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ऑनलाइन फ्रॉड होने पर अब RBI देगा मुआवजा: जानिए क्या हैं रिजर्व बैंक के नए साइबर फ्रॉड रूल्स और आपकी 'जीरो लायबिलिटी' की शर्तें

डिजिटल पेमेंट्स को सुरक्षित बनाने के लिए RBI ने ऑनलाइन फ्रॉड के नियमों को कड़ा कर दिया है। नए दिशानिर्देशों के अनुसार, बैंक की लापरवाही या थर्ड-पार्टी चूक होने पर 5 दिनों के भीतर शिकायत करने पर ग्राहकों की जिम्मेदारी शून्य होगी। इसके अलावा, ₹50,000 तक के साइबर फ्रॉड के मामलों में पीड़ितों को अधिकतम ₹25,000 तक का मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है। क्रेडिट कार्ड फ्रॉड होने पर बैंकों को 5 दिनों के भीतर विवादित राशि पर शैडो रिवर्सल (अस्थायी राहत) देनी होगी।

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जानिए क्या हैं रिजर्व बैंक के नए साइबर फ्रॉड रूल्स और आपकी 'जीरो लायबिलिटी' की शर्तें

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • ऑनलाइन फ्रॉड होने पर अब बैंक और RBI देंगे ₹25,000 तक का मुआवजा
  • क्रेडिट कार्ड या UPI से उड़े पैसे
  • ओटीपी स्कैम और डिजिटल अरेस्ट पर RBI का बड़ा एक्शन

भारत में डिजिटल पेमेंट क्रांति ने जितनी तेजी से पैर पसारे हैं, उतनी ही तेजी से 'डिजिटल अरेस्ट', 'ओटीपी स्कैम' और 'फिशिंग अटैक्स' जैसे साइबर अपराधों में भी बाढ़ आई है। पहले बैंक अक्सर ग्राहकों पर ही लापरवाही का ठीकरा फोड़कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते थे। इसी को रोकने के लिए आरबीआई ने कमर्शियल बैंकों के लिए रेस्पोंसिबल बिजनेस कंडक्ट नियम के तहत तीसरे संशोधन को मंजूरी दी है। यह नया ढांचा ग्राहकों को सिर्फ सुरक्षा ही नहीं देता, बल्कि फ्रॉड के शिकार हुए लोगों के नुकसान की भरपाई करने के लिए एक तय कंपनसेशन मॉडल भी पेश करता है।

कब ग्राहक की जिम्मेदारी होगी बिल्कुल शून्य? 

आरबीआई के नए नियमों के अनुसार, दो मुख्य परिस्थितियों में ग्राहकों को ₹1 का भी नुकसान नहीं उठाना होगा:

  1. बैंक की लापरवाही : यदि बैंक का सर्वर हैक होता है, अंदरूनी फ्रॉड होता है, या बैंक ₹500 से अधिक के ट्रांजैक्शन का अनिवार्य एसएमएस और ईमेल अलर्ट भेजने में विफल रहता है, तो पूरी गलती बैंक की मानी जाएगी। इस स्थिति में ग्राहक चाहे तुरंत रिपोर्ट करे या न करे, बैंक को पूरा पैसा रिवर्स करना होगा।

  2. इकोसिस्टम की चूक : यदि फ्रॉड बैंक या ग्राहक की गलती से नहीं, बल्कि किसी पेमेंट गेटवे, टेलीकॉम कंपनी या ऐप प्रोवाइडर के लूपहोल की वजह से होता है, तो ग्राहक को 5 कैलेंडर दिनों के भीतर इसकी रिपोर्ट नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल (या 1930 हेल्पलाइन) और अपने बैंक को करनी होगी। समय पर रिपोर्ट करने से ग्राहक की जिम्मेदारी शून्य हो जाएगी।

₹25,000 तक के मुआवजे का नया नियम 

इस नीति का सबसे क्रांतिकारी हिस्सा छोटे डिजिटल फ्रॉड के लिए तय किया गया मुआवजा नियम है। यदि कोई प्रामाणिक पीड़ित (Bona fide victim) समय पर (5 दिनों के भीतर) फ्रॉड की शिकायत दर्ज कराता है और उसके खाते से ₹50,000 तक की अवैध निकासी हुई है, तो उसे कुल शुद्ध नुकसान का 85% या अधिकतम ₹25,000 (जो भी कम हो) मुआवजे के रूप में दिया जाएगा। यह जीवनकाल में एक बार मिलने वाली विशेष सुविधा है। इस मुआवजे का खर्च आरबीआई (65%), ग्राहक का बैंक (10%) और जिस खाते में फ्रॉड का पैसा पहली बार ट्रांसफर हुआ है यानी बेनिफिशियरी बैंक (Beneficiary Bank - 10%), आपस में मिलकर वहन करेंगे।

क्रेडिट कार्ड यूजर्स और यूपीआई के लिए सख्त निर्देश 

  • क्रेडिट कार्ड शैडो रिवर्सल : यदि आपके क्रेडिट कार्ड से कोई धोखाधड़ी वाला ट्रांजैक्शन होता है, तो बैंक को शिकायत मिलने के 5 दिनों के भीतर उस राशि पर 'शैडो रिवर्सल' लागू करना होगा, ताकि जांच चलने तक ग्राहक पर ब्याज या पैलेंटी का बोझ न पड़े।

  • अनिवार्य टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन  आरबीआई ने केवल ओटीपी आधारित सुरक्षा के कमजोर होने के बाद अब सभी डिजिटल चैनलों, मोबाइल वॉलेट और यूपीआई पर अनिवार्य रूप से डिवाइस बाइंडिंग, इन-एप एन्क्रिप्टेड नोटिफिकेशन या बायोमेट्रिक जैसे अतिरिक्त सुरक्षा स्तर लागू करने का निर्देश दिया है।

  • समय सीमा  बैंकों को घरेलू डिजिटल फ्रॉड के मामलों का निपटारा हर हाल में 45 दिनों के भीतर और इंटरनेशनल फ्रॉड का निपटारा 60 दिनों के भीतर करना होगा।

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