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ब्रांड के नाम पर कहीं आप धोखा तो नहीं खा रहे? इशिता मंगल ने बताया लग्जरी ज्वेलरी का असली मतलब
मशहूर फैशन इन्फ्लुएंसर इशिता मंगल ने लग्जरी ज्वेलरी की परिभाषा को बदलते हुए उपभोक्ताओं को जागरूक किया है। उनका तर्क है कि बड़े ब्रांड्स की चमक के पीछे अक्सर साधारण मेटल्स और सिंथेटिक पत्थरों का इस्तेमाल होता है, जिनकी कोई रीसेल वैल्यू नहीं होती। इशिता के अनुसार, असली लग्जरी वह है जो समय के साथ अपनी कीमत बनाए रखे। उन्होंने फैशन को फाइनेंस से जोड़ते हुए सुझाव दिया है कि खरीदारी ऐसी होनी चाहिए जो स्टाइल के साथ आपकी संपत्ति भी बढ़ाए।
ब्रांड के नाम पर कहीं आप धोखा तो नहीं खा रहे? इशिता मंगल ने बताया लग्जरी ज्वेलरी का असली मतलब
Photo Credit: Instagram
- ज्वेलरी को बनाएं वित्तीय एसेट
- दिखावे की लग्जरी से बचें
- ब्रांड नहीं, धातु की कीमत पहचानें
आज के दौर में 'लग्जरी' का मतलब केवल एक महंगा टैग या किसी अंतरराष्ट्रीय ब्रांड का लोगो बनकर रह गया है। लेकिन क्या लाखों रुपये खर्च करने के बाद आपको मिलने वाली चीज वाकई कीमती है? इसी सवाल का जवाब दिया है मशहूर फैशन इन्फ्लुएंसर इशिता मंगल ने। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इशिता ने ज्वेलरी मार्केट के उस सच से पर्दा उठाया है, जिसे अक्सर विज्ञापन की चकाचौंध में छुपा दिया जाता है।
ब्रांडेड 'कॉस्ट्यूम' ज्वेलरी का भ्रम
इशिता बताती हैं कि कई नामी अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स ऐसे गहने बेचते हैं जो दिखने में बेहद खूबसूरत और महंगे होते हैं, लेकिन असल में वे 'कॉस्ट्यूम ज्वेलरी' की श्रेणी में आते हैं। इनमें अक्सर बेस मेटल पर सोने की पानी चढ़ी होती है और इनमें लगे पत्थर भी सिंथेटिक होते हैं। उपभोक्ता केवल ब्रांड के नाम के कारण इनके लिए भारी कीमत चुकाते हैं, जबकि धातु के नजरिए से इनकी असल कीमत नाममात्र होती है।
सिम्बॉलिक बनाम मटेरियल लग्जरी
इशिता ने दो तरह की लग्जरी के बीच अंतर स्पष्ट किया है। एक है 'सिम्बॉलिक लग्जरी', जो सामाजिक स्थिति और ब्रांड की पहचान से जुड़ी होती है। दूसरी है 'मटेरियल लग्जरी', जो शुद्धता, मजबूती और दीर्घकालिक मूल्य पर आधारित होती है। इशिता का तर्क है कि असली लग्जरी वही है जिसमें ठोस सोना असली हीरे या प्राकृतिक रत्न हों। यह न केवल पहनने में शानदार दिखते हैं, बल्कि संकट के समय एक वित्तीय संपत्ति की तरह काम करते हैं।
फैशन और फाइनेंस का मेल
इशिता की सलाह केवल स्टाइल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बेहतरीन 'मनी मैनेजमेंट' टिप्स भी है। वह कहती हैं कि यदि आपका बजट किसी बड़े ब्रांड की गोल्ड-प्लेटेड ज्वेलरी खरीदने का है, तो उतनी ही रकम में आप किसी स्थानीय या विश्वसनीय जौहरी से असली सोने का एक छोटा लेकिन कीमती गहना खरीद सकते हैं। ब्रांडेड कॉस्ट्यूम ज्वेलरी का फैशन खत्म होते ही उसकी वैल्यू खत्म हो जाती है, जबकि असली सोना और रत्न पीढ़ियों तक चलते हैं और उनकी कीमत भी बढ़ती रहती है।
समझदार उपभोक्ता बनें
अंत में, इशिता का संदेश 'कॉन्शियस कंजम्पशन' यानी सोच-समझकर खर्च करने का है। उनका कहना है कि खरीदारी करते समय शिल्प कौशल के साथ-साथ सामग्री की प्रमाणिकता और उसके पुनर्विक्रय मूल्य की जांच अवश्य करें। असली लग्जरी वह है जो आपके वार्डरोब के साथ-साथ आपके पोर्टफोलियो में भी मूल्य जोड़े। इशिता की यह सलाह उन लोगों के लिए आंखें खोलने वाली है जो केवल फैशन ट्रेंड्स के पीछे भागकर अपनी जमा-पूंजी खर्च कर देते हैं।
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