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नौकरी जॉइन करने से पहले समझें सीटीसी का गणित: साक्षी जैन से जानिए सैलरी के छिपे हुए कॉम्पोनेंट्स का सच
क्या आपकी सीटीसी और इन-हैंड सैलरी में बड़ा अंतर है? फाइनेंस इन्फ्लुएंसर साक्षी जैन के इस वीडियो से जानिए इसका कारण। सीटीसी में बेसिक सैलरी के अलावा पीएफ, ग्रेच्युटी, इंश्योरेंस और परफॉर्मेंस बोनस जैसे इनडायरेक्ट बेनिफिट्स शामिल होते हैं। टैक्स और अन्य कटौतियों के बाद जो बचता है, वही आपकी असली इन-हैंड सैलरी होती है। साक्षी की सलाह है कि कोई भी जॉब ऑफर स्वीकार करने से पहले सैलरी ब्रेकडाउन को अच्छी तरह जरूर समझें।
नौकरी जॉइन करने से पहले समझें सीटीसी का गणित: साक्षी जैन से जानिए सैलरी के छिपे हुए कॉम्पोनेंट्स का सच
Photo Credit: Instagram
- ऑफर लेटर में दिखने वाली पूरी सीटीसी बैंक खाते में नहीं आती है
- सीटीसी में कंपनी द्वारा कर्मचारी पर किया जाने वाला कुल सालाना खर्च शामिल
- टैक्स, पीएफ, ग्रेच्युटी और इंश्योरेंस जैसे कॉम्पोनेंट्स इन-हैंड सैलरी
क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि नया जॉब ऑफर लेटर देखकर आप उसकी बड़ी सी रकम से बेहद खुश हुए हों, लेकिन जब महीने के अंत में सैलरी बैंक अकाउंट में आई तो वह काफी कम निकली? अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं। ज्यादातर कामकाजी प्रोफेशनल्स इस बात से परेशान रहते हैं। इसी उलझन को दूर करते हुए जानी-मानी फाइनेंस इन्फ्लुएंसर साक्षी जैन ने एक बहुत ही सरल और आंखें खोल देने वाला विश्लेषण साझा किया है। उनका कहना है कि आपकी सीटीसी आपकी असली सैलरी नहीं होती, और करियर की शुरुआत में ही इस अंतर को समझ लेना बेहद जरूरी है।
आखिर क्या होती है सीटीसी
सीटीसी का सीधा सा मतलब है वह कुल रकम जो एक कंपनी एक साल में अपने कर्मचारी पर खर्च करती है। इस आंकड़े में आपके मासिक वेतन के अलावा और भी बहुत कुछ जुड़ा होता है। बेसिक सैलरी और भत्तों से लेकर बोनस, इंश्योरेंस और यहाँ तक कि कंपनी की तरफ से दिया जाने वाला भविष्य निधि का हिस्सा भी इसी में बंडल होता है। यही कारण है कि यह नंबर काफी बड़ा दिखाई देता है, लेकिन इसमें से कई हिस्से लॉन्ग-टर्म सेविंग्स या इनडायरेक्ट बेनिफिट्स के रूप में होते हैं, जो सीधे आपके हाथ में नहीं आते।
इन-हैंड सैलरी क्यों कम हो जाती है?
आपकी इन-हैंड या टेक-होम सैलरी वह शुद्ध रकम होती है जो सभी जरूरी कटौतियों के बाद आपके बैंक खाते में क्रेडिट की जाती है। इसमें से निम्नलिखित हिस्से कटते हैं:
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टैक्स और पीएफ: इनकम टैक्स, कर्मचारी का खुद का पीएफ योगदान और प्रोफेशनल टैक्स।
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छिपे हुए कॉम्पोनेंट्स: साक्षी जैन बताती हैं कि सीटीसी में कुछ ऐसे तत्व भी शामिल होते हैं जिन पर लोग अक्सर ध्यान नहीं देते। उदाहरण के लिए, ग्रेच्युटी (जो एक निश्चित समय तक नौकरी करने के बाद ही मिलती है), परफॉर्मेंस बोनस (जो पूरी तरह गारंटीड नहीं होता) और इंश्योरेंस बेनिफिट्स (जो कैश के बजाय नॉन-कैश पर्क्स होते हैं)।
ये सभी कॉम्पोनेंट्स भविष्य या सुरक्षा के लिहाज से बेहद मूल्यवान हैं, लेकिन ये आपकी वर्तमान कैश फ्लो को बढ़ा नहीं सकते।
इस गणित को समझना क्यों जरूरी है?
अगर आप अपनी सैलरी स्ट्रक्चर को ठीक से नहीं समझते हैं, तो आप ऑफर लेटर के बड़े नंबर को देखकर अपने वित्तीय फैसले (जैसे लोन, ईएमआई या निवेश की प्लानिंग) गलत तरीके से ले सकते हैं। साक्षी जैन इस बात पर जोर देती हैं कि वित्तीय जागरूकता कोई ऑप्शनल चीज नहीं बल्कि अनिवार्य है। किसी भी नए जॉब ऑफर को स्वीकार करने से पहले कंपनी से हमेशा उसकी पूरी ब्रेकडाउन शीट मांगें। फिक्स्ड बनाम वेरिएबल कॉम्पोनेंट्स को समझें और अपना ध्यान हमेशा इन-हैंड सैलरी पर केंद्रित रखें। जब आप अपने पैसों का सही गणित समझ जाते हैं, तभी आप उसे अपने लिए सही तरह से इस्तेमाल कर पाते हैं।
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