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गुस्सा नहीं, ये तो चालाकी है! सद्गुरु ने खोला इंसानी स्वभाव का सबसे कड़वा सच

आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने हाल ही में साझा किया कि गुस्सा, तनाव और चिंता जैसी भावनाएं बाहर से नहीं आतीं, बल्कि हम उन्हें खुद पैदा करते हैं। उन्होंने गुस्से को एक 'अस्थायी पागलपन' बताया जिसे हम अक्सर सोच-समझकर दूसरों पर निकालते हैं। सद्गुरु के अनुसार, 'इनर इंजीनियरिंग' के ज़रिए हम अपने मन और भावनाओं पर पूर्ण नियंत्रण पा सकते हैं और एक संतुलित व खुशहाल जीवन जी सकते हैं।

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सद्गुरु ने बताया गुस्सा और तनाव को कैसे खत्म करें

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • हम खुद ही अपनी भावनाओं को जन्म देते हैं: सद्गुरु
  • सद्गुरु ने बताया गुस्सा और तनाव को कैसे खत्म करें
  • गुस्सा एक सोच-समझकर किया गया अस्थायी पागलपन है

क्या आपको भी लगता है कि आपकी भावनाओं पर आपका कोई कंट्रोल नहीं है? क्या छोटी-छोटी बातें आपको परेशान कर देती हैं? मशहूर आध्यात्मिक गुरु Sadhguru का एक नया वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी धूम मचा रहा है। इस वीडियो में उन्होंने गुस्से, तनाव और चिंता जैसी समस्याओं को लेकर एक ऐसा नज़रिया पेश किया है, जो शायद आपने पहले कभी नहीं सुना होगा।

भावनाओं को मैनेज नहीं, समझना ज़रूरी है

अक्सर लोग तनाव या गुस्से को 'मैनेज' करने की बात करते हैं, लेकिन सद्गुरु का मानना है कि इन्हें मैनेज करने की कोई ज़रूरत नहीं है। वे कहते हैं कि सबसे पहले हमें यह समझना होगा कि ये भावनाएं बाहर से हम पर हमला नहीं करतीं, बल्कि हम इन्हें खुद अपने भीतर पैदा करते हैं। जब हम इस सच्चाई को गहराई से स्वीकार कर लेते हैं, तो अपनी आंतरिक स्थिति पर हमारा नियंत्रण बेहतर हो जाता है। यह सब कुछ हमारे नजरिए का खेल है।

गुस्से का पागलपन और इसकी असलियत

सद्गुरु ने एक बहुत ही दिलचस्प उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम में लोग गुस्से के लिए अक्सर कहते हैं, "I got mad" यानी "मैं पागल हो गया था।" उनके अनुसार, यह कहना बिल्कुल सही है क्योंकि गुस्सा वाकई एक अस्थायी पागलपन है। लेकिन हम इस पागलपन का इस्तेमाल भी बड़ी चालाकी से करते हैं। क्या आपने कभी गौर किया है कि लोग अक्सर अपने से छोटे या कमज़ोर लोगों पर ही गुस्सा निकालते हैं? वे कभी अपने बॉस या किसी ताकतवर व्यक्ति के सामने गुस्सा नहीं करते। इसका मतलब साफ है कि गुस्सा कोई अनियंत्रित भावना नहीं, बल्कि एक चुनाव है जिसे हम अपनी सुविधा के अनुसार चुनते हैं।

इनर इंजीनियरिंग: खुद को बदलने का रास्ता

सद्गुरु का कहना है कि अगर हम खुद पर थोड़ा काम करें, तो हम यह पूरी तरह तय कर सकते हैं कि हमारे अंदर क्या और कैसा महसूस होना चाहिए। इसके लिए उन्होंने Inner Engineering का रास्ता सुझाया है। यह एक ऐसा प्रोग्राम है जो इंसान को अपने शरीर, मन, भावनाओं और ऊर्जा पर काबू पाने के लिए ज़रूरी टूल्स देता है। उनका मानना है कि जब आप अंदर से सुव्यवस्थित होते हैं, तो बाहरी परिस्थितियां आपको विचलित नहीं कर पातीं।

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