल्कि एक अनुभव है जिसे आपको जीना है।
रोजाना की देखभाल है ज़रूरी
एक छोटा सा बीज तभी वटवृक्ष बनता है जब उसे रोज़ सही मात्रा में धूप और पानी मिले। सद्गुरु समझाते हैं कि शांभवी महामुद्रा भी ऐसी ही है। इसकी शुरुआत भले ही आपको छोटी लगे, शायद पहले दिन आपको कोई बड़ा चमत्कार न दिखे, लेकिन अगर आप इसे रोज़ थोड़ा समय देते हैं, तो यह आपके भीतर गहराई तक जड़ें जमा लेता है। आपकी निरंतरता ही वह पानी है जो इस आध्यात्मिक बीज को सींचता है।
भरोसा रखें, परिणाम अपने आप आएगा
सद्गुरु ने एक मज़ेदार बात कही सोचिए अगर कोई आपको एक छोटा सा काला बीज दिखाकर कहे कि इसे आँगन में लगाओ, इससे फल मिलेंगे और छाया मिलेगी, तो शायद आप पहली बार में यकीन न करें। आप सोचेंगे कि इतना छोटा सा दाना इतना बड़ा बदलाव कैसे ला सकता है? लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है और वह बीज बढ़ता है, वह एक ऐसा रूप ले लेता है जिसे पहचानना भी मुश्किल हो जाता है।
ठीक इसी तरह, आपको शांभवी के परिणामों को लेकर बहुत ज़्यादा चिंता करने या सोचने की ज़रूरत नहीं है। आपको बस इस साधारण प्रक्रिया के प्रति समर्पित रहना है। जब आप बिना किसी उम्मीद के इस साधना को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाते हैं, तो एक दिन आप खुद महसूस करेंगे कि आप पहले जैसे इंसान नहीं रहे।
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