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सद्गुरु का चौंकाने वाला खुलासा: मरने के बाद भी क्यों भटकती है इंसान की ऊर्जा

मौत एक ऐसा रहस्य है जिसे हर कोई समझना चाहता है। आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने इस पर एक नया नजरिया पेश किया है। उनके अनुसार, शरीर के खत्म होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति पूरी तरह गायब हो गया है। वे बताते हैं कि मानसिक और प्राणिक शरीर हमारे कर्मों के अनुसार बने रहते हैं। जिसे हम 'भूत' कहते हैं, वह असल में वह ऊर्जा है जिसका कर्म अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

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मौत के बाद भी व्यक्ति का अस्तित्व खत्म नहीं होता: सद्गुरु

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • सद्गुरु के अनुसार शरीर नष्ट होता है, लेकिन कर्म बना रहता है
  • भूत असल में वे ऊर्जाएं हैं जिनका कर्म अभी खत्म नहीं हुआ है
  • मौत के बाद भी व्यक्ति का अस्तित्व खत्म नहीं होता: सद्गुरु

मौत का नाम सुनते ही हमारे मन में डर और अनगिनत सवाल उठने लगते हैं। क्या यह जीवन का अंत है या फिर बस एक नई शुरुआत?  सद्गुरु का यह वीडियो हमें जीवन और मृत्यु के बीच के उस धुंधले पर्दे के पार ले जाता है जिसे हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं।

क्या मौत सच में अंत है?

अक्सर जब किसी की मृत्यु होती है, तो हम कहते हैं कि वह व्यक्ति अब नहीं रहा। लेकिन सद्गुरु कहते हैं कि यह सच नहीं है। उनके अनुसार, वह व्यक्ति सिर्फ उस रूप में नहीं रहता जिसे आप जानते थे, लेकिन उसका अस्तित्व पूरी तरह खत्म नहीं होता। हमारा भौतिक शरीर तो मिट्टी में मिल जाता है, लेकिन हमारा मानसिक और प्राणिक शरीर हमारे 'कर्म' की ताकत के आधार पर टिका रहता है। यह सुनने में थोड़ा रहस्यमयी लग सकता है, लेकिन यह हमारे अस्तित्व की एक गहरी सच्चाई है।

भूत: डर या ऊर्जा का रूप?

हम जिसे 'भूत' कहते हैं, सद्गुरु ने उसे बहुत ही सरल तरीके से समझाया है। वे बताते हैं कि जब किसी का कर्म चक्र अभी पूरा नहीं हुआ होता और शरीर छूट जाता है, तो वह ऊर्जा का रूप अधिक तीव्र और अनुभव करने योग्य हो जाता है। यही वह स्थिति है जिसे आम भाषा में लोग भूत-प्रेत का नाम दे देते हैं। यह कोई डरावनी कहानी नहीं, बल्कि ऊर्जा और कर्मों का एक ढांचा है जो अभी भी सक्रिय है।

अस्वाभाविक मृत्यु का गहरा रहस्य

सद्गुरु ने दुर्घटनाओं या आत्महत्या जैसी अस्वाभाविक मृत्यु पर भी प्रकाश डाला। वे कहते हैं कि ऐसी स्थितियों में कर्म की संरचना बहुत घनी होती है क्योंकि व्यक्ति का समय अभी पूरा नहीं हुआ था। इसी वजह से उनकी उपस्थिति दूसरों को अधिक महसूस होती है। हमारे चारों ओर ऐसी अनगिनत ऊर्जाएं हो सकती हैं, लेकिन हम उन्हें महसूस नहीं कर पाते क्योंकि उनके कर्म समय के साथ धीरे-धीरे कम हो जाते हैं। सद्गुरु का यह ज्ञान हमें मौत के प्रति डर को छोड़कर जीवन की गहराई को समझने की प्रेरणा देता है।

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