स्टॉक मार्केट में बड़ा उलटफेर! AI के दम पर ताइवान और दक्षिण कोरिया ने भारत को पछाड़ा
सीए रचना रानाडे के अनुसार, भारत दुनिया के 5वें सबसे बड़े शेयर बाजार से फिसलकर 7वें स्थान पर आ गया है। ताइवान और दक्षिण कोरिया ने AI और सेमीकंडक्टर के दम पर भारत को पछाड़ दिया है। जहाँ ताइवान की TSMC और कोरिया की सैमसंग जैसी कंपनियां AI क्रांति का नेतृत्व कर रही हैं, वहीं भारत में विदेशी निवेशकों की निकासी और किसी बड़े AI हार्डवेयर दिग्गज की कमी ने बाज़ार को पीछे धकेल दिया है।
स्टॉक मार्केट में बड़ा उलटफेर! AI के दम पर ताइवान और दक्षिण कोरिया ने भारत को पछाड़ा
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- भारत 7वें स्थान पर फिसला
- AI चिप्स ने बदली बाजी
- सेमीकंडक्टर दिग्गजों का बढ़ा दबदबा
कुछ हफ्ते पहले तक भारत दुनिया का 5वां सबसे बड़ा शेयर बाजार था, लेकिन जून 2026 तक भारत फिसलकर 7वें स्थान पर आ गया है। मशहूर फाइनेंस इन्फ्लुएंसर सीए रचना रानाडे ने बताया कि ताइवान और दक्षिण कोरिया ने भारत को पछाड़ दिया है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि भारतीय बाज़ार को इन छोटे देशों से मात खानी पड़ी?
AI की लहर और ताइवान का दबदबा
ताइवान के आगे निकलने का सबसे बड़ा कारण AI है। ताइवान दुनिया की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर निर्माता कंपनी TSMC का घर है। एनवीडिया से लेकर एप्पल तक, दुनिया की लगभग हर बड़ी AI कंपनी TSMC के चिप्स पर निर्भर है। जैसे ही दुनिया भर में AI पर निवेश बढ़ा, TSMC की वैल्यूएशन रॉकेट की तरह ऊपर गई और पूरे ताइवान स्टॉक मार्केट को नई ऊंचाइयों पर ले गई।
दक्षिण कोरिया का 'मेमोरी' पावर
दक्षिण कोरिया ने भी इसी AI लहर का फायदा उठाया। सैमसंग और SK Hynix जैसी कंपनियां AI डेटा सेंटर्स के लिए जरूरी 'एडवांस्ड मेमोरी चिप्स' बनाती हैं। वैश्विक निवेशकों ने भारत जैसे विकासशील बाज़ारों से पैसा निकालकर इन सेमीकंडक्टर दिग्गजों में निवेश किया, जिससे दक्षिण कोरिया का मार्केट कैप भारत से ऊपर निकल गया।
भारत कहाँ पिछड़ गया?
रचना रानाडे ने भारत के पिछड़ने के तीन मुख्य कारण बताए:
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विदेशी निवेशकों की विदाई : विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से अरबों डॉलर निकाल लिए।
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धीमी कमाई : कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ में सुस्ती देखी गई।
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AI हार्डवेयर दिग्गज की कमी: भारत के पास अभी तक TSMC या सैमसंग जैसा कोई भी लिस्टेड AI हार्डवेयर दिग्गज नहीं है।
भविष्य की चुनौती
असली सवाल यह नहीं है कि भारत पीछे क्यों रह गया, बल्कि सवाल यह है कि क्या अगले दशक में भारत अपना खुद का ग्लोबल AI और सेमीकंडक्टर चैंपियन बना पाएगा? यही तय करेगा कि भविष्य में एशिया के शेयर बाजारों का नेतृत्व कौन करेगा।
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